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बिहार: सलाखें तोड़ ले गए लाडली को

बारह वर्षीया नवरुणा के घर से लापता होने की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई. पुलिस के रवैये से बेबस परिवार हुआ हलकान.

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अशोक कुमार प्रियदर्शीपटना, 16 February 2013
बिहार: सलाखें तोड़ ले गए लाडली को नवरुणा के माता-पिता

अठारह सितंबर, 2012 की कहर भरी रात को याद कर अतुल्य चक्रवर्ती और उनका परिवार आज चार महीने बाद भी सिहर उठता है. मुजफ्फरपुर के चक्रवर्ती लेन में रहने वाला यह परिवार दिन भर के काम निबटाकर गहरी नींद में सोया था. माता-पिता की आंखों में अपनी दोनों बेटियों नवरुणा और नवरूपा के उज्ज्वल भविष्य के ख्वाब तैर रहे थे.

मुजफ्फरपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल की 12 वर्षीया होनहार छात्रा नवरुणा भी सुबह के लिए अपना बस्ता लगाकर मीठी नींद के आगोश में थी. आधी रात को अचानक उसके कमरे की खिड़की की सलाखें टूटीं और कोई उसका अपहरण कर चलता बना. सुबह परिवार की नींद खुली तो कोहराम मच गया. घर की लाडली का कोई अता-पता नहीं था. वही लाडली जिसके लिए इंजीनियर बनने के सपने संजोए जा रहे थे. उसे पड़ोस-रिश्तेदारों के यहां ढूंढा गया लेकिन कोई पता नहीं चला. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई पर उसके ढुलमुल रवैये ने परिवार की उम्मीदों पर जबरदस्त आघात किया.Bihar crime

घटना के दिन पुलिस के वरिष्ठ अफसरों को पूरे घटनाक्रम से रू-ब-रू कराया गया लेकिन एसएसपी राजेश कुमार 33 दिन बाद और एडीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने 40 दिन बाद घटनास्थल का मुआयना किया. नवरुणा के लापता होने के एक महीने बाद मुजफ्फरपुर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. लेकिन यह कवायद बेनतीजा ही रही.

अतुल्य दंपती पुलिस की इस लापरवाही से नाराज हैं. उनका कहना है कि शुरुआत में पुलिस इस मामले को प्रेम-प्रसंग मानकर जांच करती रही. आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाए परिवार के सदस्यों के मोबाइल सर्विलांस पर रखे गए और बेवजह दबाव बनाया गया. जब कामयाबी नहीं मिली तब इस मामले को अपहरण का मामला माना गया. शुरुआती जांच ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार को सौंपी गई, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं.

पुलिस चाहती तो नवरुणा के बारे में काफी पहले पता लगा सकती थी क्योंकि जिस कमरे से उसका अपहरण हुआ था, वहां पान बहार की पुडिय़ा और उसकी ड्रेस का टूटा हुआ काला मोती पड़ा था. अतुल्य कहते हैं कि हमने तुरंत उस जगह की फॉरेंसिक जांच की बात कही थी. लेकिन कुछ नहीं हुआ. 25 दिन बाद कमरे की सफाई कर दी गई.

26 नवंबर को अतुल्य के घर के सामने वाली नाली से मानव कंकाल मिलने से इस मामले में नया मोड़ आया. पुलिस ने कंकाल के नवरुणा के होने की आशंका जताई है. डीएनए टेस्ट के लिए वह उसके परिजनों का ब्लड सैंपल चाहती है. बिहार सीआइडी के पुलिस महानिरीक्षक (कमजोर वर्ग) अरविंद पांडेय ने इंडिया टुडे को बताया, ''डीएनए टेस्ट के बाद ही कंकाल के बारे में सही जानकारी मिल सकती है. अदालत और नवरुणा के परिजनों से इसके लिए आग्रह किया जा रहा है. ''

अपनी बेटी के लापता होने की पीड़ा झेल रहे इस परिवार को पुलिस पर भरोसा नहीं है. लिहाजा, पिछली 7 और 15 जनवरी को सैंपल के लिए उन्हें मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल जाना था, पर परिजनों ने वहां जाने से इनकार कर दिया. अतुल्य कहते हैं, ''अब इस मामले को सीआइडी के जिम्मे सौंपकर इसे ठंडे बस्ते में डाल देने का काम किया गया है, जिसकी भूमिका कंकाल मिलने के बाद तैयार हुई है. '' सवाल यह है कि शुरुआत में जिस कंकाल को 30-40 वर्ष के इंसान का बताया जा रहा था, उसे अब 13-15 साल की किशोरी का क्यों कहा जा रहा है.

इसलिए राज्य पुलिस से परिवार का भरोसा उठ चुका है. उन्हें अब सीबीआइ जांच में ही उम्मीद की किरण नजर आती है. अतुल्य कहते हैं, ''सीबीआइ चाहे तो मेरे शरीर के मांस का टुकड़ा ले ले, कोई आपत्ति नहीं होगी. लेकिन पुलिस को सैंपल नहीं दूंगा. '' इस घटना को शहर की छह कट्टा जमीन और उस पर बने मकान से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिसे बेचकर अतुल्य परिवार यहां से जाना चाहता था.

इसकी कीमत तीन करोड़ रु. तय की गई थी और घटना से 17 दिन पहले परिवार को 21 लाख रु. बतौर एडवांस भी मिले थे. बताया जाता है कि कई लोग इस प्राइम प्रापर्टी को खरीदने की ताक में थे. नवरुणा के चाचा निर्माल्य चक्रवर्ती संदेह जताते हैं, ''भू-माफिया से सांठ-गांठकर पुलिस मामले को दूसरी दिशा देना चाहती है, ताकि हम लोग अपनी जमीन छोड़कर चले जाएं. ''

खास यह कि 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर.एम. लोढा और अनिल आर. दवे की खंडपीठ ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी के छात्र अभिषेक रंजन की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य के गृह सचिवों के अलावा बिहार सरकार से छह हफ्ते में इस मामले में हलफनामा दायर करने को कहा है. अभिषेक ने बताया, ''बिहार में अपहरण की घटनाओं को रोक पाने में पुलिस नाकाम रही है. 2012 के सितंबर तक पुलिस आंकड़ों के मुताबिक रोजाना औसतन 14 से अधिक अपहरण की घटनाएं हो रही हैं जबकि 2001 में यह छह से भी कम थीं. ''

पांडेय सिर्फ इतना कहते हैं, ''नवरुणा मामले में तीन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. '' हालांकि नवरुणा के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है. इन दिनों अतुल्य के घर का दरवाजा हमेशा बंद रहता है. यह बेबस बाप पहले पुलिस और अब सीआइडी की जांच प्रक्रिया से आजिज आ चुका है. हर दिन एक नई जांच और मामले को रफा-दफा करने की कोशिशों से अब उनमें पुलिस के खिलाफ गुस्सा पैदा हो गया है. अतुल्य की पत्नी मैत्रेयी चक्रवर्ती मुख्यमंत्री से मिलने की नाकाम कोशिश कर चुकी हैं तो बहन नवरूपा और उसके चचेरे भाई नवजीत के सीबीआइ जांच के आग्रह पर 24 दिसंबर, 2012 को गृह मंत्रालय ने राज्य के गृह सचिव को कार्रवाई का निर्देश दिया.

बेशक चक्रवर्ती परिवार को उम्मीद की कोई ठोस वजह नजर नहीं आ रही हो लेकिन मैत्रेयी कहती हैं, ''मेरी बेटी जिंदा है. पुलिस उसे बचाने की बजाय मामले को उलझा रही है.''

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