एडवांस्ड सर्च

आदिवासियों के भरोसे

वे एकमात्र कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने मिलने के लिए वक्त दिया था. बघेल को न केवल नया पीसीसी प्रमुख मिला है, बल्कि उन्होंने एक अन्य आदिवासी विधायक अमरजीत भगत की नियुक्ति के साथ अपनी कैबिनेट में रिक्त एक पद को भरा है.

Advertisement
राहुल नरोन्हानई दिल्ली, 16 July 2019
आदिवासियों के भरोसे बहुत कुछ करना है बस्तर में खलेमुर्वेंद गांव के स्कूल का दौरा करते मोहन मरकाम

लोकसभा चुनावों में मात खाने और फिर राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद से कांग्रेस अनिर्णय की शिकार दिख रही थी. ऐसे में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में अपना नया प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष नियुक्त करके पार्टी को मजबूती देने की कोशिश की है. 28 जून को आदिवासी विधायक मोहन मरकाम ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के स्थान पर अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला. बघेल अक्तूबर 2014 से इस पद पर थे. (संयोग से, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस नियुक्ति पर मुहर लगाई, हालांकि उन्होंने कहा था कि वे इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए अब पार्टी का कोई भी निर्णय उनके उत्तराधिकारी करेंगे.)

राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) ने लोकसभा चुनाव के बाद कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन छत्तीसगढ़ इसका अपवाद है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी पीसीसी अध्यक्ष की नियुक्तियां होनी हैं. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ वर्तमान में राज्य इकाई के अध्यक्ष भी हैं और राजस्थान में उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट प्रदेश अध्यक्ष पद भी संभाल रहे हैं.

तो, फिर अकेले बघेल ऐसा कैसे करा सके? वे एकमात्र कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने मिलने के लिए वक्त दिया था. बघेल को न केवल नया पीसीसी प्रमुख मिला है, बल्कि उन्होंने एक अन्य आदिवासी विधायक अमरजीत भगत की नियुक्ति के साथ अपनी कैबिनेट में रिक्त एक पद को भरा है. भाजपा ने बस्तर क्षेत्र के विक्रम उसेंडी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक आदिवासी नेता पर दांव खेला था, जिसे देखते हुए कांग्रेस किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति को यह पद देने का जोखिम नहीं उठा सकती थी. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सफलता में आदिवासियों (34 फीसदी वोट) के समर्थन की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी.

कांग्रेस को भगत (जो राज्य के उत्तरी क्षेत्र से हैं) या मरकाम, जो राज्य के दक्षिणी भाग से हैं, में से किसी को चुनना था. आखिरकार मरकाम को चुना गया क्योंकि संगठनात्मक कार्यों में उनकी गहरी रुचि थी. उन्हें तरजीह इसलिए भी मिली क्योंकि कांग्रेस ने दक्षिण की आदिवासी बहुल बस्तर लोकसभा सीट जीती थी. पार्टी के एक अन्य कद्दावर नेता टी.एस. सिंहदेव जिन्हें भगत का विरोधी माना जाता है, का समर्थन भी मरकाम को मिला जिससे उनकी नियुक्ति आसान हो गई.

भगत सरगुजा जिले के सीतापुर निर्वाचन क्षेत्र (जिसे सिंहदेव का गढ़ माना जाता है) का प्रतिनिधित्व करते हैं. अपना वर्चस्व जताने के लिए, बघेल ने भगत को अपनी कैबिनेट में मंत्रीपद दे दिया जो सिंहदेव कतई नहीं चाहते थे. इसके साथ ही, भगत चार बार के विधायक हैं और उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है जिसको लेकर राजनैतिक पर्यवेक्षकों का मत है कि ऐसा अंबिकापुर मंडल में सिंहदेव के सामने एक वैकल्पिक पावर सेंटर तैयार करने के मकसद से किया गया है.

सूत्रों का कहना है कि राहुल ऌगांधी के लिए छत्तीसगढ़ पर फैसला लेना आसान था क्योंकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की तुलना में यहां कम जटिलताएं हैं. मध्य प्रदेश में नए पीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही है, लेकिन प्रदेश के दो दिग्गज नेताओं, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया को किसी एक नाम के लिए राजी करना थोड़ा टेढ़ा काम है.

छत्तीसगढ़ में मरकाम को अध्यक्ष पद पर आसीन कराने में राज्य के प्रभारी महासचिव पी.एल. पुनिया ने भी भूमिका निभाई है. मरकाम बस्तर की कोंडागांव सीट से दो बार के विधायक हैं. उनकी पहली चुनौती दंतेवाड़ा और चित्रकूट में होने वाले विधानसभा उप-चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित कराने की होगी. उसके बाद नगर निकाय चुनावों की बारी आएगी. मरकाम को कमान देने से यहां पार्टी को फायदा मिलने की उक्वमीद जताई जा रही है.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay