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"भाजपा की नफरत की राजनीति ने देश को बर्बाद कर डाला है''

"केंद्र पब्लिसिटी में उस्ताद है. उन्होंने सभी रज्यों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर 600 करोड़ रु. खर्च किया. वहीं मैंने लड़कियों के सशक्तीकरण पर 5,500 करोड़ रु. खर्च किए हैं.''
"भाजपा की नफरत की राजनीति ने देश को बर्बाद कर डाला है'' यासिर इकबाल
राज चेंगप्पाकोलकत्ता, 09 July 2018

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जुझारू स्वभाव कोलकाता के उनके दफ्तर में ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से बातचीत में साफ नुमायां हो गया.

केंद्र और भाजपा से तीखी टकराहट, सत्ता में अपने दूसरे कार्यकाल, विपक्षी गठजोड़ बनाने की कोशिशों, सोनिया तथा राहुल गांधी से अपने रिश्तों और इस आरोप पर भी कि उन्होंने अपनी पार्टी में नेतृत्व की दूसरी पांत नहीं उभरने दी, उन्होंने खुलकर बातचीत की. पेश हैं खास बातचीत के कुछ अंशः

आपकी जिंदगी बचपन से लेकर बाद के दौर में राजनीति तक निरंतर संघर्षों की दास्तान है. अपनी जिंदगी के किस संघर्ष को आप सबसे बड़ा मानती हैं?

संघर्ष तो मेरी जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुका है. मेरे पिता की मृत्यु के बाद हमने काफी कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया. हम आत्मनिर्भर थे. छात्र जीवन में मुझे सीख मिली कि कभी किसी के आगे सिर न झुकाओ, जो कुछ करो, ईमानदारी और पूरे साहस के साथ करो.

फिर, मैंने 34 साल वामपंथियों का कुशासन, उनका अत्याचार झेला. अगर आप मेरी सेहत की रिपोर्ट देखेंगे तो पाएंगे कि मेरा पांच से छह बार ऑपरेशन हुआ, दिमाग, पेट, हाथ, आंख, सबका. मैं कई बार मरते-मरते बची. यह तो मेरा जज्बा था (जिसने मुझे जिंदा रखा). मैं कभी नहीं घबराई, कभी नहीं डरी.

तो क्या माकपा को हराना सबसे कड़ा संघर्ष था?

हमने 34 साल तक उससे लड़ाई लड़ी, अपने छात्र जीवन से ही. आज भी जब हम सरकार में हैं, हमें वामपंथी कुशासन से जूझना पड़ रहा है. अपनी सरकार के सात साल में हम 2,14,000 करोड़ रु. तो कर्ज चुकाने में अदा कर चुके हैं (जो वे छोड़ गए थे).

अब हम कैसे सरकार चलाएं, कैसे समाज कल्याण और विकास के काम करें? केंद्र सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिली. हमने कई बार कहा कि यह हमारी गलती नहीं है, यह विरासत में हमें मिली है. कर्ज का पुनर्संयोजन करें, कम से कम हमें अदा करने की कुछ मोहलत दें.

पर वे कुछ नहीं कर रहे हैं. इस साल भी हमें ब्याज के रूप में 47,700 करोड़ रु. अदा करने पड़े. हम विकास करना चाहते हैं, पर हमें केंद्र से कोई मदद नहीं मिल रही है. चूंकि हम उनका समर्थन नहीं करते, इसलिए वे हमारे लिए कुछ नहीं कर रहे.

उस सहकारी संघवाद के बारे में क्या है, जिसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार करते रहते हैं?

सहकारी संघवाद को तो भूल ही जाइए, अब तो कोई संघीय ढांचा ही नहीं बचा है. वे (भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार) सब कुछ बर्बाद करने पर तुली हुई है. उनकी नफरत की नीति देश, समाज और अर्थव्यवस्था को तबाह कर चुकी है.

अब तो कुछ अपवादों को छोड़कर मीडिया भी बिकाऊ माल है. हाल में भाजपा इमरजेंसी का हल्ला कर रही है लेकिन वह खुद क्या कर रही है? हर कोई खौफजदा है, हर कोई डरा हुआ है कुछ बोलने से. बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है क्योंकि वे अपनी एजेंसियों को आपके पीछे लगा देंगे. उन्होंने हमारे लोगों को भी गिरफ्तार किया, लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

क्या आप केंद्र पर अपने राज्य के लिए कुछ न करने का आरोप लगा रही हैं?

हां, दरअसल हम पर हर रोज अत्याचार हो रहा है, मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक उत्पीडऩ हो रहा है. बंगाल का प्रदर्शन देखिए. देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी है, हमारी 11.46 फीसदी है.

अगर आप सकल मूल्य योग (जीवीए) देखें तो देश का 6.1 फीसदी है जबकि हमारा 11.8 फीसदी है. उद्योग के मामले में भी देश की वृद्धि दर 4.4 फीसदी है जबकि हम 11.4 फीसदी पर हैं.

सेवा क्षेत्र में भी देश 8.3 फीसदी पर है, हम 15.6 फीसदी पर हैं. कृषि क्षेत्र में देश की वृद्धि दर 2.1 फीसदी है, हमारी 2.3 फीसदी है. हम इकलौते राज्य हैं जहां किसान की आमदनी तिगुनी (टीएमसी के कार्यकाल में) हो गई है, प्रधानमंत्री तो अभी दावा ही कर रहे हैं कि किसान की आमदनी दोगुनी कर देंगे.

क्या आपने प्रधानमंत्री से संपर्क किया?

हम भीख नहीं मांगेंगे. केंद्र सरकार हमारे खिलाफ भेदभाव करती है, वह हमें कोई पैकेज नहीं दे रही. मैं कुछ और तथ्य बताती हूं. क्या आप जानते हैं कि बंगाल में सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं सबसे ज्यादा हैं?

हम अपने 9 करोड़ लोगों को 2 रु. प्रति किलो की दर से गेहूं और चावल मुहैया कराते हैं. हम सभी को मुफ्त इलाज, मुक्रत दवाइयां और अस्पताल में मुफ्त बिस्तर मुहैया कराते हैं. हमारे यहां कन्या सशक्तीकरण की योजना है, लड़कियां 18 बरस की होती हैं और वे विवाह करने के बदले अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं तो हम उनके खाते में 25,000 रु. डाल देते हैं.

फिर सालाना 1.5 लाख रु. से कम आमदनी वाले परिवारों को लड़की की शादी में खर्च के लिए 25,000 रु. दिया जाता है. हम अलपसंख्यकों, आदिवासियों, अनूसूचित जातियों को छात्रवृत्ति मुहैया कराते हैं. हमारे यहां अंतिम संस्कार के लिए भी योजना है. हर जाति, हर संप्रदाय, हर जरूरत के लिए यहां कोई न कोई योजना है.

इन योजनाओं के लिए आप पैसे का प्रबंध कैसे करती हैं? राज्य के राजकोषीय घाटे पर क्या सोचती हैं?

हम इसका प्रबंधन करते हैं. हमने अपना राजस्व बढ़ाया है, करीब-करीब दोगुना कर लिया है. हम अपने खर्च में संतुलन रखते हैं. हमने कई सुधार शुरू किए हैं. हमने विकेंद्रीकरण और कार्य-सक्षमता बढ़ाने पर काम किया है.

हमने जब सत्ता संभाली तो 63 विभाग और मंत्रालय थे. हम उसे 51 पर ले आए. हमें ई-गवर्नेंस के लिए अवॉर्ड मिला. कौशल विकास में हम देश में पहले नंबर पर हैं. लघु उद्योगों और अल्पसंख्यकों के विकास के मामले में भी हम पहले नंबर पर हैं.

हमने रोजगार के अवसर 40 फीसदी तक बढ़ाए हैं, जिसे केंद्र सरकार ने संसद में बताया. हमने इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 18,000 करोड़ रु. आवंटित किए, जिसका इस्तेमाल सिर्फ फ्लाइओवर और सड़कें बनाने में ही नहीं, 43 मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल, 48 नए कॉलेज और 22 नए विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज बनाने में किया गया है. हमने हर मामले में सुधार किया है. इसी वजह से हमारी जीडीपी आसमान छू रही है.

फिर भी 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी प्रधानमंत्री की योजनाओं की चर्चा आपकी योजनाओं से ज्यादा है.

वे पब्लिसिटी में उस्ताद हैं, उस पर उन्होंने खूब पैसा खर्च किया है, हमने ऐसा नहीं किया. हमारा मानना है कि एक-एक पाई कीमती है, यह हमारे लोगों का पैसा है. "बेटी बचाओ, बेटा पढ़ाओ'' योजना की बात करें.

पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने 29 राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों के लिए 600 करोड़ रु. आवंटित किए. मैं अपने राज्य में लड़कियों के सशक्तीकरण योजना कन्याश्री के लिए 5,500 करोड़ रु. खर्च कर चुकी हूं, जिससे 50 लाख लड़कियों को लाभ मिला है. और केंद्र ने क्या खर्च किया? प्रति राज्य महज 20 करोड़ रु. तो, इससे क्या हासिल हो सका?

नीतियों के मामले में आप वामपंथियों से भी अधिक वामपंथी लगती हैं...

मैं वाम या दक्षिणपंथी नहीं हूं. मैं राष्ट्रवाद, देशभक्ति, संघीय ढांचे, लोकतंत्र और गरीबों पर यकीन करती हूं. अगर एक लाइन में अपनी पार्टी की विचारधारा बताऊं तो यह लोगों के लिए, लोगों के द्वारा, लोगों की सरकार है. यह हमारे नाम तृणमूल कांग्रेस से भी जाहिर है, जिसका अर्थ एकदम जमीनी स्तर होता है.

मुख्यमंत्री के बतौर यह आपका दूसरा कार्यकाल है, इस बार आप अलग क्या कर रही हैं?

सरकार लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और हमने जो परियोजनाएं शुरू कीं, उस पर अमल कर रहे हैं. इस कार्यकाल में, मैं बेरोजगारी और उद्योगों पर ध्यान दे रही हूं. जैसा कि मैंने पहले कहा, रोजगार के अवसर 40 फीसदी बढ़ गए हैं.

औद्योगीकरण के मामले में हम इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. बंगाल में सिलिकन वैली जैसी एक योजना लाई जाएगी. हमने जमीन चिन्हित कर ली है और सितंबर में उसका उद्घाटन करेंगे.

और भी कई परियोजनाएं हैं. मैं दो बंदरगाह बनाना चाहती हूं, मगर केंद्र सरकार सिर्फ एक पर राजी है. हमने निवेश आकर्षित करने के लिए वैश्विक बंगाल औद्योगिक सम्मेलन भी शुरू किया है.

मुख्यमंत्री बनने के पहले आपकी छवि सुधार और उद्योग विरोधी की रही है. क्या इसमें बदलाव आया है?

कोई बदलाव नहीं है. जो मैं शुरू में थी, वहीं आज भी हूं. विकास मेरा सपना है. यह एक संघर्ष भी है. मैंने ऐसे अत्याचार किसी केंद्र सरकार में नहीं देखे. विकास के मामले में मैं सिर्फ एक उदाहरण दूंगी.

उन लोगों ने हड़बड़ी में जीएसटी लागू किया, असंगठित क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ. यहां तक कि नोटबंदी से भी. जिस दिन इसका ऐलान हुआ, मैंने कहा कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है. और अब जीएसटी.

हर राज्य नकारात्मक वृद्धि (कुछ मामलों में) शून्य से 18 फीसदी नीचे लुढ़क गया, सिर्फ बंगाल सरप्लस रहा. आपको क्या लगता है, यह कैसे हुआ? अगर सुधार नहीं होते, सक्रियता नहीं होती, कार्रवाई नहीं होती, पुनर्संयोजन नहीं होता, तो आप वित्तीय तौर पर आगे कैसे बढ़ते? मैं चुनौती देती हूं कि कोई ऐसा करके दिखाए.

वह धारणा जो सिंगूर में टाटा के कारखाने और दूसरे मामलों से बनी थी.. ..

अब राज्य में टाटा के कई कारखाने चल रहे हैं. टाटा घराना भी सरकार के साथ काम कर रहा है. हम किसी कंपनी के खिलाफ नहीं हैं. लोगों को जमीन बेचने पर मजबूर करने की नीति गड़बड़ थी.

अब हमारी नीति देखिए. हमने जमीन बैंक, जमीन के इस्तेमाल और खरीद की नीति बनाई. हम उद्योग को जमीन दे रहे हैं. अगर कहीं सड़कों, फ्लाइओवर, रेलवे का मामला है तो हम समझौते करते हैं. लोगों को जबरन निकालते नहीं हैं.

उद्योग के मामले में आपकी नीति क्या है? आप निजी-सरकारी साझेदारी (पीपीपी) में यकीन करती हैं?

हां, हमने कई पीपीपी करार किए हैं. हमने विलय का भी फैसला किया. यहां कई बीमार उद्योग हैं. विलय से मदद मिली, कर्मचारी काम कर रहे हैं और खुश हैं. अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल नए उपक्रम के लिए करूंगी, कर्मचारियों को विभिन्न क्षेत्रों में काम दे दिया गया है.

क्या आप एयर इंडिया के विनिवेश के समर्थन में हैं?

मैं इसका समर्थन नहीं करती. आपके घर में गरीबी है तो क्या अपने घर का सब कुछ बेच देंगे? अपनी बेटी, बेटे, पत्नी, मां-बाप? एयर इंडिया राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड है. आप पहले ही एयर इंडिया के महत्वपूर्ण रूट बेच चुके हो, उसे बर्बाद कर डाला है. पर कृपया, देश की इज्जत मत बेचिए.

उड्डयन उद्योग में काफी निजीकरण हो गया है. अब कई निजी एयरलाइन हैं. हम उनके खिलाफ नहीं हैं. निजी और सरकारी क्षेत्र, दोनों में कारोबार होने दीजिए. सरकारी कंपनियों को बेचने के बदले तीन या चार को एक में मिलाया जा सकता है.

