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शहरी विकास-आनंद नगर

हालांकि सरकार का स्मार्ट शहरों के निर्माण का कार्यक्रम सुस्ती से चल रहा है, लेकिन कुल मिलाकर मोदी सरकार शहरी नवीनीकरण के काम आगे बढ़ाने में सफल रही है.

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aajtak.in
कौशिक डेका/ संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 18 April 2019
शहरी विकास-आनंद नगर भविष्य के शहर भोपाल में स्मार्ट सिटी का इंटीग्रेटेड कंट्रोल और कमांड सेंटर

नरेंद्र मोदी सरकार में शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े किसी भी काम को आगे बढ़ाने वाली असल ताकत 'प्रतिस्पर्धा' दिखाई देती है. स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और खुले में शौच रोकने के प्रयासों के लिए रैंकिंग और ग्रेड देने के साथ केंद्रीय आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय शहरों और राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने की कोशिश में सबसे आगे रहा है. विभिन्न शहरों के बीच देश के टॉप-10 साफ-सुथरे शहरों की लिस्ट में शुमार होने के लिए होड़ लगी है.

वहीं राज्य खुले में शौच मुक्त राज्य का टैग हासिल करने के लिए जोर लगा रहे हैं. इन प्रतियोगिताओं के लिए स्मार्ट सिटीज मिशन, अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत), स्वच्छ भारत अभियान, विरासत शहर विकास और विस्तार योजना (हृदय) और प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाइ-यू) जैसी आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की योजनाएं मुख्य मंच सजाती हैं.

हालांकि 2015 में शुरू स्मार्ट सिटीज मिशन को धरातल पर उतारने में लंबा समय लगा लेकिन सरकार का दावा है कि यह जल्द ही अन्य कार्यक्रमों की तरह 'प्रभावशाली' नंबर हासिल कर लेगा. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी जोर देकर कहते हैं कि ये उपलब्धियां केवल कागजों पर नहीं हैं बल्कि इन्हें धरातल पर देखा जा सकता है. पुरी ने कहा, ''हर सामुदायिक शौचालय या बनाए गए हर घर को जियो-टैग किया गया है.

कोई भी जाकर जांच कर सकता है. स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के युग में पारदर्शिता ही एकमात्र तरीका है जिसके साथ हम आगे बढ़ सकते हैं." विपक्ष के आरोप कि मोदी सरकार नौकरियों का सृजन करने में विफल रही, को चुनौती देते हुए पुरी दावा करते हैं कि पीएमएवाइ-यू के तहत हुए निर्माण कार्य से अब तक देशभर में 19 लाख नई नौकरियां सृजित हुई हैं.

स्वतंत्र पर्यवेक्षक इस से सहमति जताते हैं कि शहरी विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं. जनाग्रह सेंटर फॉर सिटिजनशिप ऐंड डेमोक्रेसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत विश्वनाथन कहते हैं, ''सरकार ने शहरों के कायाकल्प से जुड़े निर्णायक स्तरों को बढ़ाया है और लक्ष्य पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास भी किए हैं. सरकार ने अपने हर प्रयास के साथ कुछ महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं."

हालांकि स्मार्ट सिटी के तहत परियोजनाओं की गति और धरातल पर काम की प्रगति वांछित स्तर से काफी पीछे रह गई है. फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि मिशन ने प्रतिस्पर्धी मॉडल के जरिए शहरों और उनके हितधारकों के बीच इस सोच को विकसित करने में कामयाबी हासिल की है कि 21वीं सदी के एक शहर के लिए क्या किया जाना चाहिए और इसके मानक पैमाने को ऊपर उठाया है. शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी में ज्यादा से ज्यादा रुचि बढ़ाई है और म्युनिसिपल बॉंन्ड के जरिए संसाधनों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता दिखाया है. विश्वनाथन कहते हैं, ''केंद्र की बजाय हमें परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारों और नगरपालिकाओं को जवाबदेह बनाना चाहिए."

लेकिन शहरी योजनाकार केंद्र सरकार को जिस बात के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं वह है शहरी स्थानीय निकायों की शासन संरचना में हुआ नगण्य सुधार. सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के वरिष्ठ सहयोगी पार्थ मुखोपाध्याय कहते हैं, ''जब तक शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त स्थानीय सरकार नहीं बनाया जाता, तब तक शहरी परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो सकता."

वे स्मार्ट सिटीज मिशन में सुस्ती के लिए शहरी स्थानीय निकायों में शासन की अस्पष्टता को जिम्मेदार ठहराते हैं. वे कहते हैं, ''निर्वाचित स्थानीय सरकार की बजाय विशेष उद्देश्य बल (एसपीवी) के जरिए स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यान्वयन का प्रयास शहरी स्थानीय निकायों को और कमजोर करता है. व्यवहार में इसने जमीनी स्तर पर काफी तनाव पैदा किया है जिसने कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न की. कई एसपीवी राज्य सरकार के नौकरशाहों की अतिरिक्त जिम्मेदारी हैं जो उनकी प्रभावशीलता को कम करता है और एसपीवी के प्रबंधन के लिए बाहर से विशेषज्ञता लाने की संभावनाओं में बाधक है."

 हालांकि शहर के प्रशासन में सुधार की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, लेकिन विश्वनाथन का कहना है कि केंद्र उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकता है.

पुरी नेशनल अर्बन पॉलिसी फ्रेमवर्क (एनयूपीएफ) 2018 के मसौदे को उस दिशा में एक अहम कदम बताते है. वे कहते हैं, ''हमारे पास शहरी नीति का कोई ढांचा मौजूद नहीं था क्योंकि जमीन राज्य का विषय है. केंद्र केवल इस विषय पर नीतियां बनाने में राज्यों की सहायता करता है.

एनयूपीएफ का मसौदा 10 ऐसे क्षेत्रों में काम करता है जिससे शहरी निकाय और नगरपालिका प्रबंधक, अपने क्षेत्र की मूल समस्याओं और उनके विषय आधारित समाधानों पर सोचने के अभ्यस्त बन जाएं."

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