एडवांस्ड सर्च

हिमाचल प्रदेशः खेमेबाजी से खटास

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सांसद बेटे अनुराग ठाकुर को लोकसभा मुख्य सचेतक बनाने का मकसद चुनाव से पहले धूमल परिवार को सम्मान देना था. राज्यसभा सांसद जे.पी. नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के केंद्र में बढ़ते रुतबे से धूमल परिवार की भूमिका गौण हो गई थी.

Advertisement
aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर हिमाचल, 15 August 2018
हिमाचल प्रदेशः खेमेबाजी से खटास आत्मविश्वास मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर राज्य के ग्रामीण इलाके में

हिमाचल प्रदेश में परिवारवाद से इतर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता और सरकार की कार्यप्रणाली में अब तक हनक नहीं आ पाई है. दरअसल, पहले से ही ध्रुवों में बंटी भाजपा में असंतोष जारी है. स्थापित नेता बदली व्यवस्था में सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं और सत्तासीन युवा पीढ़ी रूठों को मनाने के चक्कर में खुलकर फैसले नहीं ले पा रही है. कुर्सी चाहने वालों की कतार लंबी है और ताजपोशी में हो रही खींचतान तथा बढ़ते असंतोष से कांग्रेसी कुनबा खुश हो रहा है.

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सांसद बेटे अनुराग ठाकुर को लोकसभा मुख्य सचेतक बनाने का मकसद ही यही था कि चुनाव से पहले धूमल परिवार को सम्मान दिया जाए. राज्यसभा सांसद जे.पी. नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के केंद्र में बढ़ते रुतबे से धूमल परिवार की भूमिका गौण हो गई थी.

इसी के साथ धूमल समर्थकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें अध्यक्ष पद देने की मांग छेड़ी है. लेकिन आधिकारिक तौर पर पार्टी के नेता इससे इनकार करते हैं. दो दिनों के दौरे पर राज्य आए भाजपा के प्रदेश प्रभारी मंगल पांडे कहते हैं, ''जब सरकार बनती है तो कई तरह की अपेक्षाएं भी होती हैं. परिवार में कभी विचारों में भेद हो जाता है. पर बातचीत से सबका समाधान निकल आता है. हिमाचल में पार्टी के लोग एकदम एक साथ हैं.''

बोर्डों-निगमों में अभी तक कोई भी ताजपोशी नहीं होने की वजह भी यही है कि नियुक्तियों पर एक राय नहीं बन पा रही. इसीलिए केंद्रीय मंत्री नड्डा, पार्टी अध्यक्ष सतपाल सत्ती और पूर्व मुख्यमंत्री  प्रेम कुमार धूमल के प्रस्तावित नामों को मुख्यमंत्री ने हाइकमान को सौंप दिया है.

बात केवल इतनी ही नहीं है कि ताजपोशी में पार्टी के किन नामों को हरी झंडी मिले, बल्कि दिलचस्प बात यह कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी ताल नहीं ठोक पा रहे हैं. नड्डा का प्रभाव, सांसद शांता कुमार तथा अनुराग ठाकुर के संपर्क और फिर धूमल का असर, ये कुछ ऐसी बातें हैं जिनसे जयराम खुलकर काम नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि उनका कहना है, ''अभी तो मात्र 6 महीने हुए हैं. हमारा फोकस विकास पर है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन और स्नेह मुझे मिल रहा है. मैं दिन-रात मेहनत करके उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरूंगा.''

हालांकि सरकारी कामकाज को विकास की दिशा में ले जाने की जद्दोजहद जारी है. मुख्यमंत्री के जनमंच, टारगेट रिव्यू, पर्यटन, वन विकास और क्वॉलिटी कंट्रोल जैसे फैसलों की लोग तारीफ कर रहे हैं.

लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर राज्य में कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा के पास कोई बड़ा मुद्दा हाथ नहीं लगा है. हैरानी कि विपक्ष और सरकार का दोस्ताना माहौल भी लगातार बना हुआ है. क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद को सीबीआइ और ईडी की मार से बचाना चाहते हैं, ऐसे में सुस्त पड़ी कांग्रेस इकाई भाजपा सरकार पर कुछ बोल नहीं पा रही.

उधर, प्रेम कुमार धूमल की चिंता की एक और भी वजह है. दरअसल, वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के मामले  में जो केस बनाए थे, उन्हें जयराम सरकार तकनीकी पेच के कारण सत्ता में आने के बावजूद वापस नहीं ले पाई है. दूसरी ओर, नड्डा खुद को हिमाचल में स्थापित करना चाहते हैं.

इन्हीं वजहों से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं. सरकार चलाने और सभी के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिश में कुछ मंत्रियों के 'खराब' प्रदर्शन पर भी वे कुछ बोल नहीं पा रहे हैं. अगले लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 4 सीटों पर जीत हासिल करने की जिम्मेदारी पार्टी इकाई की बजाए इस बार मुख्यमंत्री पर होगी. लेकिन खेमो में बंटी भाजपा को एकजुट करना आसान काम नहीं होगा.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay