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अर्थव्यवस्था-दलाल स्ट्रीट को नहीं चाहिए जंग

अगर हालात बिगड़ते हैं तो बाजार के लिए चिंता के पर्याप्त कारण, नतीजे भयंकर होने की आशंका हुई गहरी

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श्वेता पुंज और एम.जी. अरुण 07 March 2019
अर्थव्यवस्था-दलाल स्ट्रीट को नहीं चाहिए जंग अमन का वक्तः पाक अधिकृत कश्मीर से आती फल और सब्जी से लदी गाड़ियां भारतीय सीमा में

मुंबई स्थित एक अर्थशास्त्री को 25 फरवरी से निवेशकों के लिए रोजाना अपनी सलाह बदलनी पड़ रही है. दिन की शुरुआत पुलवामा आतंकी हमले पर भारत के प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की खबर से बाजार को लगे आर्थिक झटके के आकलन से हुई. 26 फरवरी को दुनिया की नींद इस खबर के साथ खुली कि भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए हवाई हमले किए. सरकार ने इसे 'गैर-सैन्य एहतियाती कार्रवाई' बताया तो अर्थशास्त्री ने तर्क दिया कि यह संघर्ष आगे नहीं बढ़ेगा. 27 फरवरी को टीवी चैनलों पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई की खबरें तैरने लगीं तो वे चिंतित हो उठे.

आखिरी बार ऐसी नाजुक स्थिति भारतीय संसद पर हमले के बाद 2001 में देखी गई थी. 1999 के करगिल युद्ध के दौरान, भारत के पास बताने के लिए कोई खास विदेशी निवेश नहीं था. आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत का वास्ता बहुत अधिक है. 2019 में, अधिकांश भारतीय स्टार्ट-अप विदेशी निवेशकों द्वारा वित्त पोषित हैं. दिसंबर 2018 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 393 अरब डॉलर रहा, जो ऐतिहासिक उच्च स्तर के करीब था. हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) प्रति वर्ष 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 33.5 अरब डॉलर हो गया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस ऐंड पॉलिसी के प्रो. एन.एल. भानुमूर्ति कहते हैं, ''अगर मैं एक निवेशक होता, तो मैं मई तक (जब आम चुनाव होने वाले हैं) की अनिश्चितता में फूंक-फूंक कर कदम रखता.''

1998 में पोकरण-2 परीक्षणों के बाद भारत को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2019 में, दुनियाभर में बढ़ता संरक्षणवाद दूसरी चुनौतियां पेश कर रहा है.

कोटक महिंद्रा ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं, ''विदेशी निवेशकों को शांति की जरूरत है. हमने जबसे उदारीकरण की ओर कदम रखे हैं, कई आतंकवादी हमले हुए हैं. अगर युद्ध की आशंकाएं बढ़ती हैं, तो चिंता होनी लाजिमी है.''

सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 पर इक्विटी बाजारों की प्रतिक्रिया 26 फरवरी को तेज थी, हालांकि दिन में फिर वापसी हुई. 27 फरवरी को, बीएसई सेंसेक्स ने शुरुआती बढ़त से 600 अंकों तक नीचे चला गया था. यह पिछले दिन की तुलना में 0.19 प्रतिशत यानी 68 अंक नीचे 35,905 पर बंद हुआ. निफ्टी में 0.26 फीसदी की गिरावट दिखी.

एक अन्य अर्थशास्त्री कहते हैं, ''हालांकि, यह नकारात्मकता थोड़े समय की है. दीर्घावधि में, यह सकारात्मक है—इससे राजनैतिक अनिश्चितता घटेगी.'' करगिल युद्ध के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उड़ान भरी. ईवाइ इंडिया के डी.के. श्रीवास्तव कहते हैं, ''आमतौर पर अल्पकालिक युद्ध अर्थव्यवस्था में मांग की उत्तेजना पैदा करते हैं. इस दौरान सिर्फ खर्च ही नहीं, मांग भी बढ़ जाती है. एफआइआइ और एफडीआइ को स्थगित कर दिया जाएगा. राजकोषीय घाटे में कमी हो सकती है.''

भारत ने 1996 में पाकिस्तान को जो सबसे पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा दिया था, उसे खत्म कर दिया है. हालांकि, पाकिस्तान ने भारत को वैसा ही दर्जा देने से इनकार कर दिया था. इस्लामाबाद की अपनी नकारात्मक सूची में 1,209 आइटम हैं जिसका अर्थ है कि पाकिस्तान भारत से इन वस्तुओं के आयात की अनुमति नहीं देता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि एमएफएन को रद्द करने से पाकिस्तान पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि पाकिस्तान को भारत की ओर से होने वाला निर्यात, पाकिस्तान से भारत में होने वाले आयात की तुलना में बहुत अधिक है. भारत ने 2017-18 में 48.85 करोड़ डॉलर (3,468 करोड़ रु.) का आयात किया और 1.92 अरब डॉलर (13,632 करोड़ रु.) के मूल्य के सामान का निर्यात किया. भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार 2017-18 में मामूली वृद्धि हुई और यह 2.41 अरब डॉलर (17,111 करोड़ रु.) हो गया, जबकि 2016-17 में यह 2.27 अरब डॉलर (16,117 करोड़ रु.) था.

दोनों देशों के बीच तनाव बढऩे से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा क्योंकि प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान ने पुनरुद्धार की उम्मीदें लगा रखी हैं. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज ऐंड प्लानिंग के विश्वजीत धर कहते हैं, ''पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था थोड़ी बेहतर हो जाती, तो पड़ोस में एक बड़ा बाजार तैयार होता.'' वह अवसर अब खतरे में है.

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