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आवरण कथा-थाली में कामयाबी

आइएचएम में हम छात्रों के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं करते और उन्हें किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें प्रयोगों और कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.'' यहां छात्रों को हरफनमौला बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी नई दिल्ली, 24 May 2019
आवरण कथा-थाली में कामयाबी चलो कुछ पकाएं आइएचएम-पूसा में चल रही बेकरी की क्लास

बुधवार सुबह के 9.30 बजे हैं. शेफ का सफेद कोट पहने कई छात्र फूड लैबोरेट्री में तैयार एक पकवान को सजाने-संवारने में व्यस्त हैं. बीच-बीच में उनके प्रोफेसर सही स्वाद पैदा करने के लिए जरूरी सामग्रियों के बारे में उन्हें बता रहे हैं. लैब के अंदर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस है, लेकिन अपने काम में तल्लीन इन छात्रों को गर्मी का पता नहीं चल रहा. उलटे, वे यह पक्का करने में लगे हैं कि ओवन सही तापमान पर सेट हो. यह इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग ऐंड न्यूट्रिशन, पूसा, दिल्ली की एक सुबह का नजारा है.

लगभग 2.3 एकड़ में फैले आइएचएम-पूसा परिसर में वर्षों से देश के सर्वश्रेष्ठ शेफ, पोषण विशेषज्ञ, आहार विशेषज्ञ और आतिथ्य उद्योग के विशेषज्ञ ज्ञान अर्जित करते रहे हैं. यहां की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विरासत इसे भारत में सर्वश्रेष्ठ होटल प्रबंधन संस्थानों में से एक बनाती है.

आइएचएम-पूसा के प्रिंसिपल कमल कांत पंत कहते हैं, ''पुराना संस्थान होने के कारण हमारे यहां पढ़े छात्र इंडस्ट्री में हर जगह हैं. कई बड़े नामों ने यहां से स्नातक किया है. हमारा ही एकमात्र संस्थान है जो खानपान औरपोषण में डेढ़ साल का स्नातकोत्तर डिप्लोमा चलाता है.''

प्रतिष्ठित शिक्षकों और काफी कठोर संयुक्त प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर पाठ्यक्रम में प्रवेश पा सके छात्रों वाला यह संस्थान नई पहल करने, उद्योग के नेतृत्वकर्ताओं के साथ सहयोग-संबंध बनाने और अंतरराष्ट्रीय पाकशास्त्र प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को वैश्विक अनुभव मुहैया करने के लिए प्रोत्साहित करने के मामले में हमेशा सबसे आगे रहा है.

मसलन, नवंबर 2018 में आइएचएम ने इतालवी दूतावास के साथ मिलकर एक हफ्ते का कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें संस्थान के छात्रों ने इटली के प्रमुख आतिथ्य प्रशिक्षण स्कूल 'अल्मा' के छात्रों के साथ मिल कर काम किया था.

और पुरानी दिल्ली में 'कलिनरी वाक' के आयोजन तथा राजधानी के शंग्री-ला होटल में एक चैरिटी कार्यक्रम आयोजित करने जैसी कई पहलकदमियां की थीं. पिछले अगस्त में संस्थान ने कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र के साथ मिलकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें आइएचएम-पूसा के 10 छात्रों ने भाग लिया. प्रथम दो स्थानों पर रहने वाले छात्रों को कोरियाई व्यंजन बनाना सीखने के लिए कोरिया जाने का मौका मिला.

इसके अलावा, उद्योग में आ रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखने और अपने छात्रों तथा शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने के उद्देश्य से आइएचएम पूसा ने स्विट्जरलैंड के लूसान होटल स्कूल के साथ पाठ्यक्रम उन्नयन का करार किया है. इन दिनों संस्थान की अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से साझा शोध और संकाय के उन्नयन तथा भारत के हिमालयी राज्यों के व्यंजनों पर कॉफी-टेबल बुक तैयार करने के सिलसिले में बातचीत चल रही है. पुस्तक परियोजना को पर्यटन मंत्रालय से वित्तीय सहायता मिली है.

पंत कहते हैं, ''आइएचएम में हम छात्रों के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं करते और उन्हें किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें प्रयोगों और कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.'' यहां छात्रों को हरफनमौला बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें लचीला होना और बारीकियों पर ध्यान देना सिखाया जाता है. और, हां! यह भी पक्का किया जाता है कि उन्हें इंटर्नशिप के माध्यम से उद्योग में पर्याप्त अनुभव मिले.

संस्थान के पाठ्यक्रमों के बारे में वे बताते हैं कि ''यहां कई तरह के स्नातक, स्नातकोत्तर और सर्टिफिकेट कार्यक्रमों का संचालन होता है, जैसे बीएससी इन हॉस्पिटैलिटी ऐंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन, एमएससी इन होटल एडमिनिस्ट्रेशन, डायटेटिक्स ऐंड हॉस्पिटल फूडसर्विस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, बेकरी और कन्फेक्शनरी में डिप्लोमा, भोजन निर्माणमें डिप्लोमा और खाद्य और पेय सेवामेंडिप्लोमा.''

उद्योग में काम करने के लिए पूरी तरह से दक्ष स्नातक तैयार करने के अपने दर्शन के अनुरूप आइएचएम-पूसा छात्रों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जैसे वर्ल्ड स्किल कंपिटीशन ग्लोबल स्किल कंपीटिशन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है जहां उन्हें दुनिया भर के प्रतिभागियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होती है.

कई वर्षों के शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ आइएचएम-पूसा के छात्रों को ओबेरॉय ग्रुप, जेपी ग्रुप ऑफ होटल्स, आइटीसी होटल्स, ओल्ड वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी और इंटरकॉन्टिनेंटल होटल ग्रुप जैसी होटल चेन के अलावा मैकडॉनल्ड्स, डोमिनोज पिज्जा और कैफे कॉफी डे जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी काम मिला है.

संस्थान छात्रों के समग्र विकास में विश्वास करता है और छात्रों में पर्यावरण संबंधी जागरूकता पैदा करने के लिए परिसर में कई पर्यावरण-अनुकूल उपाय किए गए हैं. स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के छात्रों के लिए 'थिंक रेस्पॉन्सिबल, ऐक्ट सस्टेनेबल (टीआरएएस)' एक ऐसी पहल है जो उनमें नेतृत्व और व्यावसायिक स्थिरता के गुण पैदा करती है.

आइएचएम-पूसा में कुछ पर्यावरण-अनुकूल रीतियां भी अद्वितीय हैं. इन रीतियों में खाद्य उत्पादन और प्रयोगशालाओं में उपज प्रबंधन, कक्षाओं में धूप का अधिकतम उपयोग और खाना बनाने की तैयारी, बनाने के दौरान और उपयोग के दौरान शून्य खाद्य अपव्यय सुनिश्चित करना शामिल हैं. ठ्ठ

गुरु वाणी

कमल कांत पंत

प्रिंसिपल, आइएचएम-पूसा

आइएचएम-पूसा की कौन-सी बात इसे औरों से अलग बनाती है?

हमारी समृद्ध विरासत; आइएचएम-पूसा गुणवत्तापूर्ण तालीम देने वाले सबसे पुराने संस्थानों में से एक है.

आइएचएम से निकले छात्रों का काफी बड़ा और प्रतिष्ठित समूह है.

यह एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां डाएबेटिक्स ऐंड न्यूट्रिशन (आहार एवं पोषण विज्ञान) में डेढ़ साल का स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम उपलब्ध है.

पिछले तीन साल में नई पहल

आइएचएम ने लूसान होटल स्कूल, स्विटजरलैंड के साथ पाठ्यक्रम उन्नयन के लिए समझौता किया.

अगस्त 2018 में संस्थान ने कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र के साथ मिलकर पाक कला प्रतियोगिता का आयोजन किया.

एक चीज जो सुधारना चाहता हूं

मैं आइएचएम-पूसा के परिसर को आला दर्जे का बनाना चाहूंगा.

यूं सजाएं टेबल

डाइनिंग स्पेस को सजाने का प्रशिक्षण

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