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कई किरदारों वाला एक शख्स

बेहिसाब ऊर्जा की वजह से हमेशा बेचैन, काम के प्रति उतावले और बावले, दमदार जोड़ी #दीपवीर के भड़कीले अर्धांग रणवीर सिंह गढ़ रहे हैं बॉलीवुड हीरो की नई परिभाषा

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सुहानी सिंह 23 January 2019
कई किरदारों वाला एक शख्स निखरता नायक

दश्य-1

दोपहर. नोवोटेल मुंबई, जुहू बीच

रणबीर सिंह कमरे में आराम से टहलते हुए नहीं आते, बल्कि इस अंदाज में आते हैं जैसे स्टेज पर एंट्री ले रहे हों, शायद हाथ में पोर्टेबल स्पीकर लेकर नाचते हुए. यह उनका अपना खास अंदाज है. अपनी पहली फिल्म बैंड बाजा बारात (2010) के निर्देशक मनीश शर्मा से पहली मुलाकात के दौरान रणवीर 'माई नेम इज लखन' गाने पर डांस करते हुए आए थे. दिसंबर में एक टीवी शो के लिए राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना, विक्की कौशल और पंकज त्रिपाठी के साथ राउंडटेबल के लिए बैठने से पहले, रात के 1 बजे फिर इसी तरह नाचते गाते पहुंचे थे. इंडिया टुडे के साथ शूट के लिए जब रणवीर आए तो अपनी हालिया सुपरहिट फिल्म सिम्बा के गाने 'आंख मारे' पर नाचते हुए पहुंचे. सिम्बा 200 करोड़ रु. कमाई का आंकड़ा पार करने वाली उनकी दूसरी फिल्म बन गई है. इससे पहले संजय लील भंसाली की विवादास्पद फिल्म पद्मावत (वह भी 2018 में ही) में भी अलाउद्दीन खिलजी के अपने किरदार से वे छा गए थे.

हिंदी सिनेमा के लिए 2018 मार्के का साल रहा है. लगभग दशक भर में पहली दफा खान तिकड़ी—आमिर, शाहरुख और सलमान—में कोई भी सबसे अधिक कमाऊ हिंदी फिल्म नहीं दे सका. इसका ताज रणवीर के सिर सजा, जो दो फिल्मों की 500 करोड़ रु. कमाई के साथ लगातार हिट होने वाले साल के सबसे भरोसेमंद सितारे कहलाए. 26 ब्रान्डों के विज्ञापन चेहरे, सुर्खियों में छाई #दीपवीर दंपती के अर्धांग 84.7 करोड़ रु. की कमाई के साथ 2018 में फोब्र्स इंडिया सेलेब्रिटी 100 फेहरिस्त के आला 10 में शुमार होने वाले सबसे युवा ऐक्टर भी हैं.

तिस पर रणवीर की तो यह इब्तिदा है. 14 फरवरी को रिलीज हो रही अगली फिल्म गली बॉय का वल्र्ड प्रीमियर बर्लिन महोत्सव में होगा, जिसमें वे मुंबई की झोंपड़पट्टी के रैपर मुराद का किरदार निभा रहे हैं. उसके बाद फिल्म 83 के लिए कपिल देव के बॉलिंग ऐक्शन का अभ्यास कर रहे हैं, जो वल्र्ड कप जीतने का ऐतिहासिक कथानक है. साल के अंत में वे इतिहास पर आधारित एक और फिल्म तख्त में मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे दारा शिकोह की भूमिका में दिखेंगे.

करीब डेढ़ घंटे के शूट में कुछ भी साफ नहीं लगता है. गाने बदलते रहते हैं, मूड के मुताबिक पहले इमिनेम, फिर मुंबई का रैपर इमिवे बैंटे, डिवाइन ऐंड नेजी....बस एक ही बात नहीं बदलती, वह है रणवीर की 'ट्रेडमार्क बेहिसाब ऊर्जा'.

इस ऊर्जा को कोर्ई दूसरा निर्देशक भंसाली जैसी कामयाबी से नहीं भुना पाया. गोलियों की रासलीला..राम-लीला (2013) और बाजीराव मस्तानी (2015) के अपने हीरो के बारे में भंसाली कहते हैं, ''(यह ऊर्जा) लाजवाब है और यही उसे दूसरों से अलग करती है. भंसाली के साथ अपने काम को रणवीर कितनी अहमियत देते हैं, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि उन्होंने फिल्म सीटी में फिल्म के सेट से करीब रहने के लिए मुंबई के उपनगर गोरेगांव में एक मकान ही खरीद लिया. खिलजी के किरदार में पूरी तरह रच-बस जाने के लिए तीन हफ्ते तक वहीं अपने को बंद रखा. वे कहते हैं, ''मैं अगर कोई जुनूनी किरदार निभा रहा हूं तो मैं जब-तब अंदर-बाहर नहीं कर सकता. मुझे पूरे वक्त उसी मूड को बनाए रखना होगा.''

फिल्म के बेहद मशहूर गीत बिनते दिल में अलसाई आंखों के साथ रणवीर खुले बदन बाथटब में हैं, भंसाली ने उनसे कहा था कि जिम मॉरिसन और जीनत अमान जैसे भाव आंखों में उतार लाओ. भंसाली कहते हैं, ''उसने जैसे उसे समझा और ऐसे उसमें रम गया कि मैं देखकर दंग रह गया.''

रणवीर के लिए, सिर्फ प्रतिभा ही काफी नहीं है, उसके साथ कड़ी मेहनत भी जरूरी है. वे फुटबॉल के दीवाने हैं, सो, मशहूर फुटबॉल मैनेजर एलेक्स फर्गुसन का उद्धरण देने से अपने को रोक नहीं पाते, ''जब स्वाभाविक प्रतिभा आड़े वक्त में नाकाफी साबित होती है तो कड़ी मेहनत उसकी भरपाई कर देती है.'' इसमें रणवीर अपनी भी दो बातें जोड़ देते हैं: ''अगर आप अमल में नहीं ला सकते तो आपकी काबिलियत का कोई मोल नहीं है.

अलग-अलग तेवरों, अंदाज और हावभाव वाले चरित्र को साकार करने की प्रक्रिया में मुझे मजा आता है. वक्त और माहौल मिले तो मैं ऐसा और भी करना चाहूंगा.'' उनका यह जज्बा उन फिल्मकारों को भी आकर्षित करने लगा है जिनके साथ एक न एक दिन काम करने की चाहत वे रखते हैं.

दृश्य 2

रात, रणवीर का वैनिटी वैन, महबूब स्टूडियो

रणवीर आराम फरमा रहे हैं. हर वक्त तेज हरकत में रहने वाले शख्स को ऐसे बमुश्किल ही देखा जाता है. वैन में मामूली साज-सज्जा ही है, बस सिम्बा का एक पोस्टर और एक सफेद बोर्ड टंगा है, जिस पर उनकी जिंदगी का मंत्र चस्पां है, ''सिर्फ अच्छे भाव रखो, हमेशा आशावान रहो, विनम्र बनो, कड़ी मेहनत करो, अहंकार से दूर रहो.'' वे सिम्बा के आखिरी गीत 'मेरा वाला डांस' की शूटिंग कर रहे हैं, जिसकी कोरियोग्राफी गणेश आचार्य ने की है. आचार्य ही उनके दूसरे हिट 'टट्टड टट्टड्' और 'मल्हारी' के भी कोरियोग्राफर हैं. रणवीर हमें बताते हैं, ''मैं अपनी ऊर्जा बटोर रहा हूं. अनिल कपूर ने दिल धड़कने दो के दौरान मुझे यही सिखाया था.''

लुटेरा में रणवीर के निर्देशक विक्रमादित्य मोटवाणी उन्हें अनिल कपूर और गोविंदा का मानस-पुत्र कहते हैं. लुटेरा बॉक्स ऑफिस पर तो पिट गई थी मगर उसमें एक ऐसे चोर की अदाकारी में रणवीर की अभिनय क्षमता खूब खिली है जिसका हृदय परिवर्तन हो जाता है. रणवीर दरअसल अमिताभ बच्चन के साथ गोविंदा और अनिल कपूर की ही नकल करते बड़े हुए हैं. उनके लिए गोविंदा ''मुकम्मल अदाकार्य' हैं. रणवीर कहते हैं, ''चाहे भावुक अभिनय हो, या कॉमेडी या फिर डांस, वे प्रतिभा के मामले में सब पर भारी हैं.'' उन्हें अनिल कपूर की 'बेहद भावुक शख्सियत' से भी प्रेरणा मिलती है. रणवीर कहते हैं, ''वे हर फिल्म में पहली फिल्म की तरह उतरते हैं. वे किसी भी पल उसे हल्का मानकर नहीं चलते. कभी अति-आत्मविश्वास के शिकार नहीं होते. उनमें काम करने की गजब की भूख है और हमेशा बेहतर करना चाहते हैं. वे बस दिल से सोचते हैं. मैं भी वैसा ही होना चाहता हूं.''

शर्मा के मुताबिक तो वे वैसे ही हैं. बकौल लेखक-निर्देशक, ''वे अपना होमवर्क पूरा करने में यकीन करते हैं, जो किसी भी निर्देशक के लिए खुशी की बात है.'' वे हर दृश्य के लिए चरित्र का अंदाज और भाव-भंगिमा की अभ्यास कर लेते हैं. रणवीर अपने काम को लेकर काफी संजीदा हैं, हमेशा एक डायरी लिए रहते हैं जिसमें रंग-बिरंगी कलमों से नोट लेते रहते हैं. बैंड बाजा बारात के लिए बांद्रा के इस छोकरे ने दिल्ली का मिजाज जानने के लिए डीटीसी बस की सवारी की, जहां का पात्र बिट्टू शर्मा होता है.

एक ऐसे ही सफर के दौरान वे किरोड़ी मल कॉलेज की एक क्लास में गए और फिर 20 लड़कों के साथ लॉन में अड्डेबाजी कर आए. उन्होंने 2013 में इंडिया टुडे से बातचीत में कहा था, ''कई ऐक्टर पूरी तरह स्वतरूस्फूर्त अदाकरी में यकीन करते हैं. मुझे लगता है कि कुछ घबराहट से मुझमें अभ्यास करने का कीड़ा पैदा हो गया. अभ्यास में खास कामयाबी नहीं मिली तो भी भरोसा रहता है कि मैंने कर लिया है.''

शुरुआत में जमकर अभ्यास और तैयारी भी रणवीर के लिए रोड़ा बनी, खासकर जब उनकी समझ निर्देशक की राय से मेल न खाई हो. शर्मा कहते हैं, ''उसके लिए अलग अंदाज में पेश आना कई बार मुश्किल हो जाता है.'' वे फिल्म के क्लामैक्स दृश्य की शूटिंग की मिसाल देते हैं जब उनसे कहा गया कि 'ऐसा नहीं चलेगा' और 'थोड़ा ईमानदार बनो.'' फिर शूटिंग अगले दिन के लिए टाल देनी पड़ी. रणवीर के मुताबिक, शर्मा और मोटवाणी के साथ भंसाली के निर्देशन की खास मांग की वजह से ही उनका रवैया कुछ कम अडिय़ल हो गया.

33 वर्षीय रणवीर उस नई पीढ़ी के ऐक्टरों में हैं जिसमें रणबीर कपूर, राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना, वरुण धवन और टाइगर श्रॉफ शुमार हैं. तख्त फिल्म में उनके निर्देशक करण जौहर अपने चैट शो कॉफी विद करण में अपने सेलेब्रिटी मेहमान से रैपिडफायर दौर में पूछते हैं: रणबीर या रणवीर, कौन बेहतर ऐक्टर है? इसका जवाब अभी तक मोटे तौर पर रणबीर के हक में जाता है मगर रणवीर अपनी मौजूदगी और अलग-अलग भूमिकाओं को मंजूर करके धीरे-धीरे इस दौड़ में आगे निकल रहे हैं.

कुछ बॉलीवुड सितारों के साथ काम करने वाले प्रमुख जनसंपर्क फर्म के सह-संस्थापक प्रभात चौधरी कहते हैं, ''प्रतिभा और अदाकारी के ट्रैक रिकॉर्ड में वे कमोबेश एक समान हैं. फर्क दोनों के रवैए और कुछ नया करने की भूख में है. कोई अगर यह मानता है कि आप काम करते जाओ और हालात अपने-आप अनुकूल हो जाएंगे तो यह बहुत ही मासूम सोच है.

यह एहसास होना चाहिए कि मार्केटिंग और संचार भी आपके काम का हिस्सा है. एक मायने में आज दांव ऊंचे हैं और स्टारडम का पूरा तौर-तरीका ही बदल गया है. रणवीर लीक तोड़कर यथास्थिति को चुनौती देते हैं.''

रणबीर 'लड़के' की भूमिका में ही व्यस्त हैं, टाइगर ऐक्शन हीरो की तईं ही उलझे हुए हैं और वरुण तो ऐसी फिल्में ही ले रहे हैं जिनसे वे बता सकें कि वे अगले सलमान खान हैं, लेकिन रणवीर ने खुद को किसी खास ढांचे में ढलने नहीं दिया है. मोटवाणी कहते हैं, ''वे गोविंदा से लेकर रेयान गोसलिंग जैसा सब कुछ कर सकते हैं.

वे लगातार अपनी लीक तोड़ रहे हैं. मैं यह देखने को आतुर रहता हूं कि वे हर फिल्म में क्या सामने लेकर आते हैं. उनमें लोगों को सिनेमा हॉल तक खींच लाने का आकर्षण है.''

रणवीर के लिए सिनेमा ही जीना-मरना है. वे 'मसाला फिल्मों' का ही मजा लेकर बड़े हुए हैं. उन्होंने 2015 में नई दिल्ली में इंडिया टुडे कॉनक्लेव अपने मजेदार प्रदर्शन के दौरान कहा, ''मैं बॉलीवुड का ऐसा कीड़ा हूं कि मैं सोचता था कि वास्तव की ही नकल है स्कारफेस.'' सिम्बा की बलात्कार प्रतिशोध की पटकथा '80 के दशक के खलनायकों की ही याद दिलाती है मगर रणवीर उसमें ऐसी कहानी देखते हैं जो अदाकारी में उनका दायरा बढ़ा देगी. बॉक्स ऑफिस पर कमाई भी उनकी बात को पुष्ट करती है. उनके लिए ऐक्टर और हीरो का फर्क मिट जाता है. वे कहते हैं, ''फिलहाल मेरा फोकस ऐसे फिल्मों का हिस्सा होना है जो 'बड़े अनुभव का संसार' खोलती हैं और दर्शकों के बड़े वर्ग को लुभाती हैं.''

दृश्य 3

शाम, यशराज फिल्म्स स्टूडियो

रणवीर बैठना नहीं चाहते. वे स्टूडियो में चहलकदमी की पेशकश करते हैं, जिससे साढ़े तीन साल के 'संघर्ष' से थोड़ी राहत मिले. इसमें किसी पोर्टफोलियो की आस में प्रोडक्शन हाउसों के बाहर छह घंटे तक बैठे रहना और कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा के फोन से चुराए नंबरों पर बैरंग कॉल करना शामिल है. शर्मा ने उन्हें फिल्मकार शाद अली के घर पार्टी में एक शो करते देखा था. तब रणवीर 16 साल के थे. इस अफवाह से वे आज भी झेंप जाते हैं कि ''यशराज फिल्म में आने के लिए उन्होंने दाम दिए थे.'' वे कहते हैं, ''मुझे फेसबुक मैसेज मिले कि मेरे पास काफी पैसा है, बताओ मैं उनका क्या करूं. यह मेरी उपलब्धियों की चमक फीकी कर देते हैं.'' उपलब्धि है बॉलीवुड में शाहरुख खान और अक्षय कुमार जैसे कुछ बाहरियों में शुमार होने की.

कारोबारी जगजीत सिंह भंबाणी और उनकी पत्नी अंजू के बेटे की परवरिश मुंबई के लकदक इलाके पाली हिल में हुई है. रणवीर अपने स्कूल लर्नर्स एकेडमी के 'नौटंकी' हुआ करते थे. वहां उनके दोस्तों में फोटोग्राफर रोहन श्रेष्ठ भी थे. रोहन याद करते हैं कि वह हर वक्त जोश में हुआ करता था और नाटकों में अग्रणी भूमिका निभाया करता था. रणवीर ने 2013 में इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, ''मैं खेल-कूद में अच्छा नहीं था इसलिए वे मुझसे हर किसी की नकल करने को कहा करते थे. मुझे लोगों का मनोरंजन करने में मजा आता था.'' यही हाल घर में भी था. वे याद करते हैं कि उनकी दादी ने एक बोरिंग बर्थडे पार्टी में रंग भर देने को कहा. रणवीर 'जुम्मा चुम्मा दे दे' पर नाचे थे. दादी ने ही वीएचएस टेप के जरिए हिंदी फिल्मों के प्रति उनमें जुनून पैदा किया था.

लेकिन बॉलीवुड में किसी तरह का तगड़ा संपर्क न होने से फिल्मी करियर दूर की कौड़ी लगता था. एचआर कॉलेज में दो साल की पढ़ाई के बाद रणवीर इंडियाना यूनिवॢसटी में क्रिएटिव राइटिंग में डिग्री के लिए अमेरिका चले गए. लेकिन एक वीडियो रेंटल लाइब्रेरी में घंटों बिताने से सिनेमा का उनका प्यार बढ़ता ही गया. उनसे वहीं रुकने और एक एडवर्टाइजिंग फर्म में काम करने को कहा गया. लेकिन रणवीर अपने बचपन का सपना साकार करने लौट आए.

उस वक्त पिता के कारोबार में मंदी की वजह से उनका परिवार पैसे की किल्लत झेल रहा था. रणवीर कहते हैं, ''मगर मुझे उसका एहसास कभी नहीं होने दिया गया.'' उन्होंने विज्ञापन फिल्मों में शाद अली (साथिया) की मदद की और उस दौरान ऐक्टर बनने की चाह रखने वाला जो कुछ करता है, वह सब कुछ किया—मसलन, बॉडी बनाना, ऐक्टिंग सीखना और पोर्टफोलियो शूट करना.

हालांकि रणवीर के मामले में फर्क सिर्फ यह था कि ''वह रद्दी की टोकरी में फेंका नहीं जा सका.'' उन्होंने उसे ऐसे शूट किया था जो विभिन्न स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग मूड दिखाता था. जल्दी ही बैंड बाजा बारात के लिए उनके ऑडिशन ने शर्मा का ध्यान खींचा और उन्होंने आदित्य चोपड़ा को उनकी प्रतिभा का कायल कर दिया.

पहले कुछ साल मुश्किल भरे थे, जब रणवीर बुरी तरह हाथ-पैर मार रहे थे. वे कहते हैं, ''एक मौके पर तो वह बहुत भारी पड़ रहा था.'' ऐसे उद्योग में जहां तरह-तरह की भंगिमाएं दिखाना जरूरी है, रणवीर कुछ अलग थे. शायद कुछ ज्यादा ही सच्चे. वे कहते हैं, ''मैंने कभी मुखौटे नहीं पहने. ज्यादातर लड़कों की तरह मुझे भी यकीन दिला दिया गया था कि अपनी भावनाएं जाहिर करना कमजोरी की निशानी है. लेकिन मेरे मामले में यह नहीं चलता है. मैं खुलकर अपनी बात कहता हूं और कई बार गड़बड़ भी हो जाती है.'' इससे खास मदद नहीं मिली कि वे ऐसे कपड़े पहनते हैं जो बॉलीवुड का कोई स्टार पहनने की जुर्रत नहीं करता.

बदन से चिपके आदमी की तरह दिखने वाले टी-शर्ट सलमान की स्टाइल है मगर रणवीर तो जैसे हैं, वैसे ही दिखने में यकीन करते हैं. वे अपनी मेहंदी समारोह में गुलाबी अंगरखा ओढ़ सकते हैं, एक मौके पर घाघरा भी पहन लेते हैं और ऑस्ट्रेलिया में ऋषभ पंत की तरह भड़कीले और रंग-बिरंगे कपड़े वैसे ही चैन से पहन सकते हैं. रणवीर की पसंद बॉलीवुड में किसी हीरो की परंपरागत शैली को चुनौती देती है. वे कहते हैं, ''मेरा एक स्त्रैण पक्ष भी है और मैं उसे जाहिर करने से झिझकता नहीं हूं. मैं स्त्रियों के बीच में ही पला-बढ़ा हूं.'' वे कहते हैं कि उनकी बड़ी बहन रीतिका उनकी 'दूसरी मां' की तरह हैं.

रणवीर को बतौर ऐक्टर अभी तक बॉलीवुड हीरो की परंपरागत मर्दाना छवि ओढऩे की दरकार नहीं पड़ी है. बेफिक्रे का धरम अपने नंगे बदन से लड़कियों को छेड़ता है, राम-लीला में उनका राम अपनी केढिया उतारकर गुजराती लड़कियों का ध्यान खींचने के लिए तेल में चुपड़ा बदन दिखाता है, सिम्बा में उनका किरदार बहादुरी तो बहुत दिखाता है मगर अपनी चहेती लड़की से प्यार का इजहार करने में शर्माता है. अशोका यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर स्टडीज इन जेंडर ऐंड सेक्सुऑलिटी की निदेशक माधवी मेनन का क्चयाल है कि रणवीर ने खासकर भंसाली की फिल्मों में जो ''कामोद्दीपक भूमिकाएं निभाई हैं, उससे उनकी मर्दाना छवि कमतर नहीं बनती. इसके बदले मर्दाना छवि समलैंकिता और द्वैलैंगिककता से कुछ कमतर दिखती है. बतौर ऐक्टर उनकी बड़ी उपलब्धि यही एहसास दिलाना है कि मर्दाना छवि का हमेशा प्रदर्शन करना और हमेशा एक जैसा रखने की जरूरत नहीं है. इसके बदले वे (और भंसाली भी) सेक्सुएलिटी को वह ताकत देते हैं जो उसके बने-बनाए ढांचे को तोड़ दे. उनके साथ सेक्सुएलिटी सहज और असहज दोनों रूपों में सामने आती है.''

दृश्य 4

दोपहर, नोवोटेल मुंबई, जुहू बीच पर वापस

दीपिका पादुकोण का कॉल है. फेसटाइम पर वे कहती हैं, ''ही, बेबी, तुम खूबसूरत लग रहे हो!'' रणवीर अपनी पत्नी के बारे में उसी जुनून से बातें करते हैं, जैसे सिनेमा के बारे में. सुनील ग्रोवर के टीवी शो कानपुर के खुरानाज में वे दर्शकों को बताते हैं, ''बहुत मेहनत करनी पड़ी्य्य—नवंबर 2018 में दीपिका के साथ शादी करने के पहले छह साल तक. 2012 में राम-लीला के सेट पर शुरू होने के छह महीने बाद रणवीर को यह एहसास हुआ कि वही उनकी हमदम है. वे कहते हैं, ''मुझे पूरा यकीन है कि वह मुझसे काफी परिपक्व और संपूर्ण शख्सियत की मालकिन है. वह अधिक जिम्मेदार और स्वतंत्र विचारों की है. दुनियादारी में वह मुझसे बहुत आगे है. ''एक ब्रेकअप से टूटीं दीपिका को पूरी तरह हां कहने में देर लगी. जब वे अवसाद में थीं और हॉलीवुड में करियर की तलाश में थीं तब भी दोनों की जोड़ी अटूट बनी रही. शादी के बाद एक फिल्म पत्रिका से पहली बातचीत में दीपिका ने कहा, ''मुझमें उसके प्रति कभी अविश्वास नहीं पैदा हुआ. हम झगड़े, हमारे ऊंचे-नीचे दौर आए लेकिन हम एक दूसरे से जुड़े रहे. उसने मेरे शक-शुबहों, मेरी असुरक्षा भावना सभी में अपना धीरज बनाए रखा.'' रणवीर अब अपनी पत्नी की शोहरत और कामयाबियों की वजह से सुरक्षित हैं. वे राम-लीला की कामयाबी में उनकी भूमिका को श्रेय देते हैं.

रणवीर के लिए सबसे मुश्किल वन्न्त 2017 में आया जब पद्मावती की भूमिका के लिए कुछ दक्षिणपंथी ताकतों ने दीपिका को मार डालने की धमकी जारी की. रणवीर कहते हैं, ''वह बहुत ही हताश करने वाला दौर था क्योंकि आप कुछ बोल नहीं पाते और वह आपके भीतर सुलगता रहता है. मैं चाहता था कि अपनी बात का एक वीडियो जारी करूं लेकिन मेरे प्रोड्यूसरों की हिदायत रोक रही थी. आखिर पैसा दांव पर लगा था.''

अपनी परवरिश और बॉलीवुड में बाहरी की छवि के कारण उम्मीद है कि #दीपवीर का रिश्ता उसी तरह दीर्घायु होगा जैसे उनके अभिभावकों का है. रणवीर फिलहाल प्रभादेवी के अपार्टमेंट में रहते हैं, जो दीपिका का बरसों से घर है.  

दृश्य 5

शाम, पर्पल हेज स्टूडियो

सिम्बा के प्रमोशन के बीच रणवीर कुछ घंटे निकालकर बांद्रा के स्टूडियो में जोया अख्तर की फिल्म की डबिंग करते हैं. बाद में उसी शाम वे पद्मावत के लिए अपनी पहली ट्रॉफी हासिल करते हैं. जोया अपने 'गली बॉय' से बखूबी परिचित हैं. वे कहती हैं, ''बॉम्बे के स्लैंग उसकी जबान पर चढ़े हुए हैं और हर वक्त उसी बोली में बोलता है. वह हिप हॉप में रचा-बसा है जिसे आप उसके पहनावे में भी देख सकते हैं.'' रणवीर भी उस रोल के लिए कलाकार डिवाइन (विवियनभाऊ फर्नांडीस) की बातों पर गौर करते हैं. उसने बहुत सारी तुकबंदियां बनाई हैं जो फिल्म में गाई जाती हैं. रणवीर का दौर अब आ गया है और वे उसका खूब मजा ले रहे हैं.

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