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आवरण कथा-कानून के पहरुए

एनएलएसआइयू के कुलपति प्रो. एस.एन. वेंकट राव इसके शीर्ष पर होने का श्रेय तीन अनूठे पहलुओं को देते हैं, ''टीचिंग हो या सिलेबस, हम नवाचार पर जोर देते हैं, और समाज के लिए जरूरी थीम पर भी, जो हमारे जैसे देश के लिए आज की जरूरत हैं.

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अरविंद गौड़ानई दिल्ली, 24 May 2019
आवरण कथा-कानून के पहरुए समझ गए कुलपति वेंकट राव एनएलएसआइयू परिसर में छात्रों के साथ

कानून की पढ़ाई करने के इच्छुक किसी भी छात्र से पूछें कि उनका ड्रीम इंस्टीट्यूट कौन-सा है, तो हर कोई बेंगलूरू की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआइयू) का नाम लेगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि देश में कानूनी शिक्षा प्रणाली की नई इबारत लिखने वाला यह संस्थान आज भी इसके मानक तय कर रहा हैः नए-नए रुझान शुरू करके, चर्चित पूर्व छात्रों और कानूनी दिग्गजों को संकाय में लाकर और छात्रों के बीच स्वतंत्र सोच की संस्कृति को बढ़ावा देकर.

बैंगलोर यूनिवर्सिटी के नजदीक ज्यादातर प्राकृतिक जंगलों से आबाद 23 एकड़ के इलाके में फैली एनएलएसआइयू सरकार की सहायता से चल रहे उन विरले शैक्षणिक संस्थानों में से है जिन्होंने न केवल खास पहचान बनाई है बल्कि 30 साल के वजूद में अपना आला दर्जा बनाए रखा है. यह मिसाल बन चुकी है कि सरकार को देश में कानूनी शैक्षिक संस्थान किस तरह स्थापित करने चाहिए.

एनएलएसआइयू के कुलपति प्रो. एस.एन. वेंकट राव इसके शीर्ष पर होने का श्रेय तीन अनूठे पहलुओं को देते हैं, ''टीचिंग हो या सिलेबस, हम नवाचार पर जोर देते हैं, और समाज के लिए जरूरी थीम पर भी, जो हमारे जैसे देश के लिए आज की जरूरत हैं. तीसरे, हम न्यायोन्मुखी कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देते हैं.''

पढ़ाई के अलावा संस्थान दोपहर का कुछ समय प्रासंगिक विषयों पर चर्चा के लिए रखता है. हाल ही इसने मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटी स्टडी सेंटर की स्थापना की जो इसके सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन ऐंड इनक्लूसिव पॉलिसी का हिस्सा है.

इसने हाल में सेंटर फॉर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी रिसर्च ऐंड एडवोकैसी और इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ऐंड ईथिक्स इन मेडिसिन की स्थापना भी की है. राव कहते हैं, ''हमारे छात्र भारतीय समाज के लिए बेहद जरूरी विषयों पर और कानून बनाने में योगदान देने वाले मुद्दों और सुझावों पर चर्चा करते हैं.

युवा दिमागों को रौशन करने वाले उदार विचारों को बढ़ावा देने में हम दूसरे संस्थानों से बहुत आगे हैं.'' वाकई एनएलएसआइयू के छात्र मुद्दों पर अपने शिक्षकों को चुनौती देने के लिए भी कई बार खबरों में आए हैं, जिन्हें बेशक मेलजोल से सुलझा लिया गया.

छात्रों को यहां चुनाव सुधार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष कानून, प्रतिस्पर्धा कानून, स्वास्थ्य देखभाल और यहां तक कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावों सरीखे मुद्दों का गहराई से विश्लेषण करने के मौके मिलते हैं. सप्ताह के दिनों में दोपहर का समय समाज से सरोकार रखने वाले विषयों पर बहस के लिए तय है.

यहां संबंधित क्षेत्र के बेहद जहीन लोग आते हैं, जिनमें निजी, सरकारी और न्यायपालिका से जुड़े विद्वान शामिल हैं और उनमें से कुछ यहां गेस्ट टीचर भी हैं. विद्यार्थी खासकर परीक्षा के दौरान देर रात 1 बजे तक लाइब्रेरी की सुविधा का फायदा उठा सकते हैं.

बीए-एलएलबी (ऑनर्स) डिग्री प्रोग्राम में दाखिला खालिस योग्यताकृजो इसी मकसद से आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के जरिए आंकी जाती है—के दम पर मिलता है. हर साल सीएलएटी या फ्लैट के शीर्ष 500 सफल छात्र आम तौर पर इसे ही वरीयता देते हैं, पर टॉप 75 को ही दाखिला मिल पाता है. शिक्षण की पद्धतियों में व्याख्यान, चर्चाएं, केस स्टडी, अदालती वाद-विवाद और प्रोजेक्ट पर काम शामिल हैं. एनएलएसआइयू के पूर्व छात्रों को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया है; वे जो कक्षाएं लेते हैं, वे छात्रों के पाठ्यक्रम के काम का अहम हिस्सा हैं.

