एडवांस्ड सर्च

नफा से ज्यादा नुक्सान

देश में 89 फीसद सोने की आपूर्ति आयात से होती है और इस पर सीमा शुल्क बढ़ाकर सरकार ने इस क्षेत्र को झटका दे दिया है. इससे कालाबाजारी बढऩे और रोजगार कम होने की आशंका

Advertisement
aajtak.in
शुभम शंखधर नई दिल्ली, 16 July 2019
नफा से ज्यादा नुक्सान पूरूषोत्तम दिवाकर

नोटबंदी, जीएसटी और सुस्त मांग से जूझ रहा रत्न और आभूषण क्षेत्र केंद्रीय बजट 2019-20 में सोने पर सीमा शुल्क घटाए जाने की उम्मीद लगाए बैठा था. लेकिन केंद्रीय बजट में सोना और अन्य बेशकीमती धातुओं पर सीमा शुल्क 10 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसद कर दिया गया. इससे देश में सोने का आयात महंगा हो जाएगा. गैर जरूरी चीजों के आयात पर अंकुश लगने, चालू खाता घाटे में सुधार और राजस्व बढऩे केनजरिए से अर्थशास्त्री भले इस कदम को तर्कसंगत मान रहे हों लेकिन उद्योग जगत इसे ईमानदार व्यापारियों को हतोत्साहित करने वाला बता रहा है.

द बुलियन ऐंड जूलर्स एसोसिएशन (टीबीजीए) के अध्यक्ष योगेश सिंघल कहते हैं, ''सीमा शुल्क में बढ़ोतरी चोरी (ग्रे मार्केट) को बढ़ावा देगी. बाजार में अवैध सोने की आपूर्ति बढ़ जाएगी.'' एक तरफ 12.5 फीसद सीमा शुल्क, 3 फीसद जीएसटी और कुछ जॉब वर्क पर अतिरिक्त जीएसटी के बाद 18 फीसद तक कर लगने वाले गहने होंगे और दूसरी तरफ बिना पक्के बिल के नकदी में खरीद-फरोख्त. ग्राहकों को नकद और बिल पर मिलने वाले गहनों में पांच फीसद तक का अंतर आ जाएगा.

इससे ईमानदार व्यापारियों को असंगत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा. यानी सरकार की नीति ही उन्हें ग्रे मार्केट की ओर ले जाने पर मजबूर करेगी. उद्योग जगत सीमा शुल्क में बढ़ोतरी के बाद ग्रे मार्केट में 30 फीसद के उछाल की आशंका जता रहा है.

इसके अलावा, योगेश देश में सोने की बड़ी खरीद करने वाले बड़े ग्राहकों के बाहर जाने की भी आशंका जता रहे हैं.

ऐसे भारतीय जो अक्सर विदेश यात्राएं करते हैं, वे सोने की खरीद के लिए बाहर के बाजार का रुख कर सकते हैं, जो मांग की कमी से जूझते बाजार के लिए दोहरा झटका होगा.

वहीं, केडिया कमोडिटी के निदेशक अजय केडिया कहते हैं, ''सरकार के इस कदम से सोने के आयात में गिरावट आती दिखेगी, जिससे चालू खाते पर काबू पाने में मदद मिलेगी.''

2013 में जब सरकार ने सोने पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 10 फीसदी किया था उस समय देश में सालाना 1,000 टन सोने का आयात होता था, लेकिन आयात के महंगा होने के बाद हमने सालाना आयात में औसतन 250 टन की कमी आते देखी है.

केडिया कहते हैं, ''आयात घटने के बाद बाजार में सोने की आपूर्ति कम न हो, इसके लिए सरकार को गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम को सफल बनाने के लिए कड़े प्रयास करने होंगे, जिससे घरों और मंदिरों में रखे सोने को बाजार में लाकर घरेलू व्यापारियों के लिए सस्ते सोने की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और सोने की खरीद के लिए देश से बाहर जाने वाले डॉलर को भी रोका जा सके.'' एक अनुमान के मुताबिक, घरों और मंदिरों में करीब 28,000 टन से ज्यादा सोना रखा हुआ है, जिसे बाहर लाने के लिए 2015 में सरकार की ओर से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम शुरू की गई. हालांकि, अभी तक इस स्कीम को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली और बीते तीन वर्षों में केवल 15 टन सोना ही जमा हुआ है.

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के हेड (रिसर्च) रवि सिंह कहते हैं, ''सोने पर सीमा शुल्क बढ़ाने का फैसला निश्चित तौर पर गैर जरूरी सामान का आयात घटाने की सरकार की नीति का हिस्सा है, लेकिन अर्थव्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य में यह कदम कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण भी होगा.'' मसलन, रत्न और आभूषण गहन श्रम वाला क्षेत्र है जो देश में बड़ी संख्या में रोजगार मुहैया कराता है. सीमा शुल्क बढऩे के कारण व्यापार के सिकुडऩे से रोजगार के मौके कम होंगे. इसके अलावा उच्च कर के कारण नकदी पर चलने वाले ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिलेगा. इससे डिजिटल लेन-देन के प्रोत्साहन और नकदी रहित व्यापार की मुहिम को तगड़ा झटका लगेगा.

सीमा शुल्क में ढाई फीसद की बढ़ोतरी से सरकार की झोली में 5,500 करोड़ रु. का राजस्व आने की उम्मीद है. लेकिन इस नफे से साथ जुड़े नुक्सान की भरपाई के लिए कई मोर्चों पर कमर कसने की जरूरत होगी.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay