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ऊंचा यहां का दर्जा

साल-दर-साल कॉलेज ने अचूक प्रतिष्ठा हासिल की है और देश के कोने-कोने से बेहतरीन छात्रों को आकर्षित किया है, जिन्होंने एकेडमिक्स, जन नीति, राजनीति और खेल के क्षेत्रों में झंडे गाड़े हैं.

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संध्या द्विवेदीनई दिल्ली, 24 May 2019
ऊंचा यहां का दर्जा एक गीत नया स्टीफंस के छात्र कॉलेज परिसर में फुर्सत के क्षणों में

दिल्ली के यूनिवर्सिटी एन्क्लेव में स्थित सेंट स्टीफंस कॉलेज के मुख्य द्वार से भीतर कदम रखते ही हर चीज कुछ अलग दिखाई देती है. भूतल के कई कमरों और गलियारों में कॉलेज की लाल ईंट की दीवारें आपका स्वागत करती हैं. कैंपस में खूब खुली जगहें हैं. और जैसा कि प्रिंसिपल प्रो. जॉन वर्गीज बताते हैं, ''वे हरी-भरी जगहें भी हैं, उनके होने का एक मकसद है छात्रों को आजादी का एहसास कराना.''

वर्गीज मानते हैं कि हर पेड़ अपने फल से पहचाना जाता है और यह बात कॉलेजों पर भी लागू होती है. सेंट स्टीफेंस जिन मामलों में अपने को अलग मानता है, उनमें से एक है उसके छात्र. साल-दर-साल कॉलेज ने अचूक प्रतिष्ठा हासिल की है और देश के कोने-कोने से बेहतरीन छात्रों को आकर्षित किया है, जिन्होंने एकेडमिक्स, जन नीति, राजनीति और खेल के क्षेत्रों में झंडे गाड़े हैं. सेंट स्टीफेंस उन शुरुआती तीन कॉलेजों में था जिनसे मिलकर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) बना था. क्रिश्चियन मिशन के हाथों हाइस्कूल के तौर पर शुरू सेंट स्टीफेंस 1881 में कॉलेज बना था.

वर्गीज यहां के छात्रों की तीन खूबियां बताते हैं—उत्कृष्टता, सेवा और प्रतिबद्धता. ''यहां आने वाले छात्र अच्छे तो पहले से ही होते हैं, हम उन्हें एक ऐसे स्तर पर ले जाने की कोशिश करते हैं जहां उनके हुनर और विषय के ज्ञान में अच्छा-खासा इजाफा होता है.''

इस साल छात्रों की एक टीम हिमालय के ऊपर स्पीति घाटी गई, जहां एक छोटे-से स्कूल में उन्होंने एक प्रोजेक्ट पर काम किया. यह छात्रों के साथ शिक्षकों के लिए भी सीखने का शानदार तजुर्बा बन गया.

कॉलेज जिन दो-एक अहम पहलों पर जी-जान से जुटा है, उनमें इसे पेपरलेस बनाना भी शामिल है. अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के नए तरीकों की खोज, साथ ही पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने में भारत सरकार को मदद देते हुए कॉलेज ने विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत की शुरुआत की है और उसे बताया है कि वह उसके तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के जरिए आसियान और सार्क में पड़ोसी देशों और साथ ही अफ्रीकी देशों के लिए सीटों की पेशकश के लिए तैयार है.

फिलहाल देश में और बाहर की संस्थाओं के साथ कॉलेज की छह भागीदारियां हैं और वह इसे बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है.

वर्गीज अकादेमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ चौतरफा विकास पर जोर देते हैं. ''हम ऐसे तरीकों की खोज में हैं जिनसे रचनात्मक छात्रों को अच्छे अंक नहीं होने पर भी कॉलेज में लिया जा सके.''

कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया गया है.

गुरुवाणी

प्रो. जॉन वर्गीज,

प्रिंसिपल सेंट स्टीफंस कॉलेज

सेंट स्टीफेंस में अनूठा क्या है?

यहां से निकले छात्रों ने एकेडमिक्स, जन नीति, राजनीति और खेलों में उक्वदा काम किया है. वे यहां आते हैं तो अच्छे होते हैं पर हम उन्हें ऐसे स्तर पर ले जाने की कोशिश करते हैं जहां उनके हुनर और विषय का ज्ञान दूसरों से कहीं ऊंचा हो. हम छात्रों को बाहर जाकर सेवा करने और इसे अपनी ताकत बनाने को प्रोत्साहित करते हैं. प्रतिबद्धता तीसरी ताकत है

आगे क्या?

हम कागजों से मुक्ति पाने की कोशिश कर रहे हैं, केवल पर्यावरण बचाने के लिए ही नहीं बल्कि चीजों को आसान बनाने के लिए भी. हम स्वायत्तता पाने के लिए जी-जान से जुटे हैं क्योंकि इससे हमें नए कोर्स लाने में मदद मिलेगी. फिलहाल कॉलेज की भारत के भीतर और बाहर की संस्थाओं के साथ छह सक्रिय भागीदारियां हैं. मैं इसे बढ़ाना चाहता हूं

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