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आवरण कथा-भाजपा के लिए, जाति है तो जहान है

अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी का मकसद यही रहा है कि निर्वाचन क्षेत्र के स्तर तक भी जातियों का इंद्रधनुषी प्रतिनिधित्व हासिल किया जाए

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी नई दिल्ली,गुजरात, 23 April 2019
आवरण कथा-भाजपा के लिए, जाति है तो जहान है बंदीप सिंह

जब से अमित शाह ने 2014 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कामकाज संभाला, जातिगत समीकरण पार्टी में एक सुनियोजित रणनीति के तौर पर जगह बना चुके हैं, जिसकी परिणति कई पार्टियों और जातियों के नेताओं को अपने साथ जोडऩे के सतत प्रवाह के रूप में हुई है. दरअसल, लोकसभा चुनाव से तकरीबन एक माह पहले दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी में शामिल होने वालों की तादाद इस कदर थी कि मीडिया के एक हिस्से में भाजपा के लिए एक नया नाम—भारत भर्ती पार्टी गढ़ लिया गया.

शाह की सरपरस्ती में गढ़ी गई भाजपा की जाति प्रबंधन नीति का दोतरफा मकसद हैः देश की विभिन्न जातियों से व्यापक प्रतिनिधित्व कायम किया जाए ताकि एक समग्र-हिंदू पार्टी की छवि कायम हो और दूसरा, उन क्षेत्रों में प्रभाव स्थापित किया जाए जहां जातिगत आधार पर पार्टी कमजोर पड़ती है. शाह इसे भाजपा की जाति समावेशी रणनीति का नाम देते हैं. वे कहते हैं, ''इसका मकसद एक राष्ट्रवादी सोच के तहत सारी जातियों को साथ लेकर चलना है.

हमने उत्तर प्रदेश में यह कर दिखाया है जहां हमने टिकटों के बंटवारे में छोटी से छोटी जातियों का ध्यान रखा था." इसी रणनीति को पूर्वोत्तर में 'इंद्रधनुषी गठबंधन' कायम करने में जनजातीय समूहों के संदर्भ में लागू किया गया. शाह कहते हैं, ''जाति आधारित और छद्म-धर्मनिरपेक्ष पार्टियां इसके उलट केवल कुछ खास समूहों पर ध्यान केंद्रित करती हैं और बाकियों को छोड़ देती हैं और इस तरह से वे खालिस जातिगत कार्ड खेलती हैं."

भाजपा के संगठन सचिव रामलाल कहते हैं कि भाजपा की जाति रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर आधारित है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में भाजपा ने जाति का कार्ड बड़ी होशियारी से खेला है, जिसमें शाह ने क्षेत्रीय नजरिए को ध्यान में रखने के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र विशेष के जातिगत समीकरणों पर भी पैनी निगाह रखी है. इस सारी कवायद में विभिन्न जातियों के नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश बहुत महत्वपूर्ण है. मिसाल के तौर पर कुल 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में देवेंद्र फडऩवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आंदोलनरत मराठा समूहों को शिक्षा और नौकरी में 16 फीसदी आरक्षण की पेशकश की. अब पार्टी ने प्रमुख मराठा चेहरों और कर्नाटक से लगे राज्य के सीमावर्ती इलाकों में प्रभुत्व रखने वाले लिंगायत समुदाय के नेताओं को पार्टी में शामिल किया है. एक प्रभावशाली लिंगायत गुरु जय सिद्धेश्वर को पार्टी में शामिल करके उन्हें शोलापुर से लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनाया गया है. भाजपा की नजर इस चुनाव क्षेत्र में मराठा-लिंगायत धुरी पर है.

पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय सिंह मोहिते-पाटील के पुत्र रणजीतसिंह मोहिते-पाटील भी एनसीपी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं. भाजपा के हाथ लगे एक और मराठा नेता सतारा जिला कांग्रेस अध्यक्ष रणजीतसिंह नाइक-निंबालकर हैं जिन्हें मढा से खड़ा किया गया है. पार्टी में चौथी प्रमुख प्रविष्टि सुजय विखे पाटील की रही है जो कांग्रेस के प्रभावशाली मराठा नेता और विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील के बेटे हैं. वे अहमदनगर से चुनाव लड़ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में भाजपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के जाटव-मुस्लिम-यादव-जाट गठजोड़ को तोडऩे के लिए सक्रिय है. पार्टी का ध्यान गैर-यादव ओबीसी (अन्य पिछड़े वर्गों) पर है जो मिलकर ओबीसी में 85 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं. भाजपा ने प्रवीण निषाद को खेमे मंे शामिल कर लिया है और उन्हें संत कबीर नगर से टिकट भी दिया है. पिछले साल संयुक्त बसपा-सपा उम्मीदवार के रूप में निषाद ने गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा को मात दी थी. ब्राह्मण-बहुल कन्नौज सीट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल ने 2014 में जीत हासिल की थी. यहां से इस बार भाजपा ने बबलू तिवारी को उतारा है, जिन्होंने 2014 में बसपा प्रत्याशी के तौर पर यहां से काफी वोट हासिल किए थे. पिछले दो महीनों में सपा, बसपा और कांग्रेस के कम से कम 50 जिला या राज्य स्तर के नेता भाजपा में शामिल हुए हैं. पार्टी के भीतरी लोगों का कहना है कि इन लोगों को शामिल करके पार्टी की राज्य इकाई में बने हुए क्षेत्रीय और जातिगत असंतुलन को दूर किया गया है.

राजस्थान में भाजपा जाट और गुर्जर नेताओं को अपने में मिला रही है ताकि अन्य जातियों के अपने उम्मीदवारों के लिए इन समुदायों के लोगों का समर्थन जुटाया जा सके. पार्टी को जोधपुर में जाटों का समर्थन चाहिए जहां से केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत चुनाव लड़ रहे हैं और उसके अलावा बाड़मेर और नागौर में भी. लिहाजा जाट नेता हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को सहयोगी के रूप में ले लिया गया है. बेनीवाल पहले भाजपा के साथ रहे हैं, अब उन्हें नागौर से टिकट दिया गया है.

भाजपा उनकी पार्टी के साथ तालमेल का फायदा जयपुर में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को भी मिलने की उम्मीद कर रही है जिनका मुकाबला डिस्कस-थ्रोअर एथलीट कृष्णा पूनिया से है जो खुद जाट हैं. बेनीवाल के ही कहने पर बाड़मेर से पूर्व भाजपा नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह के खिलाफ एक युवा जाट नेता कैलाश मीणा को टिकट दिया गया है. बेनीवाल के आने से भाजपा को शेखावाटी समेत पश्चिमी राजस्थान की समूची जाट-पट्टी में मदद मिलने की उम्मीद है. बीते नवंबर में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रयासों के चलते पार्टी ने गुर्जर नेता किरोड़ीलाल मीणा को शामिल करके जयपुर में मीणा जाति का समर्थन जुटाने की कोशिश की थी.

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने राज्य के उत्तरी इलाकों में रहने वाले नेपाली मूल के 11 जनजातीय समूहों को लोकसभा चुनावों के बाद कानून बनाकर जनजातीय दर्जा देने का वादा किया है. इसके अलावा तीन जाति-समूहों—मूल रूप से बांग्लादेश से आने वाले मठुआ, राजबोंगशी और नामसुंदर—को एक-एक सीट दी गई है जिनकी अपनी-अपनी संख्या भले ही कोई खास न हो लेकिन तीनों मिलाकर एक मजबूत जाति गठजोड़ कायम करते हैं. इसके अलावा पार्टी गोरखाओं, संथाल आदिवासियों और चाय बागान श्रमिकों पर भी ध्यान दे रही है. भाजपा के पश्चिम बंगाल के प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का दावा है कि ''इन समुदायों तक हमारी पहुंच सामाजिक न्याय पर आधारित है और यह बात उन्हें प्रभावित कर रही है."

गुजरात में भाजपा आरक्षण-समर्थक नेता हार्दिक पटेल की पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के कार्यकर्ताओं को अपने में मिलाने में कामयाब रही है. पास ने 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा को खासा नुक्सान पहुंचाया था. इसके अलावा, भाजपा ने कई कोली और अहीर ओबीसी नेताओं को भी लुभाया है. भाजपा को उम्मीद है कि मोदी सरकार ने अगड़ी जातियों के गरीब लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार में जिस 10 फीसदी आरक्षण की घोषणा की है, उसका भी फायदा उसे मिलेगा और उससे उस गुस्से की भरपाई हो सकेगी जो अनुसूचित जाति/जनजाति (उत्पीडऩ की रोकथाम) कानून को मजबूत करने के लिए पिछले साल सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के चलते ऊंची जातियों में उबल पड़ा था.

तमिलनाडु में भाजपा दस पार्टियों के एक मजबूत गठजोड़ का हिस्सा है जो तमाम अलग-अलग जाति समूहों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि केरल में उसे नायर और एझावा समुदायों के एक हिस्से का समर्थन हासिल है और कुछ ईसाई समूह भी उसके साथ हैं.

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