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देश का मिजाजः सिनेमा और खेलकूद के भव्य प्रतिमान

भारत में लोगों को बड़ी और भव्य चीज सुहाती है. खेल में क्रिकेट धर्म है और क्रिकेटर भगवान, लेकिन दूसरे खेलों के छोटे भगवान भी भक्ति के लिए कम प्रेरित नहीं करते

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सुहानी सिंहमुबंई, 28 August 2017
देश का मिजाजः सिनेमा और खेलकूद के  भव्य प्रतिमान बंदीप सिंह

बॉक्स ऑफिस पर 1,000 करोड़ रु. का कांटा पार करने वाली पहली फिल्म बाहुबली और उसके निर्देशक एस.एस. राजमौलि की अपार कामयाबी इस बात का पता देती है कि हमारे यहां लोगों को भव्य चीज देखना सुहाता है. जाहिर है कि देश का मिज़ाज पोल में प्रतिक्रिया देने वालों ने बाहुबली को ही अपनी पसंदीदा फिल्म चुना. एक तेलुगु फिल्म जिसे हिंदी में डब किया गया और जिसमें बॉलीवुड का कोई भी ऐसा कलाकार नहीं था जिसे लोग पहचानते हों, अगर उसे सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म चुना गया है तो एक बात यह समझ में आती है कि भाषा से इतर आखिर दर्शक सिनेमा को कैसे देखते हैं. वे दरअसल एक ऐसे फिल्मकार के नजरिए के मुरीद हैं जिसकी सोच वैश्विक है लेकिन छवियां स्थानीय संस्कृति में निहित हैं.

एक और फिल्म जो ऐसी ही उम्मीदों पर खरी उतरती है, वह रमेश सिप्पी की शोले है जो चार दशक बाद भी लोगों को याद है. अमिताभ बच्चन इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि पुरानी चीज बेशकीमती होती है. उन्होंने उम्र को मानो धता बता दी है. माधुरी दीक्षित और हेमा मालिनी भले ही बच्चन की तरह परदे पर सक्रिय न हों लेकिन उन्हें आज भी उनकी करिश्माई मौजूदगी के लिए सराहा जाता है.

वैसे सारा मामला आपके काम पर टिका है, चाहे देश में हो या विदेश में. यही वजह है कि प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण की साल में कोई फिल्म नहीं आई फिर भी वे प्रभावशाली छवि बनाए हुए हैं. हॉलीवुड में कदम रखकर दोनों अपने समकालीन अभिनेताओं से काफी आगे जा चुकी हैं जबकि यहां भी उन्होंने अपना सुपरस्टार का तमगा बनाए रखा है. अभिनेताओं में सलमान खान और बच्चन लोकप्रियता के मामले में 2016-17 में बराबरी पर छूटे लेकिन अक्षय कुमार खान बंधुओं को काफी तेजी से टक्कर दे रहे हैं और क्षितिज पर उदीयमान सुपरस्टार की तरह दमक रहे हैं.

 

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