एएलएसआइयू में अपनाई गई शिक्षण पद्धतियों की एक अभिनव खूबी सहकारी शिक्षण है जिसमें दो या ज्यादा शिक्षक मिल-जुलकर कोर्स पेश करते हैं और उसी कक्षा में छात्रों के साथ बातचीत करते हैं. प्रो. राव के मुताबिक, शीर्ष पायदान पर बने रहना किसी भी संस्था के लिए मुश्किल होता है. मगर वे यही करने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही ज्यादा जबावदेही भी ला रहे हैं. ''एनएलएसआइयू ने आज फरिश्तों-सी छवि हासिल कर ली है. गिरा हुआ फरिश्ता कहलाना अच्छा नहीं है. हमारे साथ जिन लोगों के हित जुड़े हैं, उनकी खातिर हम ज्यादा जवाबदेही लाना चाहते हैं. हम पहले ही सबसे पारदर्शी संस्थानों में से एक हैं और मैं इसे और बढ़ाना चाहता हूं.''

कॉलेज के कई पूर्व छात्र कानून के अपने चुने गए क्षेत्रों में आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज, वार्विक, हार्वर्ड, येल, कोलंबिया, मिशिगन सरीखी अन्य प्रतिष्ठित विदेशी यूनिवर्सिटी में गए हैं. रोड्स और इनलैक्स सरीखी स्कॉलरशिप भी मिली हैं. एनएलएसआइयू के छात्र आज ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक तमाम स्तरों पर प्रैक्टिस कर रहे हैं. कुछ ने स्वतंत्र लॉ प्रैक्टिस कायम की है और कई देश के भीतर और बाहर कॉर्पोरेट लॉ फर्म से जुड़े हैं.

प्रो. राव कहते हैं कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की कामयाबी के लिए सरकार की सहायता अहम है. उनके शब्दों में, ''कर्नाटक सरकार पहले दिन से हमारी सहायता करती आ रही है और अब भी नई पहलों का स्वागत किया जाता है.''

मसलन, एनएलएसआइयू के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन ऐंड इन्क्लूसिव पॉलिसी के अंग के तौर पर मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटी स्टडी सेंटर की स्थापना में सरकार ने बड़ी भूमिका अदा की.

छात्र एनएलएसआइयू को इसलिए भी चुनते हैं क्योंकि यहां उन्हें सर्वांगीण विकास के मौके मिलते हैं—चाहे शीर्ष लॉ फर्म के साथ काम करना हो, न्यायपालिका के कामकाज का तजुर्बा या कानूनी दिग्गजों के साथ बातचीत. संयोग से प्लेसमेंट में भी इसका कामयाब रिकॉर्ड रहा है.

कुछ छात्र प्लेसमेंट से बाहर रहने का विकल्प चुनते हैं ताकि वे विदेश में उच्च शिक्षा या सिविल सेवा में करियर की तलाश सरीखी अपनी दूसरी दिलचस्पियों को पूरा कर सकें.

गुरुवाणी

प्रोफेसर एस.एन. वेंकट राव,

कुलपति, एनएलएसआइयू

एनएलएसयूआइ दूसरे लॉ कॉलेजों से किन मायनों में अलग है?

पढ़ाई में नवाचार, मसलन हमारा कोऑपरेटिव मॉडल, जिसमें दो या ज्यादा शिक्षक एक ही क्लास में

साथ-साथ पढ़ाने-बात करने का प्रस्ताव रखते हैं

सामाजिक रूप से मौजूं विषयों पर चर्चा जिससे छात्रों को समस्याओं के बारे में व्यापक ढंग से समझने का मौका मिले; विषय में छात्रों का ध्यान खींचने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के विशेषज्ञों और संसाधनों की सेवाएं

कानून की न्यायोन्मुखी शिक्षा, जिससे कि तय हो कि यह दूसरे अकादमिक पाठ्यक्रमों की तरह ही एक कोर्स नहीं है

पिछले तीन साल में नई पहल

चुनाव सुधार, स्पेस लॉ, हेल्थकेयर लॉ और साइबर सिक्योरिटी

मुफस्सिल इलाकों के 10 लॉ कॉलेजों के साथ समझौता, जिससे कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और वहां के छात्रों को सहायता, संसाधन और विशेषज्ञता मुहैया कराने में मदद मिल सके

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन ऐंड इन्क्लूसिव पॉलिसी के अंग के रूप में मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटी स्टडी सेंटर की स्थापना

अपने संस्थान में एक चीज जो   बदलना चाहूंगा

हम देश के सबसे पारदर्शी संस्थानों में से हैं और हम यह स्तर ऊंचा उठाना चाहेंगे

एनएलएसयूआइ के छात्रों में चमक कैसे आती है?

चौकन्ने दिमाग की बात तो हम सुनते ही हैं लेकिन हमारे छात्रों को एक सजग हृदय की जरूरत है, एक ऐसा दिल जो सबके लिए धड़के और एक दिमाग जो समता और बराबरी के बारे में सोचे

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