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लाल दुर्ग की कठिन चुनौती

राज्य में पहली बार एक त्रिकोणीय मुकाबला दिख सकता है जहां भाजपा भी मुट्ठीभर सीटों पर चुनौती दे रही होगी.

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जीमोन जैकबनई दिल्ली, 11 April 2019
लाल दुर्ग की कठिन चुनौती पिनाराई विजयन

राज्य में हो रही चुनावी बहसों का मुद्दा इस बार यह है कि क्या वामदल देश का अपना आखिरी गढ़ बचा पाएंगे और क्या भाजपा सबरीमाला मुद्दे पर मतदाताओं के बीच इतना ध्रुवीकरण करने में कामयाब रही है कि आखिरकार वह भी इस राज्य में कुछ सीटों पर ही सही, लेकिन मुकाबले में खड़ी नजर आए. अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणा की कि वे राज्य की पहाड़ी सीट वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगे. इसके बाद भाजपा और वामपंथी दलों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई लेकिन जल्द ही उस बहस पर धूल जम गई और केरल वापस राजनैतिक दलों से बुनियादी सवाल पूछने लगा है.

अब तक सीपीआइ (एम) की अगुआई वाले एलडीएफ और कांग्रेस की अगुआई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच ही सीधी लड़ाई (2014 के लोकसभा चुनावों में एलडीएफ ने आठ सीटें और यूडीएफ ने 12 सीटें जीती थीं) होती थी लेकिन इस बार भाजपा अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है तो मुकाबले में तीसरा कोण भी खुलने की उम्मीद है.

हालांकि भाजपा कुछ ही निर्वाचन क्षेत्रों में चुनौती देती नजर आएगी फिर भी इतना स्पष्ट है कि वह दोनों ही मोर्चों के वोट बैंक में सेंध लगाने को तैयार है. एलडीएफ पिनाराई विजयन सरकार के सुशासन के रिकॉर्ड पर चुनाव जीतने की आस में है, जबकि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विरोध प्रदर्शनों और बाढ़ के बाद केरल के पुनर्निर्माण पर हुए विवादों से किनारा करने की कोशिश कर रहा है.

एलडीएफ ने 9 मार्च को उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए चुनाव अभियान शुरू कर दिया. विजयन, जो उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे, ने कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयूएमएल) के हाथ से सीटें झटकने के लिए उत्तरी केरल में लोकप्रिय अपने चार विधायकों को मैदान में उतारा है.

एलडीएफ ने प्रमुख एझावा समुदाय के साथ एससी/एसटी आरक्षित सीटों पर जीत के लिए हिंदू कार्ड भी खेला है. विधानसभा और उपचुनाव हारने के बाद यूडीएफ के पास खुद को पुनर्जीवित करने का एक और मौका होगा.

राहुल गांधी के केरल से चुनाव लडऩे से कांग्रेस कैडर का हौसला बढऩे की उम्मीद की जानी चाहिए. राज्य में भाजपा के लिए भी यह पांव जमाने या हमेशा के लिए उखड़ जाने जैसी स्थिति रहेगी.

भाजपा ने एझावा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली भारत धर्म जन सेना को पांच सीटें और केरल कांग्रेस (थॉमस) को एक सीट दी है. सामाजिक समीकरणों को साधते हुए नादर समुदाय की राजनैतिक इकाई, वैकुंठस्वामी धर्म प्रचारण सभा और नाडर सेवा सोसाइटी को भी साथ लिया है जो अब तक कांग्रेस की हमदर्द थी.

कयास हैं कि यह गठजोड़ तिरुवनंतपुरम सीट पर सबसे असरदार रह सकता है जिसे भाजपा ने 2014 में शशि थरूर (कांग्रेस) से लगभग छीन ही लिया था. इस बार तिरुवनंतपुरम से आरएसएस के दिग्गज नेता कुम्मनम राजशेखरन भाजपा की ओर से मैदान में उतरे हैं. भाजपा ने बाजी सही बिछाई है, लेकिन अगर सबरीमाला विवाद के बाद भी वह यह सीट जीतने में नाकाम रही, तो उसका भविष्य उज्जवल नहीं हो सकता.

सियासी सूरमा

पिनाराई विजयन ने वामदलों के चुनाव अभियान की कमान

संभाल रखी है और वे जमीनी रणनीति बना रहे हैं

राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति से पार्टी में गुटबाजी थम सकती है, कैडर एकजुट होकर चुनाव में उतर सकता है

पी.के. कुन्हालीकुट्टी आइयूएमएल के मुखिया राज्य के वोटरों को यूडीएफ के पक्ष में करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे

के. राजशेखरन भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को थरूर को चुनौती देने के लिए फिर से बुलाया गया है.

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