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आयुर्वेद-रसोई में ही कारगर दवाएं

भारतीय घरों की रसोई में पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल होने वाले मसाले और अन्य चीजें विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज में भी बहुत असरदार साबित होती हैं

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 28 March 2019
आयुर्वेद-रसोई में ही कारगर दवाएं शटरस्टॉक

भारतीय रसोई विश्व की सबसे बेहतरीन रसोईयों में से एक है. इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थ और मसाले अद्भुत औषधियां हैं. ये मसाले आयुर्वेद के कई योगों (फॉर्मूलों) में प्रयुक्त होते हैं—जैसे कालीमिर्च, तेजपत्ता, इलायची, अदरक, लहसुन, दालचीनी आदि. इनमें से कई मसालों का औषधीय महत्व हमारे बुजुर्गों और पूर्वजों को पता था और उन्होंने इन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे को बताया, पर आजकल हम इन द्रव्यों के महान गुणों और उपयोगों को भूलते जा रहे हैं. मैं आपको रसोई की इन्हीं दवाओं से रू-ब-रू कराऊंगा. आप जानेंगे कि आपकी रसोई में ही कितने सारे रोगों की चमत्कारिक दवाएं उपलब्ध हैं जिनके लिए आप महंगी और दुष्प्रभावों से युक्त दवाइयां खाते रहते हैं—

1.रसोई में मौजूद दर्द निवारक:

हम हफ्ते या महीने में छोटे-मोटे दर्द से दो चार होते ही हैं. पेटदर्द, सिरदर्द, पैरों का दर्द, कान का दर्द, कई तरह के दर्द हमें या हमारे घर के सदस्यों को होते रहते हैं. दर्द कम या ज्यादा हो सकता है. दर्द शुरू होते ही कुछ लोग पेनकिलर गटकना शुरू कर देते हैं जिससे वे दर्द से मुक्त तो हो जाते हैं लेकिन अपने लिवर और किडनी को कष्ट पहुंचाकर. हमारी रसोई में ऐसी कई अद्भुत चीजें हैं जो हमारे दर्द को खत्म कर सकती हैं, वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के. इनसे हम दर्द से मुक्त भी हो जाएंगे और हमारे लिवर-किडनी जैसे अमूल्य अंगों को भी कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा.

आयुर्वेद के अनुसार अजवायन एक वातानुलोमक (गैस को निकालने वाली) औषधि है. इसलिए पेट के दर्द में यह बेहद उपयोगी है.

आधा चम्मच अजवायन को गर्म पानी के साथ लेने से गैस के कारण हो रहे पेटदर्द में तुरंत आराम मिलता है.

अदरक भी वातशामक है (दर्द उत्पन्न करने वाले वात को बैलेंस करता है) इसलिए यह भी एक दर्द निवारक दवा है.

सर्दी के कारण होने वाले सिरदर्द में सूखे अदरक (या सौंठ) को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं.

इससे थोड़ी देर में सिरदर्द दूर करने में मदद मिलेगी.

लौंग का प्रयोग विशेषकर दांतों के दर्द में होता है. भुनी हुई लौंग का पेस्ट लगाकर या फिर लौंग के तेल का फाहा दर्द वाले दांत पर रखकर दांतों का दर्द दूर कर सकते हैं.

पेट में दर्द होने पर एक कप पानी में एक चुटकी खाने वाला (मीठा) सोडा डालकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है.

हल्दी में दर्द निवारक तत्व होते हैं. ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं. घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है. चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है. हल्दी को चूने के साथ मिलाकर लगाने से चोट के दर्द में तुरंत आराम मिलता है.

एक चम्मच मेथीदाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांकने से पेटदर्द में आराम मिलता है. मेथी के लड्डू भी जोड़ों के दर्द में खाए जाते हैं.

कान दर्द में प्याज अच्छी दवाई है. इसका रस निकालिये और रूई की मदद से कान में दो या तीन बूंद डालिये. दर्द ठीक हो जाएगा.

लहसुन में ऐंटी इन्लेमेट्री तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.

इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में फ्लेवेनॉइड्स भी पाए जाते हैं. शारीरिक दर्द में मालिश के लिए लहसुन का तेल सबसे बढिय़ा विकल्प है.

सीने में दर्द या भारीपन होने पर रोजाना दो भुनी हुई लहसुन की कलियों को खाने से लाभ होता है.

2. गर्मी से बचाव करने वाली चीजें:

गर्मी से बचाव के लिए रसोई के मटके में भरे शीतल जल से अच्छा उपाय और कुछ भी नहीं है.

गर्मियों में आप जितना हो सके, उतना पानी पियें. धूप में निकलने से पहले एक या दो गिलास पानी पीकर ही निकलें. इससे आप लू लगने और डिहाइड्रेशन से बचे रहेंगे.

