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नायडू को झटका

चार सांसदों के पाला बदलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने टीडीपी और राज्य कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया. राव का कहना था, ''अगले छह महीनों में राज्य के राजनैतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव होने वाला है.

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aajtak.in
अमरनाथ के. मेनन नई दिल्ली, 04 July 2019
नायडू को झटका दलबदल-टीडीपी छोड़ चुके सांसद भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के साथ (बाएं से दूसरे)

अब तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू के लिए इससे बदतर और कुछ नहीं हो सकता था. वे यूरोप में छुट्टियां बिताने के लिए अभी ब्रसल्स गए ही थे कि राज्यसभा में पार्टी के चार सांसद, जिनमें उनके विश्वासपात्र वाइ.एस. चौधरी और सी.एम. रमेश भी शामिल थे, भाजपा का दामन थामने के लिए उनका साथ छोड़ गए. अब राज्यसभा में उनकी पार्टी के केवल दो सांसद ही रह गए हैं. पार्टी का साथ छोडऩे में चौधरी और रमेश के अलावा गरिकापति मोहन राव और टी.जी. वेंकटेश भी शामिल हैं.

सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्ति वाले इन सभी कारोबारी सांसदों ने 20 जून को राज्यसभा के अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू से मुलाकात की और एक पत्र देकर मांग की कि टीडीपी संसदीय पार्टी का विलय भाजपा में कर दिया जाए. ये सांसद दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई सदस्यों की संक्चया की शर्त पूरी कर रहे थे. इसलिए 245 सदस्यों वाले सदन में 71 सांसदों वाली भाजपा ने अपनी संक्चया बढ़ाने के लिए बाहें फैलाकर उनका स्वागत किया. घाव पर नमक छिड़कते हुए इन सांसदों ने यह भी अफवाह फैला दी कि यह सब नायडू के इशारे पर हो रहा है.

लेकिन टीडीपी में इस अफवाह से कोई भगदड़ नहीं मची. लोकसभा में तीन सांसद, 23 विधायक और दूसरे सक्रिय कार्यकर्ता नायडू के साथ खड़े हैं. टीडीपी संसदीय पार्टी के नेता गल्ला जयदेव कहते हैं, ''यह सब उनके (नायडू) कहने पर किया जा रहा है, बिल्कुल गलत है.'' राज्यसभा में पार्टी नेता चौधरी और उपनेता रमेश राजनीति में अपने उत्थान का श्रेय नायडू को देते हैं. उन्हें टीडीपी के लिए पैसा जुटाने की योग्यता के कारण लाया गया था.

ये दोनों नेता प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग समेत राजस्व से जुड़ी एजेंसियों की जांच के घेरे में हैं. लोकसभा चुनावों से पहले इनकी कंपनियों पर छापे पड़े थे. एनडीए से टीडीपी के अलग होने से पहले चौधरी मोदी के पहले मंत्रिमंडल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्यमंत्री थे. नायडू ने टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए टीडीपी के वरिष्ठ नेताओं से कहा, ''यह विशुद्ध अवसरवादी राजनीति है. वे भाजपा के दबाव के आगे झुक गए हैं.'' उन्होंने नेताओं से कहा कि वे ''राजनैतिक हमले के खिलाफ मजबूती से खड़े रहें.'' नायडू को पूरी उम्मीद है कि 2024 में वे वापसी करेंगे. उनका मानना है कि आंध्र प्रदेश के अनुभवहीन नए मुख्यमंत्री और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस (वाइएसआरसी) अध्यक्ष वाइ.एस. जगमोहन रेड्डी शासन चलाने में असफल साबित होंगे.

चार सांसदों के पाला बदलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने टीडीपी और राज्य कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया. राव का कहना था, ''अगले छह महीनों में राज्य के राजनैतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव होने वाला है.'' इसके जवाब में जयदेव कहते हैं, ''भाजपा टीडीपी को कमतर आंक रही है. हाल के चुनावों में वाइएसआरसी के 49.95 प्रतिशत वोटों के मुकाबले टीडीपी को 39.2 प्रतिशत वोट मिले थे.‘‘राजनैतिक जानकार सी. नरसिंहा राव का मानना है कि पार्टी वापसी कर सकती है क्योंकि मध्य वर्ग और उच्च मध्य वर्ग में उसे अच्छा समर्थन हासिल है.’’

पार्टी छोड़कर गए सांसदों ने यह अफवाह भी फैला दी कि वे नायडू के इशारे पर यह सब कर रहे हैं.

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