एडवांस्ड सर्च

केले की उपज से हो रही मुनाफे की फसल

उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में केला अच्छी आमदनी वाली फसल के रूप में उभरा. किसान इससे लाखों की कमाई कर रहे हैं. केले पर प्रति एकड़ एक लाख रु. की लागत आती है और ढाई लाख रु. तक शुद्घ मुनाफा होता है.

Advertisement
aajtak.in
हरिशंकर साहीलखनऊ, 23 September 2012
केले की उपज से हो रही मुनाफे की फसल

आम तौर पर हमारे देश में खेती को ऐसा पेशा माना जाता है, जहां कठोर परिश्रम के बाद भी गरीबी में जिंदगी ढोनी पड़ती है. लेकिन कुछ लोगों ने केले की खेती से खासा धन कमाकर इस मिथक को तोड़ा है. मूल रूप से तटीय इलाकों का पौधा होने के बावजूद केला उत्तर प्रदेश के तराई जिलों बहराइच, श्रावस्ती, बाराबंकी, बलरामपुर, लखीमपुर आदि में कई किसानों को समृद्धि व प्रतिष्ठा दिला रहा है. इन जिलों के कई किसानों ने टिश्यू कल्चर केले की खेती को अपनाकर एक नए कृषि व्यवसायीकरण की परंपरा की शुरुआत की है.

केले की खेती के सहारे प्रदेश में नायक बनकर उभरे एक किसान हैं बाराबंकी के दौलतपुर ग्राम के राम सरन वर्मा. उन्होंने अपने खेत का नाम ‘हाइ टेक कृषि फार्म’ रखा है. वर्मा कहते हैं, “कुछ पहले दूसरों के खेत में काम करता था. 1990 में 2 एकड़ खेत में 1,200 देसी केले के पौधों के साथ मैंने इस खेती में कदम रखा था और आज हम 90 एकड़ जमीन पर केले की खेती करते हैं.” वे बताते हैं कि केले की खेती पर प्रति एकड़ एक लाख रुपए तक की लागत आती है और ढाई लाख रुपए तक शुद्घ मुनाफा होता है.

वर्मा का यह फार्म और उनकी खेती की तकनीक कितनी प्रसिद्ध है, इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रदेश के राज्यपाल बी.एल. जोशी ने वर्मा की कृषि तकनीक को देखने के लिए उनके फार्म का निरीक्षण किया था. टिश्यू कल्चर एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें केले के पौधे को बायो लैब में तैयार किया जाता है और फिर खेत में रोपा जाता है. टिश्यू कल्चर से तैयार केले के पौधे वायरस और अन्य रोगों से मुक्त होते हैं. केले की फसल का समय 15 माह का होता है, जिसमें प्रति वर्ष जुलाई माह में नए पौधे लगाए जाते हैं और अगले वर्ष अक्तूबर के आसपास फलों के गुच्छे तैयार हो जाते हैं.

वहीं, 1972 में लखनऊ विवि से बायोकेमेस्ट्री में एमएससी करने वाले बहराइच के कृषि व्यवसायी जय सिंह ने कृषि को व्यवसाय में बदल दिया है. वे कहते हैं, “मैंने केले की खेती की शुरुआत 1981 में देसी केले के पौधे के साथ की. टिश्यू कल्चर की शुरुआत 1995 में हुई.” जय सिंह तकरीबन 50 एकड़ जमीन में केले की खेती करते हैं और प्रति एकड़ ढाई लाख रु. तक का शुद्घ मुनाफा कमा रहे हैं. बेरोजगारों में भी इस खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है.

बाराबंकी के ही अनिल कुमार वर्मा ने लखनऊ विवि से स्नातक करने के बाद अपने परिवार की दो एकड़ जमीन पर कर्ज लेकर केले की खेती की शुरुआत की और अब तक अपनी दो एकड़ जमीन को सात एकड़ में फैला चुके हैं. वहीं, अनिल की ही तरह बहराइच के किसान अजीम मिर्जा की भी किस्मत केले की खेती से बदल गई. केले की खेती से मिले लाभ के बारे में बताते हुए मिर्जा कहते हैं, “सिर्फ केले की खेती से आज मैंने पांच एकड़ जमीन और लखनऊ में करीब 11 लाख रु. का एक प्लॉट खरीद लिया है.”

केले की खेती अब कई लोगों के लिए रोजगार का हिस्सा बन चुकी है. जय सिंह और राम सरन वर्मा जैसे लोग नए किसानों के गुरु हैं. यूनिवर्सिटी से डिग्री लिए हुए बहुत से लोग अब खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं. सिंह कहते हैं कि लोग हर वर्ष और हर महीने कृषि की तकनीक सीखने और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां लेने के लिए आते रहते हैं. हर महीने तकरीबन 200 लोग उनके पास खेती के गुर सीखने के उद्देश्य से आते हैं. वहीं वर्मा बताते हैं कि उन्होंने अब तक करीब 10,000 से अधिक किसानों को इस खेती के गुर सिखाए हैं.

एक ओर जहां केले की खेती को लेकर किसानों में उत्साह बढ़ रहा है, वहीं कई नामी-गिरामी कंपनियां भी टिश्यू कल्चर के पौधों को बेचने के लिए बाजार में उतर रही हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay