एडवांस्ड सर्च

आवरण कथा-कारोबार का कौशल

एसआरसीसी के 2,630 छात्रों को पढ़ाने के लिए 120 संकाय सदस्य (स्थायी और तदर्थ) हैं. छात्रों के समग्र विकास पर बहुत जोर देने के साथ, शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा नाटक, वाद-विवाद, संगीत, किताबों, खेल और साहित्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित कॉलेज में कई स्टूडेंट सोसाइटीज हैं.

Advertisement
aajtak.in
श्वेता पुंज नई दिल्ली, 24 May 2019
आवरण कथा-कारोबार का कौशल कामयाब फॉर्मूला एसआरसीसी में वार्षिक उत्सव

अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) में दाखिले के लिए 2018 में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) ने पहला कट-ऑफ 98.5 प्रतिशत घोषित किया था. दूसरा कट-ऑफ उससे महज 0.25 फीसदी घटकर 98.25 फीसदी रहा. एसआरसीसी को अपने इकोनॉमिक्स (ऑनर्स) प्रोग्राम के लिए 1,331 और बीकॉम (ऑनर्स) के लिए 2,665 आवेदन मिले. वाणिज्य की पढ़ाई में प्रतिष्ठा के शिखर को छू रहे दिल्ली में इस संस्थान की नींव आजादी से पहले 1920 में ‘द कमर्शियल स्कूल’ के रूप में पड़ी. एसआरसीसी देश और दुनियाभर में अपने पूर्व छात्रों के बड़े नेटवर्क का दावा करता है. देश के वित्त मंत्री से लेकर शीर्ष नौकरशाह, टेक्नोक्रेट और फिल्मी हस्तियां तक इस कॉलेज के पूर्व छात्रों में शुमार हैं. यह भी इस कॉलेज की अहमियत साबित करता है.

यही वजह है कि एसआरसीसी देशभर के छात्रों को आकर्षित करता है. इसकी प्रिंसिपल सिमरित कौर का कहना है कि कॉलेज में पढऩे वाले ज्यादातर छात्र दिल्ली से बाहर के हैं.

कॉलेज अपना रसूख बनाए रखने और कॉमर्स के सभी दूसरे कॉलेजों से आगे रहकर छात्रों की पहली पसंद बने रहने के लिए भारी जद्दोजहद करता है. तभी यह वाणिज्य और अर्थशास्त्र के लिए देश का प्रमुख शिक्षा केंद्र है. इसका यह दबदबा कई दशकों से यथावत कायम है.

एसआरसीसी के 2,630 छात्रों को पढ़ाने के लिए 120 संकाय सदस्य (स्थायी और तदर्थ) हैं. छात्रों के समग्र विकास पर बहुत जोर देने के साथ, शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा नाटक, वाद-विवाद, संगीत, किताबों, खेल और साहित्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित कॉलेज में कई स्टूडेंट सोसाइटीज हैं. इन सोसाइटी के जरिए छात्र कई तरह की गतिविधियों से जुड़े रहते हैं.

कॉलेज प्रबंधन भी कई तरह से छात्रों को प्रोत्साहन देता रहता है. छात्रों को सामाजिक उद्यमिता मॉडल बनाने और जमीन पर वास्तविक मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है. इसमें कोई आश्चर्य नहीं, अगर यहां के छात्र कहें कि व्यावहारिक दुनिया में प्रोजेक्ट करते वक्त उन्होंने क्लासरूम के बाहर भी बहुत कुछ सीखा है.

हाल ही में, छात्रों के एक समूह ने अमृतसर के ठठेरा शिल्पकारों के साथ काम करके उन्हें अपने उत्पादों को बाजार में उतारने में मदद की. ठठेरा पारंपरिक तांबे और पीतल के बर्तन बनाने की एक कला है, जो लुप्त हो रही है.

डिजाइनरों की सहायता ली गई और उत्पादों की प्रदर्शनी दस्तकार इंडिया, इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजनों में लगाई गई.

छात्रों ने दिल्ली, चंडीगढ़ और चेन्नै स्थित खुदरा दुकानों के साथ संपर्क किया और उत्पादों को प्रीमियम ई-कॉमर्स पोर्टल पर भी डाला गया.

एसआरसीसी की एक टीम कैलिफोर्निया के सैन होजे में पिछले अक्तूबर में आयोजित एनेक्टस वल्र्ड चैंपियनशिप 2018 में दूसरी उपविजेता रही. चैंपियनशिप का उद्देश्य लोगों के जीवन को बदलने और सामाजिक असर पैदा करने वाली पथ-प्रदर्शक उद्यमशीलता को पहचानना है. एनेक्टस एक अंतरराष्ट्रीय गैर-मुनाफा संगठन है, जिसकी 36 देशों में 1,700 विश्वविद्यालयों में मौजूदगी है और इसके 72,000 से अधिक छात्र सक्रिय सदस्य हैं.

एसआरसीसी अपने छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कराने के लिए भी जाना जाता है. सम्मेलनों की तैयारी छात्र ही करते हैं और वे ही इसके मुद्दे तय करते हैं जिनमें सामाजिक विषयों जैसे वैश्विक जोखिम, टिकाऊ और आर्थिक समावेशी नीतियों पर जोर होता है. खास बात यह है कि देश और दुनिया में उथल-पुथल पैदा करने वाले मुद्दों पर भी छात्रों को बहस-मुबाहिसों के लिए प्रेरित किया जाता है और छात्र भी इनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. पिछली जुलाई में एसआरसीसी के छात्रों ने नीति आयोग के सहयोग से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 'उद्यमशीलता, नवाचार और स्थायित्व को प्रोत्साहन' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया. इसमें बीस देशों ने हिस्सा लिया. कॉलेज 2016 में वित्तीय शिक्षा और जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किए गए अपने वित्तीय साक्षरता सेल के माध्यम से वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

एसआरसीसी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के अधिकारियों और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चला रहा है. संकाय में पढ़ाई-लिखाई और बाहरी दुनिया के व्यावहारिक अनुभवों के अलावा छात्रों का कहना है कि वे अपने साथियों से बहुत कुछ सीखते हैं. माहौल अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है और कभी-कभी इसके साथ कदमताल करना बड़ा मुश्किल हो जाता है. ऑन-कैंपस प्लेसमेंट ने पिछले साल एक नया रिकॉर्ड बनाया, जिसमें एक छात्र को एक कंसल्टिंग फर्म से 31 लाख रुपए प्रति वर्ष का ऑफर मिला था- जो दिल्ली विश्वविद्यालय में किसी छात्र को मिला अब तक का सर्वोच्च प्लेसमेंट ऑफर था.

कॉलेज में व्यापक बुनियादी ढांचे और डिजिटल चेक-इन/चेक-आउट के साथ एक पुस्तकालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं हैं. एसआरसीसी की कचरा प्रबंधन सुविधा स्वच्छता पार्क, इसकी एक और खूबी है. इसका मकसद है कि छात्र देश के लिए स्थायी समाधान के बारे में सोचें.

छात्रों का कहना है कि कॉर्पोरेट में करियर बनाने के लिए बहुत अधिक ध्यान देने और निरंतर दबाव से जूझना पड़ता है, जो कि कॉर्पोरेट जीवन में करियर के उनके विभिन्न लक्ष्यों को पूरा करता है.

बहरहाल, एसआरसीसी में शामिल होने वाले छात्र विभिन्न आकांक्षाओं के साथ आते हैं—कुछ प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होना चाहते हैं, कुछ एमबीए करना चाहते हैं, जबकि कई अन्य शिक्षाविद् बनना चाहते हैं. अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए उनमें गंभीरता भी दिखती है. दरअसल, यह छात्रों की अपनी पृष्ठभूमि और आकांक्षाओं का ही मिश्रण है जो एसआरसीसी के अनुभव को और समृद्ध बनाता है. प्रिंसिपल सिमरित कौर कहती हैं कि खुद को तेजी से ढालने का गुण कॉलेज में बने रहने और विकास के लिए आवश्यक है. छात्रों के लिए उनकी सलाह है कि वे इस पर ध्यान केंद्रित करें कि वे क्या करना चाहते हैं, न कि वे क्या बनना चाहते हैं क्योंकि आप जो करते हैं, वही बन जाते हैं.

गुरूवाणी

सिमरित कौर

प्रिंसिपल, एसआरसीसी

एसआरसीसी को औरों से क्या अलग बनाता है?

हम अपने पाठ्यक्रम में कमी को समझने की कोशिश करते हैं. हमने वैल्यू डेटा प्रोग्राम जोड़े हैं. हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में कोर्स शुरू करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. हम एक भाषा पाठ्यक्रम भी शुरू कर सकते हैं

एसआरसीसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी करता है. हाल ही में वैश्विक जोखिम, टिकाऊ और समावेशी तौर-तरीकों पर कुछ कार्यक्रम आयोजित हुए थे. उद्योग के लिए, हमने डिजिटल रूप से विघटनकारी प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की है

हम छात्रों के समग्र विकास को आश्वस्त करने की दिशा में बहुत अच्छी पद्धति अपनाते हैं. हमारे पास 39 से अधिक स्टूडेंट सोसाइटीज हैं जो मुख्य रूप से छात्र निकायों द्वारा संचालित हैं और ये छात्रों के कौशल को बढ़ाने में मददगार साबित होती हैं

हमारे पास एक स्वच्छता पार्क भी है. आज, मेरे छात्र जानते हैं कि वे कितना कचरा पैदा कर रहे हैं

हम छात्रों को अपने करियर और मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए दिन-रात परामर्श प्रदान करते हैं. हम इसकी पूरी गोपनीयता बनाए रखते हैं

एसआरसीसी छात्र की क्या पहचान?

अमूमन एसआरसीसी छात्रों का आइक्यू अधिक होता है. उनमें अनुकूल बनने की काबिलियत होती है. मेरे अधिकांश छात्र दक्षिण भारत से हैं, यहां सांस्कृतिक संघर्ष भी महसूस होता है. हमारे छात्र बहुत आकांक्षी हैं, आकांक्षाएं पूरी न होने पर उनमें हताशा भी अधिक होती है

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay