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फीकी पड़ी चमक

यह पहला मौका था जब हमने सोने पर 1% उत्पाद शुल्क लगाने के विरोध में दो दिन के लिए शोरूम बंद किए थे. लेकिन सरकार मानी नहीं ... नीतियों पर फिर से विचार होना चाहिए... जीएसटी को बिना किसी तैयारी के लागू कर दिया गया था.

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श्वेता पुंजनई दिल्ली, 24 May 2019
फीकी पड़ी चमक शृंखला की कड़ी कोलकाता में सोने की जूलरी फैक्ट्री का कारीगर सुभाष

सोने की खपत के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश में बीता दशक इस कारोबार के लिए अच्छा नहीं रहा. इस उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने वाले इस क्षेत्र में बिक्री टूटती हुई 2017-18 में -1.78 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो बड़े संकट की बानगी है.

लगभग 75 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रु.) का यह क्षेत्र देश भर में लगभग 50 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में पांच प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है. भारत दुनिया भर में तराशे और पॉलिश किए हीरों का सबसे बड़ा केंद्र है. दुनिया भर में बिकने वाले 15 में से लगभग 14 हीरे भारत में तराशे और पॉलिश किए जाते हैं; दुनिया भर में पॉलिश किए हीरों में से लगभग 75 प्रतिशत का निर्यात भारत से किया जाता है. लेकिन, बीते कुछ समय में हुए बदलावों ने इस क्षेत्र का काफी चोट पहुंचाई है.

इन बदलावों में से एक है नए गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत बहुस्तरीय करारोपण. नई व्यवस्था में हीरों तथा अन्य मूल्यवान रत्नों पर 0.25 प्रतिशत की दर से कर लगता है जबकि उपरत्नों पर तीन प्रतिशत की दर से. कुछ श्रेणियों के मूल्यवान पत्थरों पर आयात शुल्क बढऩे से उनसे बनने वाले उत्पादों की लागत बढ़ गई है. इन रत्नों को जब प्रदर्शनी के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता है तो अनबिके माल पर भी समेकित जीएसटी (आइजीएसटी) लगाया जाता है.

इसके साथ ही, गीतांजलि जूल्स ब्रांड के तहत देश में आभूषणों की खुदरा बिक्री करने वाली दो सबसे बड़ी कंपनियों के संचालकों—नीरव मोदी और मेहुल चोकसी-से जुड़े घोटाले से भी गहरा झटका लगा है. इस उद्योग में लगे कुल कामगारों में से लगभग 15 प्रतिशत को इन दोनों कंपनियों से ही रोजगार मिला था. इसमें कारीगर और अस्थायी कर्मचारी शामिल नहीं हैं. इस घोटाले का एक दुष्प्रभाव यह हुआ कि इस क्षेत्र को कर्ज मिलना लगभग बंद हो गया. दिसंबर 2017 में रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को बैंकों से मिला कुल कर्ज लगभग 69,000 करोड़ रु. का था जो उस समय बैंकों द्वारा दी गई कुल ऋण राशि 73 लाख करोड़ रु. के एक प्रतिशत से भी कम है.

इस क्षेत्र को तीसरी गंभीर झटका लगा नोटबंदी से, जिससे अगले छह महीनों तक मांग ही खत्म हो गई थी.

पवन जैन, 35 वर्ष

जयपुर, राजस्थान

संकट की वजहें

बहुस्तरीय करारोपण हीरों, रत्नों तथा उप-रत्नों पर अलग-अलग दरों से करारोपण. हीरों तथा बहुमूल्य रत्नों पर 0.25 प्रतिशत की दर से तथा उपरत्नों पर 3 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है.

रत्नों-उपरत्नों को प्रदर्शनी के लिए ले जाने पर भी समेकित जीएसटी लगता है

रत्नों पर आयात शुल्क शुल्क-मुक्ति समाप्त कर 7 प्रतिशत की दर से आयात शुल्क लगाए जाने से निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले आभूषणों की लागत बढ़ गई है

सोने पर आयात शुल्क में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी से सोने की तस्करी को बढ़ावा मिला है

नीरव मोदी-मेहुल चोकसी धोखाधड़ी

की वजह से बैंकों ने इस क्षेत्र को ऋण देने से हाथ खींच लिए हैं

विशेषज्ञ की राय

''यह पहला मौका था जब हमने सोने पर 1% उत्पाद शुल्क लगाने के विरोध में दो दिन के लिए शोरूम बंद किए थे. लेकिन सरकार मानी नहीं ... नीतियों पर फिर से विचार होना चाहिए... जीएसटी को बिना किसी तैयारी के लागू कर दिया गया था.''

संजय काला

अध्यक्ष, जूलर्स एसोसिएशन

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