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पूरब की फिजा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इतने ही निर्भीक और दिलेराना ढंग से केंद्र में भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार पर हमला बोला और उसे देश में 'सुपर इमरजेंसी' लगाने और डर का माहौल पैदा करने का दोषी ठहराया.

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aajtak.in
अमिताभ श्रीवास्तव/ संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 12 December 2017
पूरब की फिजा इंडिया टुडे कॉन्क्लेव

मंच था कोलकाता में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट का और यह बिल्कुल वाजिब ही था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी फितरत के मुताबिक साफ बयान देने के लिए इसी मंच को चुना. उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पश्चिम बंगाल में प्रदर्शित होगी. बनर्जी ने यह दिलेर वादा तब किया जब दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने धमकियां देने वालों को कमोबेश खामोश समर्थन ही दिया है. मुख्यमंत्री का रुख इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी की स्वागत भाषण में कही बातों से मेल खाता था, ''वे बहादुर बहन, ममतामयी मां, लौह महिला हैं और हमेशा फरिश्तों के साथ खड़ी दिखती हैं.''

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इतने ही निर्भीक और दिलेराना ढंग से केंद्र में भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार पर हमला बोला और उसे देश में 'सुपर इमरजेंसी' लगाने और डर का माहौल पैदा करने का दोषी ठहराया. साफ था कि दीदी (प्यार से ममता बनर्जी को यही पुकारा जाता है) को अपनी राष्ट्रीय हैसियत का एहसास है. और क्यों न हो, लोकसभा में उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 33 सदस्य हैं और यह तादाद उन्हें संसद के निचले सदन में चौथी सबसे बड़ी पार्टी का नेता बना देती है. 2011 से 2016 के बीच अपने जीडीपी में दोगुने से ज्यादा इजाफा करने वाले सूबे की अगुआई करने की शानदार साख का ही नतीजा था कि उनकी आवाज चैतरफा सुनी गई. यही नहीं, अपने नए विजन का खुलासा करने के लिए मुख्यमंत्री ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट में कूची उठाई और कैनवस पर गणेश की तस्वीर उकेर दी.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट एक अनूठा मौका था, जहां आठ पूर्वोत्तर राज्यों सहित 12 पूर्वी राज्यों के हक की बातें जोरदार ढंग से रखी गईं. देश की 27 फीसदी आबादी का घर पूरब का इलाका राष्ट्र के जीडीपी में 16.5 फीसदी का योगदान देता है. 2035 तक इसकी राष्ट्रीय जीडीपी में एक-चौथाई से ज्यादा की हिस्सेदारी होगी. इसमें सबसे बड़ी भूमिका पश्चिम बंगाल की होगी, जिसका फिलहाल इस इलाके के जीडीपी में 40 फीसदी का योगदान है. जैसा कि पुरी ने कहा, ''अगर पूरब को ऊपर उठना है, तो बंगाल को और भी तेजी से ऊपर उठना होगा. बंगाल आज जो कुछ करता है, उसी से वाकई हिंदुस्तान का कल तय होगा.''

पहले-पहल आयोजित दो दिनों के इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट में संगीत, फैशन, सिनेमा, खेल और उद्योग, हर चीज का बेहतरीन शुमार था. चाहे वह मशहूर वायलिन वादक सुनीता भुइयां, ओडिशी नृत्यांगना संचिता भट्टाचार्य और तबला वादक बिक्रम घोष की तिहरी जुगलबंदी हो या पुनराविष्कार के उस्ताद प्रसनजित चटर्जी का सौरभ गांगुली की नृत्यांगना पत्नी डोना की तारीफ  में अपनी सदाबहार कामयाब संगीत रचना चिरोदिनी तुमि जे आमार पेश करना हो.

24 और 25 नवंबर के दो दिन जोरदार प्रस्तुतियों और एक नए विजन के खुलासे के साथ इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट ने खूब सुर्खियां बटोरीं. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने अपने सूबे को माओवादी उग्रवाद से एक महीने के भीतर निजात दिलाने का वादा किया, तो असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुवाहाटी को न सर्फ पूर्वोत्तर बल्कि समूचे दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बनाने की बात कही. उन्होंने कहा, ''हम ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों पर दो औद्योगिक गलियारों के निर्माण का मंसूबा बना रहे हैं.'' उत्तर-पूर्वी सूबे असम के पहले भाजपा मुख्यमंत्री सोनोवाल ने यह भी बताया कि 'लुक ईस्ट' (यूपीए सरकार की प्रतिपादित नीति) और 'ऐक्ट ईस्ट' (नरेंद्र मोदी सरकार का वादा) में फर्क मंशा और प्रतिबद्धता का है.

जब विकास के तमाम सूचकांकों पर जद्दोजहद कर रहे राज्य बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी की बारी आई, तो उन्होंने बताया कि चीजें किस तरह बदल गई हैं और यह सूबा किस तरह सड़क और बिजली के क्षेत्रों में पूरे कायापलट होता देख रहा है. जीएसटी परिषद के सदस्य मोदी ने नए कर ढांचे का बचाव भी किया और इसे सबसे प्रगतिशील कर ढांचा करार दिया. कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर नई दूरदृष्टियों पर भी मंथन हुआ, खासकर तब जब यह मुद्दा 12 पूर्वी राज्यों के लिए बेहद अहम है जो अपनी 5,300 किमी लंबी सरहदें पड़ोसी देशों के साथ साझा करते हैं. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने, जो अरुणाचल प्रदेश से सांसद भी हैं, हिंदुस्तान के मुश्किल पड़ोसियों की तरफ दोस्ताना हाथ बढ़ाया और कहा, ''हिंदुस्तान और चीन के सह-अस्तित्व की काफी गुंजाइश है.'' उन्होंने यह भी कहा कि ''चीन से हमारे रिश्ते अच्छे हैं और सीमा समझौतों पर बातचीत चल रही है.''

कॉन्क्लेव में गर्मागर्म बहसें और जोरदार तर्क-वितर्क भी हुए. कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद सुष्मिता देव ने हिंदुस्तान में मौजूद 40,000 रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की तरफदारी में बोलकर तूफान बरपा दिया. उन्होंने कहा कि ''सरकार को मानवता के आधार पर उन्हें स्वीकार करना ही चाहिए.'' दूसरी तरफ  भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस दलील को खारिज किया और एक बार फिर दावा किया कि जांच एजेंसियों को शक है कि 2013 में बिहार के बोधगया में हुए आतंकी धमाके के पीछे गैर-कानूनी तरीके से रह रहे रोहिंग्या हो सकते हैं.

एक और सत्र में भी, इस बार अल्पसंख्यकों को लेकर, कांग्रेस और भाजपा सदस्य आपस में भिड़ गए. कालियाबोर (असम) के कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश में विकास का नहीं बल्कि भय का माहौल तारी है, वहीं केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने तुर्शी-ब-तुर्शी जवाब दिया कि यह कांग्रेस ही है जो अपनी भीषण चुनावी पराजयों की वजह से भयभीत है. नकवी ने कहा कि पिछले साल यूपीएससी के इम्तहान में 50 से ज्यादा मुसलमान कामयाब हुए हैं, जो आजादी के बाद रिकॉर्ड है. मंत्री महोदय ने अल्पसंख्यकों को ताकतवर बनाने के अपनी पार्टी के संकल्प की पैरोकारी करते हुए मोदी सरकार की उस नीति का भी हवाला दिया, जिसमें 45 बरस से ज्यादा उम्र की अकेली मुस्लिम औरतों को बिना मर्द के साथ के हज जाने की इजाजत दी गई है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट ने नेताओं को अपने अच्छे कामों को पेश करने का भी मौका दिया. पश्चिम बंगाल की महिला और बाल कल्याण और सामाजिक कल्याण मंत्री डॉ. शशि पांजा ने सरकार की कन्याश्री योजना का फायदा उठाने वाली छह महिलाओं से बातचीत कीरू इनमें तेजाब के हमले की शिकार 19 साल की एक लड़की भी थी जो अब फोटोकॉपी की दुकान चलाती है.