प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि सरकारों को वह नहीं करना चाहिए, जो कारोबारी कर सकते हैं.

कारोबार अलग है, सामाजिक जरूरतें अलग हैं. यूरोपीय देशों में सामाजिक सुरक्षा के कार्यक्रम क्यों हैं? अगर किसी की मृत्यु हो जाती है तो क्यों हर कोई अंतिम संस्कार में शामिल होता है? यह किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि दोस्ती, एक रिश्ते की वजह से होता है.

यह हर मामले में अलग होता है. आप जहां जरूरी हो, निजीकरण कीजिए. पर नोटबंदी की क्या जरूरत थी? देश को उससे क्या लाभ हुआ? सिर्फ उनकी पार्टी को लाभ हुआ. अब भाजपा चुनावों में करोड़ों रु. खर्च कर रही है. वे भाजपा कार्यकर्ताओं को बाइक, कार दे रहे हैं. पैसे लूट रहे हैं और अपने पार्टी के लोगों को दे रहे हैं. कोई गरीब कैसे चुनाव लड़ेगा? अगर आप देश में सुधार चाहते हैं तो चुनाव सुधार कीजिए.

आप अपने विचार केंद्र से साझा क्यों नहीं करतीं?

वे बड़े लोग हैं, मैं उन्हें सलाह नहीं दे सकती. मैं बहुत साधारण हूं. बंगाली में एक कहावत है, "बोऊ, बुद्धि आर बोई काउ के देबे ना'', यानी पत्नी, बुद्धि और किताब किसी को न दो, ये कभी वापस नहीं मिलेंगे. यदि संघीय ढांचे में बदलाव होता है और क्षेत्रीय दल सत्ता में आते हैं तो मैं उनसे अपने विचार साझा करूंगी.

आप विपक्ष के गठजोड़ में आधार के तौर पर उभरी हैं. क्या आपको लगता है कि ऐसा गठजोड़ संभव है?

हां, यह संभव है. मैं बहुत आशावादी हूं. यह बहुत आसान है. हर किसी को मिलकर काम करना है. मेरा मानना है कि जो भी मजबूत है, उसे चुनाव लड़ने दीजिए. जहां कांग्रेस मजबूत है, वहां उसे लड़ने दिया जाए, जहां क्षेत्रीय दल मजबूत हैं, वहां उन्हें लड़ने दिया जाए.

आपका कहना है कि एक साझा उम्मीदवार ही खड़ा किया जाना चाहिए?

मैं यह नहीं कह रही हूं. अगर 75 सीटों पर भी ऐसा किया जा सका तो खेल खत्म हो जाएगा. अगर मायावती और अखिलेश साथ काम करते हैं तो खेल खत्म हो जाएगा. फिर चुनाव के बाद एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाया जा सकता है. यह बड़ा परिवार है और फैसले सामूहिक होने दीजिए.

तो आप सभी मोदी विरोधी, भाजपा-विरोधी साझा वोट पर काम कर रहे हैं?

वे उत्पीड़न और अत्याचार कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ भाजपा के लोग भी उनका समर्थन नहीं करते. वे तो सैकड़ों हिटलर की तरह बर्ताव कर रहे हैं.

आप मोदी को भी हिटलर कह रही हैं?

मैं नहीं कह रही हूं. मैं कोई टिप्पणी नहीं करती, आम लोगों को फैसला करने दीजिए. भाजपा के बारे में मेरी जो भी राय है, वह मैं आपको बता चुकी हूं.

जब आप भाजपा को हराने के लिए वोट मांगेंगी, तो आप क्या कहेंगी?

मैं आपको अभी क्यों बताऊं? हमने सब तैयार कर लिया है, चुनाव आने दीजिए तब देखिएगा. अगर आपको संगीत सुनना है तो उत्सव तक इंतजार करिए. हम अपने नारे लोकतंत्र के उत्सव, अगले चुनावों में जाहिर करेंगे.

कुछ विपक्षी दल कांग्रेस के बगैर संघीय मोर्चा चाहते हैं?

कुछ पार्टियां कांग्रेस का समर्थन नहीं करतीं, उनकी अपनी क्षेत्रीय मजबूरियां हैं. मैं उन्हें दोष नहीं देती. मैं कहती हूं, आइए, भाजपा के खिलाफ मिलकर काम करें. अगर कांग्रेस मजबूत है और कुछ जगहों पर ज्यादा सीटें पाती है तो वह अगुआई करे.

अगर क्षेत्रीय दल कहीं एक साथ हैं तो वे फैसला करने वाले बन सकते हैं. इस मामले में मैं चंद्रशेखर राव, चंद्र बाबू नायडू, द्रमुक, एच.डी. कुमारस्वामी, अरविंद केजरीवाल और दूसरे दलों से पूरी तरह सहमत हूं. मैं किसी को छोड़ना नहीं चाहती, शिवसेना को भी नहीं.

आप कांग्रेस से समझौता करने या किसी तरह का तालमेल करने के खिलाफ नहीं हैं?

मुझे कोई समस्या नहीं है. मेरा इरादा सबके साथ जुड़ने का है. पर यह मेरा अकेले का फैसला नहीं है. यह सभी क्षेत्रीय दलों का फैसला होगा. मुझे किसी के साथ काम करने में कोई समस्या नहीं, बशर्ते वह काबिल हो, उसका इरादा, फलसफा, विचारधारा साफ हो. मेरा एक ही मकसद है कि हमें देश के लोगों को एक करना है.

सोनिया गांधी से आपके रिश्ते कैसे हैं?

मेरा उनसे रिश्ता काफी अच्छा है, मैं उनका सक्वमान करती हूं. वे बहुत भद्र, विनम्र और सौम्य हैं. हमारे बीच कभी झगड़ा नहीं हुआ.

मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में आपकी राय क्या है?

मैंने उनके साथ काम नहीं किया है, इसलिए उन्हें कुछ समय दीजिए. वे युवा पीढ़ी के हैं, उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से काम करने दीजिए. वे कांग्रेस के परिवार से हैं. मेरे मन में उन सबके प्रति आदर है.

वे जैसे चाहें, लोगों की सेवा करने दीजिए. मैं राजीव जी और सोनिया जी के बारे में जो कह सकती हूं, राहुल जी के बारे में वह नहीं कह सकती, क्योंकि वे बहुत छोटे हैं.

आपको लगता है कि परिस्थितियां बनीं तो आप राहुल के साथ काम कर सकती हैं?

मैंने सामूहिक परिवार की बात की, जो भी देश फैसला करे. यह मेरे अकेले की बात नहीं है. हमें लोगों के फैसले और जनादेश पर भरोसा करना होगा. हमें अपने देश के लोगों को भरोसा दिलाना होगा. क्षेत्रीय दल जो भी फैसला करेंगे, हम उसका पालन करेंगे. पर कुछ पार्टियों की अपनी समस्याएं और क्षेत्रीय मजबूरियां हैं. हमें उनका भी सक्वमान करना है.

नेतृत्व के बारे में क्या है?

नेतृत्व कोई समस्या नहीं है. अगर समझदारी है, सब कुछ हल किया जा सकता है.

क्या मैं देश के संभावित प्रधानमंत्री से बात कर रहा हूं?

मैं? यह बड़ा बेतुका सवाल है. पहले तो मैं यही कहूंगी कि मेरा कोई इरादा नहीं है. मैंने आपसे कहा, मैं बेहद साधारण हूं और अपने काम से खुश हूं. पर हम सामूहिक परिवार के नाते सबकी मदद करना चाहते हैं. प्रधानमंत्री का उम्मीदवार तय करने के बदले सबको साथ काम करने दीजिए.

लेकिन आप खुद को बाहर नहीं रख रही हैं...

मैं कौन होती हूं किसी को बाहर करने वाली? मैं संघर्षों से मंझी हुई, वरिष्ठ नेता हूं. मैं सात बार सांसद, दो बार विधायक और अब मुख्यमंत्री हूं. मैं ऐसा कुछ नहीं कह सकती जो दूसरों को पसंद न हो.

राहुल गांधी ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री बनने की दिशा में काम कर रहे हैं?

यह उनका विचार है. अगर उनकी पार्टी बहुमत में आती है, तो क्यों नहीं? यह तो लोगों पर निर्भर करता है.

आप एनडीए के साथ भी काम कर चुकी हैं, जब अटल जी प्रधानमंत्री थे...

सिर्फ अटल जी के लिए. क्योंकि वे सेकुलर थे. उस समय भाजपा भी बहुमत में नहीं थी, वह सहयोगियों पर आश्रित थी. एक साझा एनडीए एजेंडा था और हमने एक साथ उस पर काम किया था. हम अटल जी के साथ खुश थे. कुछ अभी भी मंत्री हैं जिनका हम आदर करते हैं—राजनाथ जी, सुषमा जी और अन्य.

आप अटल जी की तुलना मोदी जी से कैसे करेंगी?

अटल जी अटलजी हैं.

मुझे इस सवाल को दूसरे ढंग से पूछने दीजिए. अगर कल भाजपा की सीटें बहुमत के आंकड़े से घट जाती हैं और वे आपसे समर्थन मांगते हैं तो क्या आप एनडीए के साथ जाएंगी?

मैं कोई राजनैतिक भविष्यवक्ता नहीं हूं. आपने उपचुनावों और दूसरे चुनावों के नतीजे देखे हैं. भाजपा ने जो पाया, वह उसकी बुलंदी है, वह चोटी पर पहुंच चुकी है. उससे आगे नहीं जा सकती, उसे नीचे ही आना है. इस बारे में हमारा गणित साफ है.

क्या आप एनडीए का समर्थन कर सकती हैं?

मैं ऐसे लोगों को समर्थन नहीं कर सकती जो यातनाएं देने में विश्वास रखते हों. हम केवल एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का ही समर्थन कर सकते हैं, इस देश को एक रखने वालों का समर्थन कर सकते हैं और किसी ऐसी ही आर्थिक नीति के साथ खड़े हो सकते हैं जो केवल जनता के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हो.  

जब आप सरकारी यातनाओं की बात करती हैं तो क्या आपका इशारा प्रधानमंत्री मोदी और सरकार चलाने के उनके तरीकों की ओर होता है?

मैं किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई बात नहीं कह रही. न ही मैं प्रधानमंत्री या उनकी सरकार के खिलाफ कोई बात कर रही हूं. व्यक्तिगत छींटाकशी मेरी आदत नहीं है.

पिछले चार साल में केंद्र सरकार के प्रदर्शन को लेकर आपकी क्या राय है?

पब्लिसिटी जबरदस्त है, काम कुछ भी नहीं. विदेश नीति से लेकर आर्थिक नीतियों तक केंद्र सरकार हर मोर्चे पर फिसड्डी रही है. यहां तक कि संसद भी ठीक से नहीं चला पा रहे. अगर इस सरकार के दौरान आप संसद की कार्यवाही का आकलन करेंगे तो आप पाएंगे कि शायद ही किसी सत्र में ढंग से कार्य हुआ हो.

यह दोनों पक्ष की जिम्मेदारी है कि मिलकर संसद चलाएं पर उनकी रुचि ही नहीं है. कई सारे महत्वपूर्ण विधेयक सिर्फ ध्वनि मत से पारित किए गए.  

आपके राज्य में अब भाजपा ही आपकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी हो गई है. कांग्रेस तो माकपा से भी पीछे जा चुकी है?

मैं नंबर एक तो हो सकती हूं पर नंबर 2, नंबर 3 या फिर 4 कौन होगा? यह मैं कैसे तय कर सकती हूं. अगर कांग्रेस कुछ कहती है, माकपा कुछ कहती है और फिर वे उससे पलटी मार जाते हैं. कांग्रेस भाजपा बनने की कोशिश करे या फिर माकपा भाजपा बनने की, तो इसमें मेरा क्या दोष? यह मेरा खेल नहीं है, न मेरे वश में है. उनको "छागलेर तृतीयो संतान'' (बकरी का तीसरा बच्चा) ही होने दीजिए.

हालिया पंचायत चुनावों में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरकर आई है. क्या भाजपा से आपको खतरा महससू होता है?

कैसा खतरा? बंगाल में भाजपा कुछ नहीं है. हमने पंचायत समितियों में 98 फीसदी सीटें जीतीं. एक कहावत है चोरों की मां ही सबसे ज्यादा चिल्लाती हैं. पंचायत चुनावों के बाद हुए उपचुनावों में हम 60,000 से ज्यादा वोटों से जीते.

अमित शाह कह रहे हैं कि वे अगले लोकसभा चुनावों में बंगाल से 22 सीटें जीतेंगे?

कृपया उनका नाम तो मत ही लें. मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहती. मुझे एक बात बताएं. खुफिया एजेंसियों के जरिए वे क्या कर रहे हैं? मैंने कभी भी ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों को किसी एक पार्टी के लिए काम करते नहीं सुना.

वे सियासी संघर्ष में हमें हरा नहीं सकते इसलिए जांच एजेंसियों की मदद से धमकाने की कोशिशें कर रहे हैं. कितने बिजनेसमैन देश छोड़कर चले गए? 75,000 से ज्यादा. अगर आप उनसे अकेले में पूछें तो हर कोई इस सरकार के खिलाफ है. पर वे बोलने से डरते हैं. ये लोग मुझे भी मारने की कोशिश कर सकते हैं. मैं इनसे जरा भी नहीं डरती, बल्कि हम इस लड़ाई को लड़ेंगे.

वे आप पर आरोप लगा रहे हैं कि आपकी पार्टी हिंसा का सहारा ले रही है.

आप किस हिंसा की बात कर रहे हैं? पंचायत चुनावों में मेरी पार्टी ने 30 लोग गंवा दिए. भाजपा के तो सिर्फ दो लोग मारे गए और वह भी उनकी अंदरूनी लड़ाई में. उन्होंने भाड़े के गुंडे जुटा रखे हैं. बंगाल एक शांतिप्रिय और विकासोन्मुखी प्रदेश है. अफवाहें फैलाकर भाजपा हमें बदनाम करने की कोशिश कर रही है.

आपने चीन का अपना हालिया दौरा रद्द क्यों किया?

मैं जानती हूं कुछ साजिशें हुई हैं. मैं इस पर बात नहीं कर सकती, क्योंकि मैं अपने देश का सम्मान करती हूं. इसीलिए सारी बातें अच्छी तरह जानने के बावजूद मैं आपको कुछ नहीं बता सकती. आप मुझे बताइए, मेरा शिकागो का दौरा क्यों रद्द किया गया? स्वामी विवेकानंद का जन्म इस प्रदेश में हुआ था, रामकृष्ण मिशन उनका जन्मस्थान है.

उन्होंने स्वामीजी के शिकागो भाषण के 125वीं सालगिरह पर मुझे आमंत्रित किया. यह वह पत्र है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि आप कृपया अवश्य आएं और मैंने उनका निमंत्रण स्वीकार किया. उसके बाद उन्होंने वह कार्यक्रम ही क्यों रद्द कर दिया? आप उनकी भाषा देखिए, वे किसी अप्रत्याशित परेशानियों की बात कर रहे हैं. इसका क्या अर्थ निकाला जाए? क्या आपको नहीं लगता कि उन्हें धमकाया गया था?

आपका मानना है कि यह सब भाजपा और संघ परिवार मिलकर करा रहे हैं?

उनके पास ए से लेकर जेड तक परिवार हैं, इसलिए मैं नहीं जानती. उन्होंने तो मेरे पुरी मंदिर में दर्शन के लिए जाने का भी विरोध यह कहते हुए किया था कि मैं हिंदू नहीं हूं. वे होते कौन हैं यह फैसला करने वाले कि मैं हिंदू हूं कि मुसलमान कि ईसाई? मुझे मेरे माता-पिता से धर्म, जाति और मेरा टाइटल प्राप्त हुआ है.

आप किस धर्म में आस्था रखती हैं?

मैं सभी धर्मों से प्रेम करती हूं. मैं सभी त्योहारों में शामिल होती हूं, दुर्गापूजा, ईद की नमाज और क्रिसमस की मध्यरात्रि के कार्यक्रम, सिखों के कार्यक्रम, छठ पूजा, बौद्धों के कार्यक्रम और दीवाली...और क्यों नहीं होऊं? पर्व-त्योहार सबके लिए होते हैं.

लेकिन संघ आप पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाता है?

उनके हिसाब से मुझे क्या करना चाहिए? क्या उनकी तरह हो जाऊं और लोगों की जान लेना शुरू कर देनी चाहिए? बंगाल देश के सर्वाधिक मुसलमान आबादी के घनत्व वाले प्रदेशों में से एक है. यहां 27 फीसदी से अधिक मुसलमान हैं.

आपको क्या लगता है कि वे मेरे लिए वोट नहीं कर रहे हैं? आपको क्या लगता है ईसाई, आदिवासी, दलित हिंदू आदि मुझे वोट नहीं देते? क्या मुझे भाजपा को यह बताने की जरूरत है कि मैं कौन हूं, मेरे माता-पिता कौन हैं, मेरा जन्म कहां हुआ, मेरी जाति क्या है? बंगाल में भेदभाव की प्रवृत्ति नहीं रही है.

गोरक्षा अभियानों और गाय के मांस पर प्रतिबंध को लेकर आपका क्या मत है?

हम किसी भी आतंकी संगठन का समर्थन नहीं करते, चाहे आइएसआइएस हो या आरएसएस के उग्रवादी. मैं (आरएसएस के) कुछ लोगों का सम्मान करती हूं पर मैं उनका समर्थन नहीं कर सकती जो राम के नाम पर आतंक मचा रहे हैं.

यह धर्म नहीं है. खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि वे हमारे हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं. हमारे देवी-देवताओं ने हमें यह सब कभी नहीं सिखाया. स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, रवींद्रनाथ टैगोर और सभी देवताओं ने हमें सबसे प्रेम करने और शांतिपूर्वक रहने की सीख दी है.

हिंदू धर्म को लेकर आपकी क्या धारणा है?

स्वामी विवेकानंद ने धर्म की सार्वभौमिकता के बारे में कहा था. आप अपनी उग्रवादी गतिविधियों और नफरत की राजनीति से देश को बांट नहीं सकते. आप हिंदुओं की छवि खराब कर रहे हैं. हिंदू इससे कहीं बड़े हैं, वे बड़े उदार हैं. मैं एक उदार हिंदू हूं, उग्रवादी नहीं.  

आपने आरएसएस और आइएसआइएस को एक ही तराजू से तौल दिया.

मैं आरएसएस के कुछ लोगों का बड़ा सम्मान करती हूं. पर मैं उनका सम्मान नहीं करती जो लोगों को मार रहे हैं, भीड़ की शक्ल में हमले कर रहे हैं और जो झूठी अफवाहें फैला रहे हैं. वे अल्पसंख्यकों और यहां तक कि दलित हिंदुओं को भी प्रताड़ित कर रहे हैं. वे खुद को ईश्वर से भी ऊपर मानने लगे हैं.

आप जिन लोगों का सम्मान करती हैं उनमें से प्रणब मुखर्जी भी एक हैं. वह भी हाल में आरएसएस मुख्यालय होकर आए हैं.

कृपया मुझसे इसके बारे में मत पूछिए, मैं वाकई बहुत दुखी हूं.

अगर आरएसएस अपने कैडरों को संबोधित करने का न्योता आपको भी दे, तो क्या आप जाएंगी?

अगर वे भाजपा से खुद को अलग कर लें और कहें कि वे अब देश की एकता और अखंडता के लिए काम करेंगे तो मैं इस पर विचार करूंगी. उससे पहले तो कतई नहीं.

जब पार्टी में नेतृत्व का प्रश्न आता है तो टीएमसी में बस एक ही नेता हैं और वह आप हैं. नेतृत्व की दूसरी पंक्ति कहां है?

किस पार्टी में एक नेता नहीं है? भाजपा में प्रधानमंत्री मोदीजी नेता हैं. कांग्रेस में सोनिया गांधी थीं, आज कोई और पार्टी का अध्यक्ष बन गया है. एनसीपी में शरद पवार हैं, द्रमुक में स्टालिन हैं, मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश अपनी पार्टी के नेता हैं और बसपा में मायावती.

जहां तक मेरी पार्टी की बात है, मैं तब तक पार्टी की अध्यक्ष रहूंगी जब तक जनता का मेरे ऊपर भरोसा रहेगा. हमारे पास नेतृत्व की दूसरी, तीसरी और चौथी पीढ़ी भी है. यह किसी एक व्यक्ति की पार्टी नहीं है बल्कि यह बहुत से लोगों का साझा प्रयास है.

वंशवादी राजनीति को लेकर आपकी क्या राय है?

अगर लोग शुरू से राजनीति में हैं, अगर उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किए हैं तो कुछ गलत नहीं है. लेकिन वे अभी-अभी आए हों और प्रधानमंत्री बनने का ही ख्वाब पालने लगे हों तब तो बात और है.

हर कोई कहता है कि आपके भतीजे (अभिषेक बनर्जी) पार्टी में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

इस तरह के सवालों का जवाब देने से मुझे चिढ़ है. वह तृणमूल के 47 सांसदों की तरह बस एक सांसद है. हमारे परिवार से बस एक शक्चस ने राजनीति में कदम रखा है. मैं चाहती हूं कि हर युवा राजनीति में रुचि ले और इसमें शामिल हो.

आप युवाओं को तैयार नहीं करेंगे तो फिर आगे चलकर नेतृत्व कौन करेगा? आपको युवा पीढ़ी को तैयार करना ही होगा. मैंने पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों को कहा है कि अपने बेटे-बेटियों, रिश्तेदारों को राजनीति में सक्रिय करें. राजनीति एक मुश्किल क्षेत्र है.

जो बहुत समर्पित, प्रतिभावान या दृढ़ निश्चय वाला है, लोगों के लिए काम करने की इच्छा रखता हो, मैं चाहती हूं कि ऐसे लोग मेरे साथ जुड़ें. जो बहुत स्वार्थी हैं और सिर्फ पैसे कमाने के लिए राजनीति में आना चाहते हैं, मैं उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती.

आखिर में, आपका सलाहकार कौन है? आपको किस चीज से प्रेरणा मिलती है?

आम जनता मेरी सलाहकार है और मेरे संघर्ष से मुझे प्रेरणा मिलती है. मेरे माता-पिता किसी समृद्ध परिवार से ताल्लुक नहीं रखते थे, वे सामान्य परिवार से थे. वे मुझे अंग्रेजी शिक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं थे, पर उन्होंने हमें जिंदगी के अच्छे सबक दिए.

एकता, अखंडता, सबके साथ प्रेमभाव रखना, सबका ख्याल रखना, सबके लिए आवाज उठाना, एकजुटता बनाए रखना, किसी से नफरत न करना, यह सब उन्होंने बचपन से ही सिखाया. पहले एक अच्छा इनसान बनना जरूरी है राजनीति उसके बाद आती है. आज आप जो भी हैं वह इस पर निर्भर करता है कि आपकी शुरुआत कैसी हुई थी.

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