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राज्यों की दशा-दिशा: अव्वल रहने वालों को सलाम

लगातार चार बार एक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके व्यक्ति के केंद्र में सत्तासीन होने के बाद पहले ‘‘इंडिया टुडे ग्रुप राज्यों की दशा-दिशा’’ कॉन्क्लेव में सही मायने में संघीय ढांचे को लेकर उम्मीदें जगीं.

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aajtak.in
कृतिका बनर्जीनई दिल्ली, 11 November 2014
राज्यों की दशा-दिशा: अव्वल रहने वालों को सलाम

अक्सर केंद्र सरकार पर राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार और हमारे लोकतंत्र के संघीय स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन अब तो एक राज्य का चार बार मुख्यमंत्री रह चुका और खुद को दिल्ली से बाहर का बताने वाला शख्स दिल्ली की सत्ता पर आसीन है. ऐसे में 31 अक्तूबर को इंडिया टुडे ग्रुप के ‘‘राज्यों की दशा-दिशा’’ कॉन्क्लेव 2014 में यह आम धारणा थी कि केंद्र और राज्यों के बीच तनाव अब अतीत की बात हो जाएंगे और नरेंद्र मोदी की सरकार देश की प्रगति में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाएगी.

कॉन्क्लेव में कई केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित गोवा और कांग्रेस शासित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पुरस्कार प्राप्त राज्यों के मंत्री और अफसरशाह पहुंचे. इंडिया टुडे ग्रुप के संपादकीय सलाहकार शेखर गुप्ता ने अपने उद्घाटन भाषण में राज्यों पर ही फोकस किया और कहा कि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी को भारी जीत इसलिए मिली क्योंकि उसने समझदारी दिखाते हुए उन राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया जहां लोकसभा की ज्यादा सीटें हैं. उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी ने इन राज्यों में ऐसे नेताओं का चयन किया जो राज्यों को मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़े.’’

सफलता की ओर राज्यउसी का नतीजा है कि कुछ समय पहले तक जो मुख्यमंत्री नेपथ्य में चले गए थे, अब सुर्खियों में छाने लगे हैं. राज्यों के नेतृत्व के बेहतर प्रदर्शन की जरूरत पर जोर देते हुए केंद्रीय विधि और न्याय, सूचना-प्रौद्योगिकी तथा संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘पहचान की राजनीति अब सुशासन की राजनीति की ओर बढ़ रही है.’’

इसकी सबसे अच्छी मिसाल गोवा है. मनोहर पर्रीकर के नेतृत्व में इस छोटे-से राज्य को ‘‘बेस्ट ओवरऑल स्मॉल स्टेट’’ का खिताब मिला. इसके अलावा उसे उपभोक्ता बाजार, शिक्षा, व्यापक अर्थव्यवस्था और निवेश की श्रेणियों में भी पुरस्कृत किया गया. वहीं, पिछले कुछेक महीनों से राजनैतिक तनाव से गुजर रहे तमिलनाडु को ‘‘बेस्ट ओवरऑल बिग स्टेट’’ के खिताब से नवाजा गया.

केंद्रीय शहरी विकास, आवास, शहरी गरीबी उन्मूलन और संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडु ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को बधाई दी और कहा कि जनता उन्हीं नेताओं के साथ खड़ी होगी जो अपने काम से ‘‘पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता’’ की मिसाल पेश करेंगेे.

अपने वक्तव्य के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार के दोनों मंत्रियों, रविशंकर प्रसाद और वेंकैया नायडु ने साफ-सुथरी राजनीति और सुशासन के महत्व पर जोर दिया. प्रसाद ने ‘‘केंद्र-राज्य संबंधः आमूल बदलाव’’ विषय पर भाषण दिया. उन्होंने कहा कि राज्यों को निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा बनाना केंद्र सरकार के हित में है.

लेकिन क्या केंद्र राज्यों के हित में पर्याप्त कदम उठा रहा है? यही विषय नायडु, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव सरकार में सूचना-प्रौद्योगिकी तथा पंचायती राज मंत्री के.टी. राव के बीच बहस का मुद्दा था. रावत ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि मोदी सरकार के योजना आयोग को खत्म करने के फैसले के बाद राज्यों के लिए अपनी समस्याएं जाहिर करने, अपनी बात रखने और केंद्र से दिशा-निर्देश हासिल करने के लिए कोई राष्ट्रीय मंच ही नहीं रह गया है. उन्होंने कहा, ‘‘राज्य’’ आखिर सरकार में किससे बात करें, इस बारे में स्पष्टता होनी चाहिए.’’ यह सवाल बेशक नायडु की ओर उछाला गया था. नायडु ने भी राज्यों के साथ तालमेल के लिए एक मंच की जरूरत को स्वीकार किया और रावत तथा राव को आश्वस्त किया कि ऐसी राष्ट्रीय संस्था बनाने पर राय-मशविरा काफी आगे बढ़ चुका है.

बहरहाल इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ने कुछ देर के लिए ही सही लेकिन केंद्र और राज्यों को एक मंच पर जरूर ला दिया.

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