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने अचानक पाया कि पासा पलट चुका है जब लॉरेटो, सेंट जेवियर्स सरीखे कॉलेजों, जादवपुर यूनिवर्सिटी और नेशनल मेडिकल कॉलेज के चार होनहार युवा छात्र उनसे पूछताछ करने लगे कि संसद के भीतर आखिर क्या होता है. स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को यह समझाने में कड़ी मश्क्कत करनी पड़ी कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम—खासकर निदान, इलाज और बिल सरीखी चीजों पर—निगाह रखने के लिए जो स्वास्थ्य नियामक आयोग बनाया गया है, वह मरीजों के हक में और जनसमर्थक नीतियों के अनुरूप है.

यहां सिर्फ सियासत ही नहीं थी. कॉनक्लेव में अव्वल कारोबारी शख्सियतों की जुबानी नौकरियों और वृद्धि को लेकर अक्लमंदी की बातें भी सुनने को मिलीं. आर.पी. संजीव गोयनका ग्रुप के चेयरमैन संजीव गोयनका ने बताया कि कारोबार करने के तरीकों में बदलाव लाने की सरकार की कोशिशों से देश में ज्यादा अनुकूल माहौल बना है. व्यापार और उद्योग मामलों की प्रधानमंत्री की परिषद के सदस्य रह चुके गोयनका 3.1 अरब डॉलर के आर.पी. संजीव गोयनका समूह के मुखिया हैं, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है.

कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा, ''नियामक प्रक्रियाएं कम हो गई हैं, जीएसटी से देश के भीतर एक तरीके से सीमाएं टूट गई हैं. व्यापार के नजरिए से चीजें आसान होने लगी हैं. निवेश भी आने लगेगा. लेकिन जहां तक निवेश से रोजगार पैदा होने की बात है, तो मुझे लगता है कि आपको 12 से 24 महीने इंतजार करना होगा.'' वृद्धि और रोजगार के लिहाज से गोयनका के लफ्ज भविष्यवाणी सरीखें हैं, खासकर जब उनके समूह ने पिछले सात साल में पश्चिम बंगाल में 20,000 करोड़ रु. का निवेश किया है.

आइटीसी के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर संजीव पुरी ने भी कहा कि 'अनुकूल माहौल' केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर है. पुरी ने यह भी कहा कि ज्यादा सरकारें अब जमीन के अधिग्रहण में शामिल हुई हैं क्योंकि उन्होंने बड़ी कारोबारी योजनाओं की अहमियत समझ ली है. उन्होंने कहा कि कई सरकारें उद्योग के लिए लैंड पूलिंग का विचार लेकर आई हैं, जो आइटीसी के लिए कारगर साबित हुआ है, जिसका सालाना टर्नओवर 8.31 अरब डॉलर और बाजार पूंजीकरण 45 अरब डॉलर है.

रियल एस्टेट, आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय अंबुजा नेवतिया ग्रुप के चेयरमैन हर्षवर्धन नेवतिया ने बताया कि किस तरह हिंदुस्तान के पश्चिम के लोग लक्ष्मी (धन-संपदा) की, दक्षिण के लोग सरस्वती (विद्या) की और पूरब के लोग दुर्गा (प्रतिभा, ऊर्जा) की पूजा करते हैं. वहीं, श्रेई इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (एसआइएफएल) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हेमंत कनोरिया ने कहा कि कोलकाता को उत्तर-पूर्वी बाजार का मुख्यालय बना देना चाहिए. सेंको गोल्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शुभांकर सेन ने कहा कि पूरब को अपनी कृषि की क्षमता को बढ़ाना चाहिए.

एक और विचारोत्तेजक सत्र में जानी-मानी मॉलीक्यूलर पैरासाइटोलॉजिस्ट और प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर अनुराधा लोहिया ने ''औसतपने के महासागर में उत्कृष्टता के द्वीपों'' के लिए कम मेहनताने को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ''यह समाज से आता है. किसी भी वैज्ञानिक को उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता... यहां वैज्ञानिकों से गरीब होने की उम्मीद की जाती है जो धन के बारे में नहीं सोच सकते.''

मंच साझा कर रहे कोलकाता स्थित बिरला प्लेनेटेरियम के डायरेक्टर डी.पी. पुरी और साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स के सीनियर प्रो. सुकल्याण चट्टोपाध्याय ने वैज्ञानिक अनुसंधान की परेशानियों को सामने रखा और इन परेशानियों की वजह एक हद तक 'विज्ञान विरोधी आंदोलन' के बढऩे को बताया. हालांकि न्यूक्लियर फिजीसिस्ट जितेंद्र नाथ गोस्वामी (फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी, अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर) ने इस धारणा को नकार दिया कि हिंदुस्तानी विज्ञान और टेक्नोलॉजी में नए विचारों और प्रयोगों के लिए काम नहीं कर रहे हैं.

खेलों को लेकर भी कुछ हलचल हुई जब सौरभ गांगुली अपनी पत्नी डोना के साथ आए, जो आम तौर पर कम ही होता है. पूर्व क्रिकेट कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ  बंगाल (सीएबी) के मौजूदा अध्यक्ष ने वह बात याद की जो एक बार इमरान खान ने उनसे कही थीरू ''अगर आप ऊंचे उड़ रहे हैं और आपको काले बादल दिखाई दें, तो आपको और ऊंचा उडऩे का तरीका खोजना ही होगा.''

उस वक्त श्रोताओं में जबरदस्त ठहाके फूट पड़े जब सौरभ अपनी शादी की सालगिरह की तारीख ही भूल गए, नई फिल्म हिचकी के साथ जल्दी ही बड़े परदे पर वापसी करने जा रही रानी मुखर्जी ने भाई-भतीजावाद के आरोपों की पृष्ठभूमि में सिनेमा में काबिलियत का राज होने की बात कही. रानी ने कहा, ''फिल्म इंडस्ट्री में आप जहां पहुंचते हैं, वहां अपनी प्रतिभा और काबिलियत के दम पर पहुंचते हैं.'' उन्होंने यह भी कहा कि ''लोकप्रिय ऐक्टर या डायरेक्टर का भाई, बहन या बेटी होने के बावजूद आपको स्वीकार नहीं किया जा सकता है.''

उस वक्त खान-पान की बात भी हुई जब त्रिपुरा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने नागरिकों की रसोई में घुसने की सरकार की कोशिश पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा, ''वे हमें यह नहीं बता सकते कि हम यह न परोसें, वे हमें केवल यह बता सकते हैं कि जानवरों को मारते वक्त रहमदिल हों.''

मिठाई के बगैर कॉन्क्लेव भला कैसे पूरा होता. लिहाजा, सबसे मीठी चीज आखिर में परोसी गई, जब फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने फैशन और स्टाइल के बारे में विचार जाहिर किए. उन्होंने कहा कि जहां फैशन हमेशा बदलता रहता है, वहीं स्टाइल हमेशा जस की तस रहती है. इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी के संचालन वाले इस सत्र में कोलकाता के फैशन डिजाइनर ने कहा, ''इंटरनेट ने लोगों के भीतर एक जानवर को जगा दिया है जहां एक बटन दबाकर हमेशा सृजनात्मकता की मांग होती है. हम एक शख्स से हर रोज नया बनने की उम्मीद करते हैं. यह बालसुलभ बर्ताव है.''

शिलांग चैंबर क्वायर का नवोन्मेषी वैश्विक संगीत और उसके करिश्माई संस्थापक नील नॉग्कीनरिह का क्विज मास्टर सिद्धार्थ बसु का लिया दुर्लभ खरा और सच्चा इंटरव्यू, नेताजी सुभाष बोस के वंशजों के बीच उनकी विरासत को लेकर बहस और नेहरूवादी वैज्ञानिक मिज़ाज पर कुछ बेहतरीन आला दिमागों की बातों के साथ यहां दिल, दिमाग और रूह सभी के लिए बहुत कुछ था.

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