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फुरसत-मजाक बिल्कुल नहीं

स्टेज से परे खासे गंभीर स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को निजी तौर पर अपनी कला की संभावनाओं और सीमाओं का पूरा एहसास है

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर मुबंई, 11 April 2019
फुरसत-मजाक बिल्कुल नहीं दानेश जस्सावाला

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने दो हफ्ते पहले अंबानी परिवार का खासा मखौल उड़ाते हुए 12 मिनट की एक क्लिप अपलोड की. इसमें वे ''वाह, मोदीजी, वाह्य' टी-शर्ट पहने मंच पर नमूदार होते हैं और सवाल दागते हैं, ''मोदीजी मेरे और अंबानी के बीच क्यों आ रहे हैं? मैं अंबानी को सीधे वोट क्यों नहीं दे सकता?" इस वीडियो को अब तक 61 लाख व्यू मिल चुके हैं. मुंबई में अपने घर पर कामरा कहते हैं, ''वह हिस्सा वाकई बुनियादी था और बेसिक चीजें कामयाब होती हैं. यह बुनियादी बात है. चुनाव सिर पर हैं. हर कोई इसी की चर्चा कर रहा है, इसलिए वे इससे जुड़ सकते हैं."

तीस बरस के कामरा पहले विज्ञापन की दुनिया के पेशेवर थे, अब पूरी तरह कॉमेडी करते हैं. उन्हें सियासी दुनिया से अपनी पंचलाइने निकालने के लिए जाना जाता है. उनकी ट्विटर टाइमलाइन भाजपा और कांग्रेस की लानत-मलामत करने का मंच है. अपने पोडकास्ट शट अप या कुणाल पर वे नेताओं वगैरह की मेजबानी करते हैं.

मंच से परे निजी जिंदगी में कामरा संजीदा और खुद के बारे में सोच-विचार करने वाले इनसान हैं. कॉमेडी की आड़ में की गई अपनी सियासी टिप्पणियों के असर को लेकर उन्हें अंदेशा रहता है. ''मैं नहीं समझता कि अभी तक मेरा कोई भी काम कामयाब रहा है." भले ही यूट्यूब पर उनके 8,40,000 सब्सक्राइबर हों और उनकी उलटबांसियां लगातार स्ट्रीम हो रही हों. वे यह भी कहते हैं, ''खास सुविधासंपन्न शहरी आदमी होने के नाते भारतीय राजनीति पर मेरा राय देना उसी तरह है जैसे शशि थरूर का अपने हिंदू होने पर किताब लिखना." अपने काम को लेकर उन्हें कोई गलतफहमी नहीः ''मैं नहीं समझता कि दर्शक कला से कभी इस तरीके से प्रभावित होंगे. मैं आरक्षण समर्थक लतीफा बना सकता हूऌं और वे खुलकर हसेंगे. फिर मेरे बाद आने वाला कॉमेडियन आरक्षण के खिलाफ लतीफा सुनाएगा और उस पर भी वे हंसेंगे. वे वहां बस लतीफे की खातिर हैं."

उनकी सबसे तीखी छींटाकशी जहां भाजपा के हिस्से में आती है, वही कामरा ने कांग्रेस से दूरी बनाने की जबरदस्त कोशिशें की हैं. इस ग्रैंड ओल्ड पार्टी को वे 'मध्यमार्गी', ''रीढ़हीन", 'अप्रासंगिक' और 'लतीफों के लिए बहुत ज्यादा इस्तेमाल की जा चुकी' कहकर खारिज कर देते हैं. ''मैंने जो भी कलाकृतियां रची हैं, उनमें से किसी की भी मंशा यह नहीं है कि कांग्रेस को वोट दो. अगर आपको लगता है कि कांग्रेस कोई समाधान है, तो आपको यह कंटेंट अपने गले नहीं उतारना चाहिए."

हिंदुस्तान के सियासी सर्कस की बदौलत लतीफों के लिए कच्चा माल इफरात में मौजूद है, मगर कामरा फौरी और सामयिक चीजों पर बहुत ज्यादा भरोसा करने को लेकर एहतियात बरतते हैं. वे कहते हैं, ''मैं भरसक कोशिश करता हूं कि मेरे हाथों रचा गया हंसी-मजाक वक्त की कसौटी पर खरा उतरे. मैं अपने लतीफों को लंबी उम्र देना चाहता हूं." नोटबंदी, अंबानी परिवार और भाजपा के संबित पात्रा को वे शाश्वत और कालातीत होने का श्रेय देते हैं, श्श्पात्र टीवी पर जो बकवास करते हैं, वह लंबे वक्त तक हमारे साथ रहेगी. यह कहीं जाने वाली नहीं है, इसमें इजाफा ही हो रहा है."

सच है. नोटबंदी पर उनका काम पैट्रियोटिज्म ऐंड गवर्नमेंट अब भी मौजूं और मजेदार मालूम देता है. यह उस गौरवशाली देशभक्त पर चुटीला तंज कसता है जो अपने किसी भी, छोटे या बड़े, आलोचक के साथ मुकाबले में पनाह लेता है और उसे याद दिलाता है कि हमारी सरहदों पर जवान मारे जा रहे हैं. वे हां में हां मिलाते हैं, ''इसको अच्छी उम्र मिली. वैसे मैं उम्मीद करता हूं कि और न बढ़े. पर लगता नहीं, अति-राष्ट्रवाद कहीं जाने वाला है."

शट अप या कुणाल में, जहां उन्होंने कई दूसरों के अलावा आप की नेता आतिशी, न्यूज एंकर रवीश कुमार, छात्र नेता कन्हैया कुमार और शेहला राशिद की मेजबानी की है, कामरा इंटरव्यू को बीच में काटकर संदर्भ या कॉमिक इफेक्ट डाल देते हैं. ये एपिसोड हर मिनट एक पंचलाइन वाली चुहल के बजाय आरामतलब बातचीत के साथ बनाए गए हैं. वे कहते हैं, ''शट अप या कुणाल का शुरुआती इरादा बेशक दिल बहलाऊ होना था. हम पुरानी स्टाइल में खबरें देखकर ऊब गए थे, इसलिए सोचा कि नई सहस्त्राब्दि में पैदा हुए नौजवानों तक कुछ ऐसा लेकर कैसे पहुंचें जिसमें उनकी दिलचस्पी हो और जो उन्हें राय बनाने में मदद करे?"

इस बीच, इस साल के उनके लक्ष्यों में बहुत सोच-समझकर लिया गया यह फैसला भी शामिल है कि वे आम तौर पर हिंदुस्तानी फिल्में, संगीत और कथ्य से ही दोचार होंगे. हालांकि वे अपने जिस लिविंग रूम में बैठे हैं, उसमें द बिग लेबोव्स्की, फाइट क्लब और अमेरिकी पॉपुलर कल्चर की दूसरी सबसे उम्दा चीजों के पोस्टर लगे हैं. फिर भी वे कहते हैं, ''कई बार हम सोचते हैं कि हिंदुस्तान से बाहर लोग बेहतर रच रहे हैं.

हम सबका इससे साबका पड़ता है जिसमें हम सोचते हैं कि पश्चिमी चीजें बेहतर हैं. कूड़ा-कर्कट लिए अपना वीडियो अपलोड करने वाला विदेशी कॉमेडियन सब कुछ के बाद भी मेरी किसी भी बात से कहीं ज्यादा मजेदार होगा."

कामरा की लोकप्रियता का बेशक यह मतलब तो है ही कि उन्हें राष्ट्र-विरोधी, हिंदू-विरोधी और अर्बन नक्सल कहा गया है. मगर वे दूसरी तरफ से आने वाले तीरों के भी आदी हैं. ''ऐसे भी कॉमेडियन हैं जो सोचते हैं, मैं ज्यादा रेडिकल नहीं हूं. लोग यह कहकर मेरी आलोचना करते हैं कि मैं सेफ जोन में हूं, यह नितांत बकवास है. उदारवादी लोग ऐसी किसी भी, थोड़ी-सी तीखी, बकवास पर हसेंगे जिसमें सत्ता प्रतिष्ठान की आलोचना हो?"

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