जो लोग नियमित रूप से प्याज का सेवन करते हैं, उन्हें लू नहीं लगती. लू लग जाए तो एक चम्मच प्याज का रस पियें और तलवों पर रस से मालिश करें. यह गर्मी या लू से हुए बुखार का बेहतर इलाज है.

गर्मियों में अक्सर होने वाली पेशाब की जलन में हरी इलायची को चूसने से बहुत आराम मिलता है.

इसे दूध, मिश्री और पानी के स्वादिष्ट पेय में मिलाकर पीने से भी बहुत आराम मिलता है.

धूप में त्वचा के झुलसने पर मसूर की दाल के पाउडर में दूध मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है. असर तुरंत दिखता है.

गर्मियों में पैरों के तलवों में होने वाली जलन से छुटकारा पाने के लिए लौकी या खीरे को काटकर पैरों के तलवों पर घिसकर लगा लें, इससे तुरंत आराम मिलती है.

गर्मियों में आंखों की जलन से बचने के लिए खीरे, लौकी या केले की स्लाइस को आंखों पर 10 से 15 मिनट के लिए रखें.

3. सर्दी, जुकाम और खांसी का भी इलाज:

अदरक के रस और शहद को बराबर मिलाकर उसमें एक चुटकी कालीमिर्च मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह और शाम खाने से सर्दी-खांसी में बहुत राहत मिलता है.

आग में भुने हुए अनार का रस निकालकर उसमें एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर रात को सोते समय पीने से साइनुसाइटिस में बहुत आराम मिलता है.

हल्दी की गांठ को जलाकर उसका धुआं सूंघने से बंद नाक खुलती है तथा राइनाइटिस और साइनुसाइटिस में बहुत लाभ मिलता है.

4. बालों की समस्या के लिए:

प्याज को काटकर उसे सिर पर रगडऩे से बालों का झड़ना बंद हो जाता है और नए बाल उगना आरंभ हो जाते हैं. यह गंजेपन का अच्छा इलाज है.

एक कटोरी दही में आधा चम्मच कालीमिर्च का पाउडर मिलाकर लगाने से डैंड्रफ की समस्या में बहुत आराम होता है.

5. पीलिया का रसोई इलाज:

पीलिया रोगी के लिए मूली का रस काफी फायदेमंद है. यह शरीर से अतिरिक्त बिलिरूबिन निकालने में मदद करता है. पीलिया के रोगी को रोजाना 2 से 3 गिलास मूली का रस पीना चाहिए. इसके अलावा इसके पत्तों को पीसकर रस निकाल कर भी पिया जा सकता है.

प्याज पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है. प्याज को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये. कुछ घंटों बाद इसे निकाल लें. इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिलाएं. इसे दिन में 2 बार खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है.

दिन में 3-4 बार नींबू का रस पानी में मिलाकर पिएं. कुछ ही दिनों में पीलिया से छुटकारा मिलता है.

टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है. एक कप रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पियें.

6. रसोई के जार में रखे हुए ये लाभकारी बीज रोजाना खाने चाहिए:

किसी भी पौधे का सबसे महत्तवपूर्ण और शक्तिशाली भाग होता है उसका बीज. बीज ही वनस्पतियों का जीवन है. बीज में उस पेड़ या पौधे की सभी विशेषताएं मौजूद होती हैं जिससे यह प्राप्त होता है. ऐसे अनगिनत बीज हैं जो सेहत के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण होते हैं—

कद्दू के बीज: दो चम्मच कद्दू के बीज खा लेने से शरीर को दिन भर के लिए आवश्यक आयरन की पूर्ति हो जाती है, इसलिए यह एनीमिया का बेहतरीन इलाज है. इससे हमें पांच ग्राम फाइबर्स मिलते हैं जो कि कब्ज को दूर करते हैं और बॉडी को डिटॉक्स. यह आवश्यक एमिनो एसिड का भी स्रोत है. ओमेगा 3 फैटी एसिड्स होने से यह दिल के लिए मुफीद है. जिंक और मैंगनीज़ भी इसमें अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद है, मिर्गी, माइग्रेन, यादाश्त की कमजोरी में इसे लेना चाहिए.

अलसी के बीज: दो चम्मच अलसी के बीज में 6 ग्राम फाइबर और 3 ग्राम प्रोटीन होता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड्स होने से यह दिल के लिये फायदेमंद है. यह वजन को कम करता है. इसमें अल्फा लिनोलिक एसिड भी पाया जाता है. यह बैड कोलेस्ट्रोल को घटाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. अस्थमा और खांसी में यह बहुत लाभदायक है.

सूरजमुखी के बीज: सूरजमुखी सुंदरता बढ़ाने वाले ‘विटामिन ई’ का सबसे अच्छा स्रोत है. इसलिए अपने चेहरे में चमक और निखार लाने के लिए इसे जरूर खाना चाहिए. यह फाइबर और प्रोटीन का भी बेहतरीन स्रोत है. इसमें कॉपर और सेलेनियम भी भरपूर होता है इसलिए यह त्वचा रोग जैसे सफेद दाग से बचाता है. इसमें हेल्दी फैट्स होते हैं जो दिल को तंदुरुस्त रखते हैं.

मेथी के बीज: आयुर्वेद के अनुसार, यह वात (दर्द आदि) रोगों की बेहतरीन दवाई है. जोड़ों के दर्द के रोगियों को इसकी सब्जी बनाकर रोजाना खानी चाहिए. मधुमेह और मोटापे के रोगियों को इसका चूर्ण खाना चाहिए. मेथी के बीज कई बेहतरीन फायटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं. फॉस्फोरस, आयरन, मैंगनीज और कॉपर का यह बेहतरीन स्रोत है.

तिल के बीज: फाइबर, प्रोटीन और अच्छे फैट का यह छोटा-सा बीज बड़ा स्रोत है. तिल के तेल को आयुर्वेद में सभी तेलों से श्रेष्ठ माना गया है. कब्ज, गैस और जोड़ों के दर्द में यह बेहद लाभकारी हैं. इसमें सेसमीन नाम का ऐंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को बढऩे से रोकता है. कैल्शियम का अच्छा स्रोत होने से यह हड्डियों के लिए लाभदायक है और उन्हें मजबूत बनाता है.

7. रसोई में आए इन घातक बदलावों पर भी ध्यान दें:

हमने पश्चिम की नकल करके अपनी रसोई में बहुत सारे बदलाव कर दिए हैं. मैं आपको उनमें से कुछ घातक परिवर्तन बताना चाहता हूं ताकि हम आने वाले संकट से बच सकें. दरअसल, रोगों की रोकथाम करना उनके इलाज से ज्यादा आसान है. इसलिए मैं चाहूंगा कि आप इन घातक परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें—

खाना पकाने के लिए कुकर का प्रयोग करना घातक है क्योंकि इससे उच्च दबाव पर खाना उबालकर पकाया जाता है, जिससे लगभग 90 फीसदी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं.

एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाने से एल्युमिनियम धातु भोजन में मिल जाती है और यह घातक धातु हमारे शरीर में कई रोग उत्पन्न करती है जैसे लिवर की समस्या, किडनी की समस्या और कैंसर आदि.

रेफ्रिजरेटर का प्रयोग करने से उसमें मौजूद क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस भोजन को दूषित करती है जो हमारे शरीर के लिए अत्यंत घातक है.

प्लास्टिक के बर्तनों में खाने-पीने की चीजें रखना घातक है क्योंकि इसमें कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) तत्व होते हैं.

माइक्रोवेव ओवन से निकलने वाली रेडिएशन भी बहुत घातक साबित हो रही है.

स्वादवर्धकों का प्रयोग अब खाने को स्वादिष्ट बनाने में हो रहा है जो कि कई खतरे पैदा करते हैं—जैसे मोटापा, स्किन प्रॉब्लम्स, सिरदर्द, लिवर डेमेज, कैंसर आदि.

शक्कर का अत्यधिक प्रयोग जल्दी बुढ़ापा लाता है, यह हड्डियों और दांतों को खराब करता है, हृदय रोग और मोटापे को उत्पन्न करता है.

सामान्य आटे की जगह रिफाइंड आटे का प्रयोग करने से आटे में मौजूद 95 फीसदी न्यूट्रिशन नष्ट हो जाते हैं और यह कब्ज तथा मोटापे को बढ़ाता है.

घी और कच्ची घानी से निकले तेल की जगह रिफाइंड तेल ने ले ली है जो कि हृदय रोग को आमंत्रित कर रहे हैं.

सोडियम बेंजोएट जैसे प्रिजर्वेटिव का प्रयोग बढऩे से किडनी और हाइ ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती है.

मटके की जगह वाटर प्यूरीफायर ने ले ली. इससे हमारे शरीर में कई जरूरी मिनरल्स जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी हुई तथा हम कई रोगों से पीडि़त होने लगे हैं—जैसे जोड़ों की समस्या और डिप्रेशन.

भोपाल निवासी डॉ. अबरार मुल्तानी आयुर्वेद के मशहूर चिकित्सक हैं और स्वास्थ्य संबंधी किताबंस लिख चुके हैं. वे इनक्रेडिबल आयुर्वेद के संस्थापक हैं

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