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आवरण कथा-निर्माण क्षेत्र के होनहार

डिपार्टमेंट के 40 छात्रों का एक समूह, विभिन्न कॉलम के जरिए अपने निर्दिष्ट पाठ्यक्रम के दायरे से परे जानकारियों और सूचनाओं का विस्तार कर रहा है. समूह नियमित रूप से संस्थान के और बाहर से आने वाले अतिथि संकायों के व्याख्यान और कार्यशालाओं का आयोजन करता है.

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असित जॉलीनई दिल्ली, 24 May 2019
आवरण कथा-निर्माण क्षेत्र के होनहार थोड़ा और रचनात्मक आइआइटी-रुड़की के छात्र रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किए जाते हैं

पीएस. चानी ने 2017 में आइआइटी रुड़की में योजना और वास्तुकला विभाग के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था. वे कहते हैं, ''जहां ज्यादातर दूसरे आर्किटेक्चर कॉलेज छात्रों को पेशेवर आर्किटेक्ट बनने के लिए प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की में हम एक विविध और शोध-उन्मुख अध्ययन का अनुभव प्रदान करते हैं.'' उत्तराखंड के रुड़की शहर में स्थित, 365 एकड़ के विशाल परिसर के एक हिस्से में स्थित उनके विभाग की शुरुआत 1847 में थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के रूप में हुई थी. 1947 में इसे एक विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और 2001 में यह संस्था देश की सातवीं आइआइटी बन गई. विभाग के भवन का आकर्षक इंटीरियर, देश के एक प्रमुख वास्तुकला संस्थान के रूप में इसकी प्रतिष्ठा पर मुहर लगाता है.

यहां वास्तुकला में एक पारंपरिक स्नातक प्रोग्राम और स्नातकोत्तर स्तर पर वास्तुकला और शहरी तथा ग्रामीण नियोजन के दो प्रोग्राम उपलब्ध हैं. विभाग की मुख्य ताकत है शोध-अनुसंधान.

चानी के अनुसार, एनईटी-जेडईडी (भवन की जितनी जरूरत हो, सौर ऊर्जा से उतनी की उतनी बिजली बन जाए), समावेशी डिजाइन, आभासी वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी), क्षेत्रीय योजना, शहरी डिजाइन और सिस्टम डायनामिक्स के रूप में आठ नई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना पिछले दो साल में की गई है.

संकाय एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) के लिए एक 'लो कार्बन कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल' विकसित कर रहा है. इमारतों की पूरी निर्माण सामग्री तैयार होने और इमारत बनने पर खर्च होने वाली पूरी ऊर्जा की गणना के लिए हाल ही में तैयार किए गए एक रेडी रेकनर के लिए कॉपीराइट का इंतजार है.

अपनी कई इन-हाउस सुविधाओं के अलावा विभाग को इस संस्थान के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता का भी लाभ मिलता है.

छात्रों को आइआइटी-रुड़की की कॉमन टिंकरिंग लैब की सुविधा मिल जाती है, जहां वे अपने आइडिया का परीक्षण कर सकते हैं और जिसका इस्तेमाल वे किसी स्टार्ट-अप को खड़ा करने के लिए इक्वूबेशन सेंटर के रूप में भी कर सकते हैं. चानी कहते हैं, ''ज्यादातर छात्र आजकल उद्यमी बनना चाहते हैं.''

संकाय के सदस्य अपनी भागीदारी से, छात्रों को उनके प्रोजेक्ट्स और अनुसंधानों के लिए प्रोत्साहित करते हैं. मिसाल के तौर पर विभाग की प्रोफेसर अवलोकिता अग्रवाल एक वर्चुअल रियलिटी डार्करूम की स्थापना कर रही हैं जो पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित इमारतों तक वर्चुअल पहुंच प्रदान करेगा और अपने इस प्रोजेक्ट में उन्होंने छात्रों को भी शामिल किया है.

एक अन्य संकाय सदस्य गौरव रहेजा समावेशी डिजाइन में माहिर हैं और रक्षा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं. उसी तरह एक अन्य संकाय सदस्य उत्तम रॉय पटना के विकास के लिए 2.4 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की अगुआई कर रहे हैं. एक शहरी डिजाइन विशेषज्ञ राम सतीश आंध्र प्रदेश सरकार के साथ प्रदेश की नई राजधानी अमरावती पर काम कर रहे हैं.

प्रोफेसर राज शेखर के पास उत्तराखंड में ऊर्जा कुशल आवास के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने की 12 करोड़ रु. की एक सहयोगात्मक परियोजना है.

डिपार्टमेंट के 40 छात्रों का एक समूह, विभिन्न कॉलम के जरिए अपने निर्दिष्ट पाठ्यक्रम के दायरे से परे जानकारियों और सूचनाओं का विस्तार कर रहा है. समूह नियमित रूप से संस्थान के और बाहर से आने वाले अतिथि संकायों के व्याख्यान और कार्यशालाओं का आयोजन करता है.

इसके अलावा, विभाग सक्रिय रूप से वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव थॉम्सो और वार्षिक तकनीकी उत्सव कॉग्निजेंस में भाग लेता है. आर्किटेक्चर के छात्र वार्षिक नासा (नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टुडेंट्स ऑफ आर्किटेक्चर) सम्मेलन में भी भाग लेते हैं.

इसके अलावा उन्हें एक शानदार केंद्रीय महात्मा गांधी लाइब्रेरी, जो किसी भी इंजीनियरिंग संस्थान में प्रिंट और डिजिटल दस्तावेजों का सबसे बड़ा संग्रह है, के अलावा छात्रों को मल्टी-एक्टिविटी सेंटर, स्टुडेंट एक्टिविटी सेंटर और एक बड़े दीक्षांत हॉल 'हैंगर' तक पहुंच है जिसका इस्तेमाल कभी जहाज को खड़ा करने के लिए होता था.

आइआइटी-रुड़की में छात्रों और शोधार्थियों के लिए 20 छात्रावास हैं जिनमें शादीशुदा शोधार्थियों के लिए बना हॉस्टल भी शामिल है.

इनमें से प्रत्येक हॉस्टल में हाइ स्पीड वाइ-फाइ की सुविधा है. सभी शैक्षणिक विभागों और कॉमन एरिया को भी मुफ्त हाइ स्पीड वाइ-फाइ की सुविधा से लैस करने के लिए भी काम चल रहा है. ठ्ठ

गुरु वाणी

प्रो. पी.एस. चानी

विभागाध्यक्ष,

आर्किटेक्चर ऐंड प्लानिंग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की

आपके विभाग में अलग या अनूठा क्या है?

रिसर्च और एक ऐसे अकादमिक माहौल पर खासा जोर जो छात्रों को केवल पेशेवर आर्किटेक्ट बनने से कहीं ज्यादा की चाहत के लिए तैयार करता है.

पिछले तीन साल में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?

एनईटी-जेडईडी, समावेशी डिजाइन, वर्चुअल रिएलिटी (आभासी वास्तविकता), सिस्टम डायनेमिक्स, क्षेत्रीय योजना, शहरी डिजाइन और वास्तुकला के रचनात्मक पहलुओं के लिए आठ नई प्रयोगशालाएं शुरू की गईं; इसके अलावा, एनबीसीसी के लिए लो कार्बन कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल्स विकसित करने का प्रोजेक्ट, आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती के डिजाइन से जुड़े काम, पटना शहर का विकास, ठंडे जलवायु वाले इलाकों के लिए ऊर्जा कुशल आवास डिजाइन और निर्माण में स्थानीय सामग्री के उपयोग के क्षेत्र में कार्य हुए हैं

आगे की क्या योजना है?

मौजूदा पाठ्यक्रम की समीक्षा ताकि यह डिजिटल युग के अनुरूप हो और अत्याधुनिक लेजर कटर और 3डी प्रिंटर से सुसज्जित कार्यशालाओं की स्थापना

दीवार पर मायाजाल

जर्मन आर्टिस्ट 1010 दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर (एसपीए) में 3डी वॉल पेंटिंग बनाते हुए

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