एडवांस्ड सर्च

खिसकती जमीन

खरीदार लगातार कम होते गए और कंपनी के पास अपने दो हजार कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक के लिए धन नहीं बचा. अभिषेक तीन महीने तक बेरोजगार रहे और फिर 50,000 रुपए के साथ उन्होंने अपना डिजिटल मार्केटिंग व्यवसाय शुरू किया.

Advertisement
एम.जी. अरुण साथ में शुभम शंखधरनई दिल्ली, 24 May 2019
खिसकती जमीन अभिषेक कुमार

रियल एस्टेट क्षेत्र को जब नोटबंदी और माल व सेवा कर (जीएसटी) के रूप में दोहरे अवरोधों का सामना करना पड़ा तो यह क्षेत्र पहले ही मांग में गिरावट से जूझ रहा था. पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र को अवैध धन के इस्तेमाल के सुरक्षित ठिकाने के तौर पर माना जाता रहा है. लेकिन रियल एस्टेट (नियमन और विकास) विधेयक को लागू किए जाने के बाद इस क्षेत्र पर कड़ा शिकंजा है.

लेकिन इस क्षेत्र में कीमतों में गिरावट के बावजूद खरीदार बाजार में नहीं लौटे हैं, जिसके कारण देशभर में बड़ी तादाद में अनबिके मकान हैं. तिस पर इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आइएलऐंडएफएस) के डिफॉल्ट होने से भी रियल एस्टेट कंनियों को खासा झटका लगा है. लिहाजा, देश में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता—कुल 120 अरब डॉलर (तकरीबन आठ लाख करोड़ रु.) मूल्य का—रियल एस्टेट क्षेत्र लगातार दबाव में चल रहा है.

किस हद तक मंदी

4,40,000 आवास इकाइयां साल 2017 के अंत तक देश के सात प्रमुख शहरों में अनबिकी पड़ी थीं. इनमें से 1,50,000 से ज्यादा फ्लैट तो दिल्ली-एनसीआर में ही हैं जिन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं

बीते एक दशक में पहली बार, इस क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या की वृद्धि दर नकारात्मक रही है (2017-18 में -27 फीसदी)

2017-18 में टैक्स के बाद मुनाफा घटकर 4 फीसदी रह गया, जबकि उससे पिछले साल उसमें 49 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई थी. महज 2 फीसदी की वृद्धि के साथ बिक्री में खासी गिरावट आई है, 2013-14 में यह वृद्धि 20 प्रतिशत थी

भारतीय कंपनियों ने वित्त वर्ष 2019 की दिसंबर तिमाही में एक लाख करोड़ रु. की नई परियोजनाओं की घोषणा की, जो सितंबर तिमाही की तुलना में करीब 53 प्रतिशत कम है

कारण

सुस्त मांग के कारण इनवेंटरी का बैकलॉग खड़ा हो गया है

नोटबंदी ने निवेश में सुस्ती ला दी है

चौतरफा दबाव अर्थव्यवस्था में होने के कारण खरीदार इस समय खासी सावधानी बरत रहे हैं

सरकारी कोशिशें

और उनके नतीजे

कदमः रेरा को यूपीए की सरकार ने 2013 में पेश किया था और इसे 2016 में जाकर लागू किया गया.

प्रभावः खरीदार के धन का अन्य परियोजनाओं में इस्तेमाल करने से रोकने वाले प्रावधान कई सारे उपक्रमों की राह में अड़ंगा बन गए हैं

कदमः घरों की बिक्री से होने वाले लाभ को दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर से छूट दी गई

प्रभावः इस क्षेत्र को जरूरी तेजी देने में यह कदम नाकाफी साबित हुआ

अभिषेक कुमार, 33 वर्ष

नोएडा, उत्तर प्रदेश

अभिषेक बिहार में हाजीपुर से 2008 में नोएडा आए. वे मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से एमबीए कर चुके थे. बेटर ऑप्शन प्रोपमार्ट, कॉस्मिक ग्रुप और अंतरिक्ष ग्रुप जैसी रियल्टी कंपनियों के साथ मार्केटिंग स्ट्रेटेजिस्ट के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने ऑनलाइन रियल एस्टेट बाजार में स्टार्टअप डोरकीज के साथ काम शुरू किया. कई लोगों की ही तरह 2016 के रियल एस्टेट क्षेत्र के संकट ने उन पर भी असर डाला. अभिषेक कहते हैं, ''बाजार में एक बुलबुले जैसी स्थिति थी और यह दिन-ब-दिन खराब ही होती चली गई.'' खरीदार लगातार कम होते गए और कंपनी के पास अपने दो हजार कर्मचारियों की तनख्वाह देने तक के लिए धन नहीं बचा. अभिषेक तीन महीने तक बेरोजगार रहे और फिर 50,000 रुपए के साथ उन्होंने अपना डिजिटल मार्केटिंग व्यवसाय शुरू किया. वे 2016 में जितना कमाते थे, उनकी आमदनी उससे काफी कम हो गई है.

विशेषज्ञ की राय

''आम चुनावों से पहले का वक्त खरीदारों के लिए आम तौर पर अनुकूल होता है क्योंकि वे पैसे की तलाश में ज्यादा मकान बेचने की फिराक में लगे डेवलपर्स से सौदेबाजी कर सकते हैं.''

अनुज पुरी, चेयरमैन, अनारॉक प्रोपर्टी कंसल्टेंट्स

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay