एडवांस्ड सर्च

ईवीएम पर हंगामे के पीछे निहित स्वार्थ

2019 का आम चुनाव भारत का सबसे बड़ा चुनाव होगा. इसे संपन्न कराने की जिम्मेदारी होगी मुक्चय चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा पर जिन्होंने रोहित परिहार से ईवीएम पर हालिया विवाद और आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति जैसी चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की. बातचीत के मुख्य अंशः

Advertisement
aajtak.in
रोहित परिहार 22 February 2019
ईवीएम पर हंगामे के पीछे निहित स्वार्थ कमर सिब्तैन

2019 का आम चुनाव भारत का सबसे बड़ा आम चुनाव होगा. इसे संपन्न करााने की जिम्मेदारी होगी मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा पर जिन्होंने रोहित परिहार से ईवीएम पर हालिया विवाद और आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति जैसी चुनौतियों के बारे में खुलकर बातचीत की, पेश हैं अंशः

विपक्ष ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्सनीयता पर कई सवाल खड़े किए हैं.

ईवीएम में सुरक्षा के इतने कड़े तकनीकी उपाय लागू किए गए हैं और चुनावों के दौरान हम हर प्रकार के सुरक्षा उपाय तो करते ही हैं. चुनाव नहीं हो रहे होते हैं तब भी मशीनों की सुरक्षा को लेकर इतनी सजगता रखी जाती है कि हेरफेर का कोई सवाल ही नहीं उठता. 2001 के बाद से लगातार अदालती फैसलों ने भी ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ या छेड़छाड़ की संभावना से इनकार किया है.

 क्या ईवीएम में दर्ज वोट को सत्यापित करने के लिए वीवीपीएटी (मतदाता-सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रेल) स्लिप्स के नमूने की जरूरत है?

राज्य चुनावों के मामले में पहले से ही एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में रैंडम तरीके से चुने गए मतदान केंद्रों में ईवीएम में पड़े वोटों की इलेक्ट्रॉनिक गिनती के साथ-साथ वहां वीवीपैट स्लिप का अनिवार्य रूप से सत्यापन किए जाने की व्यवस्था पहले से ही लागू है और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के मामले में उस संसदीय क्षेत्र में पडऩे वाले प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के रैंडम रूप से चयनित मतदान केंद्रों पर पड़े वोटों का स्लिप के साथ मिलान किया जाता है.

आपने बैलेट पेपर (मतपत्रों) को फिर से लागू किए जाने के खिलाफ रुख अपनाया?

भारत में दो दशक से अधिक समय से ईवीएम से निष्पक्ष मतदान चल रहा है, इसलिए बैलट पेपर के युग में वापस लौटने का कोई सवाल ही नहीं है. हम जहां इसे उच्च तकनीक से नीचे की ओर जाना मानते हैं वहीं बैलट पेपर से होने वाले चुनावों में गड़बडियों की बहुत आशंका रहती है.

हाल में आप दबाव की रणनीति और धमकाने के प्रयासों के खिलाफ बहुत सख्त दिखे. क्या आप विस्तार से बताएंगे?

मैंने जनवरी के अंत में चुनाव आयोग की तरफ से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दबाव की रणनीति और धमकाने की कोशिशों की बात की थी. तब मैं लंदन में (22 जनवरी को) सैयद शुजा नामक सर्कस से वास्तव में परेशान था जिसमें वह व्यक्ति दावा कर रहा था कि ईवीएम से छेड़छाड़ कैसे की जा सकती है,

उसे करके दिखाएगा. यह एक पूर्णतः फ्लॉप शो में बदल गया और वह अपना दावा साबित नहीं कर पाया. यह पूरा कार्यक्रम कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थवश आयोजित किया था. चुनाव आयोग ने 22 जनवरी को ही दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. बहुत से नामचीन टेक्नोक्रेट चुनाव प्रक्रिया को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाए रखना सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन अब हमारे ऊपर किसी अन्य देश से दबाव बनाने की रणनीति शुरू हो गई है.

वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने के बारे में कहेंगे?

मतदाता सूची में एक व्यक्ति का नाम कई स्थान पर शामिल होने के पीछे एक बड़ा कारण है देश के भीतर मतदाताओं का प्रवास. ये लोग पिछले पंजीकरणों का खुलासा किए बिना अपना नाम उस नई जगह पर भी शामिल करवा लेते हैं जहां वे अब रह रहे हैं.

क्या पंजीकृत मतदाताओं को भारत और विदेशों में पोस्टल बैलट की सुविधा दी जा सकती है?

मौजूदा कानूनी प्रावधानों के साथ तो अभी संभव नहीं है.

क्या चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है?

अब तक तो बिल्कुल है. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है. इस पर टिप्पणी करना उचित न होगा.

2019 के आम चुनावों में आयोग के लिए काम किस प्रकार अलग होगा?

आकार और पैमाने के लिहाज से आगामी चुनाव 2014 की तुलना में बड़ा होगा. धनबल के उपयोग पर अंकुश लगाना भी एक अन्य बड़ी चुनौती होगी. चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को प्रस्ताव दिया है कि बेनामी दान की सीमा 2,000 रुपए तक हो सकती है और राजनैतिक दलों को कुल चंदे में 20 करोड़ रु. या 20 प्रतिशत इनमें से जो भी कम है, नकद योगदान के रूप में उससे अधिक की राशि नहीं स्वीकार करनी चाहिए. यह भी कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126 (1) के दायरे में प्रिंट और सोशल मीडिया को लाया जाए.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay