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आवरण कथाः राष्ट्र के रोबोट

एक दिन ऐसा हुआ कि सिन्हा ने कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से रोबोटिक्स में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद लॉकहीड मार्टिन समेत अनेक कंपनियों में काम करने और अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के लिए ड्राइवर रहित कार बनाने के बाद हिंदुस्तान लौटने का फैसला किया.

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aajtak.in
श्वेता पुंज/ संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 10 January 2018
आवरण कथाः राष्ट्र के रोबोट आकाश सिन्हा

रिलायंस इंडस्ट्रीज से लेकर रक्षा महकमे तक भारी-भरकम  ग्राहकों की तगड़ी फेहरिस्त के साथ 37 वर्षीय आकाश सिन्हा एक मिशन पर हैं और यह मिशन है तमाम उद्योगों के लिए रोबोट बनाने और उन्हें पूरी तरह हिंदुस्तान में ही बनाने का. साल में तकरीबन 50 ड्रोन से उनका लक्ष्य इसे बढ़ाकर हजार पर ले जाना है.

उनकी कंपनी ओमनिप्रेजेंट टेक ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, गंगा की साफ-सफाई के लिए रोबोट और तमाम बड़ी रिफाइनरियों के लिए ड्रोन बनाए हैं. रक्षा महकमा रोबोटों की जिस फौज पर काम कर रहा है, सिन्हा उसमें अच्छा-खासा योगदान देने की उम्मीद कर रहे हैं.

दिल्ली में रहकर काम कर रही ओमनिप्रेजेंट हर जगह—यानी पानी, हवा, अंतरिक्ष, धरती पर—अपनी मौजूदगी दर्ज करना चाहती है, इसीलिए इसका यह नाम रखा गया है जिसका हिंदी में अर्थ है सर्वव्यापी. मुश्किल से पांच साल पुरानी यह कंपनी आंध्र प्रदेश के सरकार के साथ काम कर रही है जिसने उन्हें स्वदेशी ड्रोन के निर्माण के लिए 20 लाख डॉलर दिए हैं.

कंपनी का रो-बोट (नाव), जो नदियों की सफाई के लिए बनाया गया नदी रोबोट है, पहले ही खासा मशहूर हो चुका है. पचास रो-बोट एक शहर भर लंबे हिस्से को पांच-छह महीने में साफ कर सकते हैं. उन्होंने किसी वित्तीय सहायता या संभावित ग्राहकों के बगैर शुरुआत की थी, उसके बाद कंपनी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से 1 करोड़ रु. मिल चुके हैं. मगर फिर भी वे बड़े पैमाने पर काम  नहीं कर पाए हैं और इसकी मुख्य वजह है निविदाएं जारी करने में सरकार की तरफ से देरी.

सरकार ने निविदाओं का ऐलान किया, पर बाद में उन्हें रद्द कर दिया. सिन्हा को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट का ठेका हासिल करने वाली कंपनी आखिर में इसका साफ-सफाई वाला काम ओमनिप्रेजेंट को आउटसोर्स कर देगी. कंपनी को अपने असरदार नकदी प्रबंधन पर नाज है और उसकी विस्तार की बड़ी योजनाएं हैं. ड्रोनों के रखरखाव के लिए वह हजार के करीब लोगों को प्रशिक्षण भी दे रही है.

आकाश सिन्हा,  37 वर्ष

एक दिन ऐसा हुआ कि सिन्हा ने कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से रोबोटिक्स में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद लॉकहीड मार्टिन समेत अनेक कंपनियों में काम करने और अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के लिए ड्राइवर रहित कार बनाने के बाद हिंदुस्तान लौटने का फैसला किया. देश में जब वे रोबोटिक्स में कोई नौकरी हासिल नहीं कर सके, तो उन्होंने तय किया कि खुद अपना काम करेंगे.

समाधान की तलाश

कुछ नहीं, बस एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहा जिसका तकरीबन एक दशक पहले हिंदुस्तान में अस्तित्व ही नहीं था.

शानदार समाधान

कारोबार में क्षमताओं और रोबोटिक्स की स्वदेशी टेक्नोलॉजी के तकनीकी तजुर्बे का निर्माण करना.

मिली  खुशी

वहां समाधान खोजना जहां वह नहीं है.

संस्थापक

ओमनिप्रेजेंट रोबो टेक

पेशेवर दक्षता

लॉकहीड मार्टिन के साथ रोबोटिक्स इंजीनियर

कार्यस्थल दिल्ली

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