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यूपीए सरकार ने भी सर्जिकल स्ट्राइक किए लेकिन कभी ढिंढोरा नहीं पीटा...

फाल्कन विमान में दिल्ली से आगरा तक के सफर में, जहां उन्हें एक रैली संबोधित करनी थी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और सीनियर एसोसिएट एडिटर कौशिक डेका के साथ लोगों के मूड और अर्थव्यवस्था पर अपनी योजना के साथ देश और जनता से जुड़े अनेक मुद्दों पर खुलकर बातचीत की. कुछ अंशः

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राज चेंगप्पा और कौशिक डेकानई दिल्ली, 07 May 2019
यूपीए सरकार ने भी सर्जिकल स्ट्राइक किए लेकिन कभी ढिंढोरा नहीं पीटा... राहुल गांधी

प्र. क्या 2019 का चुनाव ‘न्याय’ और राष्ट्रवाद के बीच युद्ध जैसा है?

नहीं! 2019 का चुनाव तीन या चार अलग-अलग मोर्चों पर लड़ा जा रहा है. पहला, हम घोर बेरोजगारी संकट से जूझ रहे हैं; देशभर में युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है. दूसरा कृषि है; नरेंद्र मोदी की नीतियों ने कृषि को तबाह कर दिया है. तीसरा यह है कि अर्थव्यवस्था में वैसी रफ्तार नहीं दिख रही, जैसी होनी चाहिए थी; लेन-देन नहीं हो रहा है जो स्थिर आर्थिक विकास हमने यूपीए के वर्षों में देखा था, वह ठप्प हो गया है. दो अंतिम मोर्चे जो हैं उनमें से एक तो स्पष्ट है कि मोदी ने राफेल सौदे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है और दूसरा देश के संस्थानों- सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, योजना आयोग वगैरह पर हमले के प्रयास कर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश है, ताकि वे मोदी की राजनीति चमकाने में मदद करें.

लेकिन भाजपा और मोदी ने चुनाव को सुरक्षा, राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति पर चर्चा की ओर मोड़ दिया है.

मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा का इस्तेमाल देश के बड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए करते हैं. युवा बेरोजगार हैं और उन्हें अपना कोई भविष्य नहीं दिखता. यह बहुत बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है. प्रधनमंत्री अपने भाषणों में बेरोजगारी पर अपने रिकॉर्ड के बारे में क्यों नहीं बोलते? क्या बड़े पैमाने पर किसानों की खुदकशी एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है? किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं. तो प्रधानमंत्री ने यह क्यों नहीं कहते कि मैंने आपको वचन दिया था कि मैं 2 करोड़ नौकरियां दूंगा, लेकिन मैं असफल रहा. मैंने वचन दिया था कि मैं हर बैंक खाते में 15 लाख रुपए डालूंगा, मैं असफल रहा. मैंने वचन दिया था कि कृषि को पूरी प्राथमिकता दी जाएगी, मैं उसमें भी असफल रहा. ये असली राष्ट्रीय मुद्दे हैं. वे इन पर क्यों नहीं बोलते हैं?

क्या भाजपा जिस सुरक्षा के मुद्दे को उठा रही है वह देश के सामने वाकई असली खतरा है?

राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि 1990 के दशक में देश में जो कार्यक्रम प्रभावी थे, वे अब असरदार नहीं रहे और मोदी ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. हमने इसे स्वीकार किया है. हमारी नीतियों ने लगभग 2012 तक काम किया. यूपीए के अंतिम दो वर्षों में हम लड़खड़ाने लगे. मोदी वही कर रहे हैं, जो हमने 2012 और 2014 के बीच करने की कोशिश की थी. उन्होंने इसमें एक सनक भरा विचार नोटबंदी जोड़ दिया! किसी भी व्यापारी से पूछें कि ‘गब्बर सिंह टैक्स’ और नोटबंदी ने उसके साथ क्या किया. बड़े व्यापारी, छोटे व्यापारी, किसी से भी पूछे लें.

किसान से पूछिए, चाहे जिससे मर्जी पूछ लीजिए. मोदी को यह विचार कहां से आया कि 500 रु. और 1,000 रु. के नोट को बंद कर देना, देश के लिए फायदेमंद होगा? तो, अर्थव्यवस्था के सामने गहरे संकट मंडरा रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान की आतंकवाद को शह ऐसा मसला है कि हमें उससे 100 फीसदी मजबूती से लड़ने की जरूरत है. लेकिन मैं यह भी चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जवाब दें कि हमारे 45 सीआरपीएफ जवान कैसे मरे? क्या प्रधानमंत्री भारतीय सैनिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार नहीं हैं? वे क्यों नहीं कहते कि मैं अपने सीआरपीएफ जवानों की रक्षा करने में नाकाम रहा?  

उनका कहना है कि अपने कार्यकाल में उन्होंने दो सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं?

बहुत खूब. मनमोहन सिंहजी ने तीन सर्जिकल स्ट्राइक किए लेकिन हमने दुनिया के सामने ढिंढोरा नहीं पीटा. इसका कारण यह है कि हम सशस्त्र बलों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते थे, हमारे सैनिकों की बहादुरी का लाभ नहीं उठाना चाहते थे. यह उनका काम है, उन्हें सलाम करते हैं और उनका आदर करते हैं. हम उनका राजनीतिकरण करके उनका अपमान नहीं करते हैं.

उन तीन सर्जिकल स्ट्राइक का परिणाम क्या रहा?

मैं इस पर बात नहीं करना चाहता कि उसका क्या नतीजा हुआ था. लेकिन जिन लक्ष्यों को निशाना बनाने का लक्ष्य रखा गया था, वह निशाना सटीक लगा था.

भाजपा कहती है कि मुंबई में आतंकी हमले पर यूपीए सरकार जवाबी कार्रवाई की हिम्मत ही नहीं जुटा पाई.

सचाई यह है कि हमने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया था. हमने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया. हमने वही किया, जो करना था, बस हमने उसकी राजनीति नहीं की.

वर्तमान सरकार ने कश्मीर को लेकर सख्त रवैया अपना रखा है. क्या यह कारगर है?

जम्मू-कश्मीर की मुसीबतों का देश के अन्य क्षेत्रों में राजनैतिक फायदा उठाने के अलावा वर्तमान सरकार की जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई नीति नहीं है. आतंकवाद ने तब फिर से जोर पकड़ा जब मोदी ने पीडीपी के साथ अवसरवादी गठबंधन किया. मुझे याद है कि अरुण जेटली से मैंने इस बारे में बात की थी जब वे मुझसे मिलने आए थे. मैंने पूछा था, ‘‘जेटली जी, क्या आपको एहसास है कि आप जम्मू-कश्मीर में क्या कर रहे हैं? यह आग लगाने वाला है.” जेटली जी ने मुझसे कहा, “नहीं ऐसा नहीं है. कश्मीर में शांति है, वहां कुछ भी नहीं होने जा रहा है.” सचाई यह है कि पीडीपी के साथ गठबंधन करके मोदी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पांव पसारने के मौके दे दिए.

आप कश्मीर समस्या से किस प्रकार निपटेंगे?

जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो जम्मू-कश्मीर के लिए काफी सोच-विचार के बाद एक नीति तैयार की गई थी. इसे आकार देने में मेरी भी भूमिका थी और हमने इस पर काम करने में वर्षों लगाए थे. हमने पंचायत चुनाव कराए; हम टाटा जैसे बड़े भारतीय उद्योगपतियों को जम्मू-कश्मीर लेकर गए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को नई दृष्टि और नौकरी मिले. हमने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा. इन कदमों ने हमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ने में मदद की. जब हम 2004 में सत्ता में आए, तब कश्मीर जल रहा था.

जब हम गए, कश्मीर का माहौल शांतिपूर्ण था. मुझे याद है कि श्रीनगर के लिए रोज 50 फ्लाइट उड़ा करती थीं, जो पर्यटकों को कश्मीर लेकर जाती थीं. इसलिए कृपया हमारे रिकॉर्ड और हमारी नीति को देखें, जो न केवल आतंकवाद को कुचलने के लिए बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ जुड़ने के लिए है ताकि उन्हें पता चल सके कि हमारी एक अलग दृष्टि है और यह बहुत बेहतर है. यह भारतीय दृष्टि है. यह लाखों लोगों को गरीबी से निकाल रहा है. इस दृष्टि को अपनाओ, इसमें तुम्हारा भविष्य है.

 भाजपा का मानना है कि अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म कर देने से कश्मीर की समस्या का समाधान हो जाएगा. आपकी क्या राय है?

मैं इन चीजों में नहीं जाना चाहता हूं. मैं सामान्य-सी बात कह रहा हूं कि हम राष्ट्रीय चुनाव लड़ रहे हैं, और जहां तक मैं देख सकता हूं, राष्ट्रीय चुनाव देश का भविष्य तय करते हैं. जो सबसे बड़े मुद्दे देश के सामने चुनौती बने हैं उसमें पिछले 45 वर्षों में बेरोजगारी की उच्चतम दर, अनौपचारिक क्षेत्र का पूरी तरह तहस-नहस हो जाना, छोटे और मझोले कारोबारों का सफाया, कृषि का विनाश, अर्थव्यवस्था का विनाश और हमारे सभी संस्थानों पर हमला है.

मोदी की विदेश नीति को लेकर आप क्या सोचते हैं?

मोदी की कोई विदेश नीति ही नहीं है! वे रोज सनक के आधार पर कार्य करते हुए दिखाई देते हैं. मसलन, वे अफगानिस्तान के दौरे पर जाते हैं और फिर अचानक वहां से पाकिस्तान जाने का फैसला कर लेते हैं. वे यह भी नहीं समझते कि अफगानिस्तान से पाकिस्तान के लिए उड़ान भरकर, वे अफगानिस्तान के लोगों को नकारात्मक संदेश दे रहे हैं और उनके कार्यों ने अफगान सरकार को परेशान कर दिया है. उन्हें विदेश नीति का बुनियादी ज्ञान भी नहीं है. वास्तव में उन्हें लगता है कि विदेश नीति का मतलब है दुनिया के ज्यादा से ज्यादा नेताओं के गले लग जाना!

आप भी नरेंद्र मोदी के गले लगे थे.

वे विदेशी नेता नहीं हैं.

 तो, नरेंद्र मोदी के गले लगने और दूसरे विदेशी नेताओं के गले लगने में क्या अंतर है?

मेरे गले लगने में प्यार भरा था.

आप यह कैसे कह सकते हैं कि जब वे गले लगते हैं तो उसमें प्यार नहीं होता?

मुझे ऐसा ही दिखता है इसलिए मैं कह सकता हूं. उनका गले मिलना अवसरवादी है. मैंने एक पीएम को देखा जिनसे चीजें नहीं संभल रही थीं. मैंने एक ऐसे पीएम को देखा, जो यह महसूस कर रहे थे कि देश को चलाना किसी राज्य को चलाने जैसा नहीं है और वे फंस गए थे. वे एक के बाद एक गलतियां करते जा रहे थे. और मुझ पर गुस्सा कर रहे थे, मुझ पर चिल्ला रहे थे. मुझे उन पर दया आई, उनके लिए प्यार महसूस हुआ. मैंने कहा, मैं आपको गले लगा रहा हूं. इसलिए मैंने उन्हें गले लगाया. गले लगाने में मेरा उनके लिए एक संदेश था, सुनिए, मैं आपका विरोधी हूं, लेकिन देशहित में, मैं आपकी मदद करने के लिए तैयार हूं. मैं आगे बढ़ा लेकिन उन्होंने मुझे दूर कर दिया.

उस गले मिलने के बाद उन्होंने आपकी आलोचना की. और आपने ‘चौकीदार चोर है’ कहना शुरू किया. आप कहते हैं कि आपके मन में उनके प्रति दयाभाव है. आप इन दोनों चीजों में सामंजस्य कैसे बता सकते हैं?

मैं उनके प्रति दयाभाव रखता हूं, लेकिन मैं सच बोलता हूं. मैं सचाई की अनदेखी नहीं कर सकता. सच तो यह है कि पीएम ने अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपए दिए हैं. यह बात आप भी जानते हैं, मुझे भी पता है, पूरा देश जानता है. और अनिल अंबानी ने कभी प्लेन नहीं बनाया! यह भी सच है. मुझे सच बताना है और सचाई यह है कि ‘चौकीदार चोर है’. इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं. इस बात को कहने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है. अगर आपको लगता है ‘एक चोर, चौकीदार है’ कहना बेहतर रहेगा तो मैं ऐसा भी कह सकता हूं.

आप बार-बार कह रहे हैं कि अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपए मिले लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट कहती है कि उन्हें 800 करोड़ रुपए का ठेका मिला है.

राफेल सौदे के सही आंकड़ों को दर्शाने वाले काफी दस्तावेज मौजूद हैं. द हिंदू अखबार ने उन दस्तावेजों को छापा है जिसमें पूरा रक्षा विभाग कह रहा है कि पीएम समानांतर बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने हर एक नियम, हर एक प्रक्रिया को ताक पर रख दिया. रक्षा मंत्री ने कहा, “मुझे इस नए अनुबंध के बारे में जानकारी नहीं है.” पुराना अनुबंध अभी बंद भी नहीं हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री एक नया अनुबंध शुरू कर रहे हैं. इस पर जांच होगी और वे इससे बच नहीं सकते.

तो, क्या कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद आप राफेल सौदे की जांच शुरू कराएंगे?

बेशक! दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा अनुबंध किसी ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया है, जिसने कभी विमान नहीं बनाया है. इसकी जांच तो होगी ही.

भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए क्या कदम उठाएंगे?

विकेंद्रीकरण भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है. आज बहुत ज्यादा शक्ति बहुत कम लोगों के हाथों में केंद्रित है. हमें निर्णय प्रक्रिया को बदलना होगा और हमें व्यवहार में और अधिक पारदर्शी होना होगा. आरटीआइ को मजबूत करना इसके लिए महत्वपूर्ण है. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है.

क्या आप रसूखदार लोगों की जांच कराएंगे?

यह रसूखदारों के पीछे पड़ने का सवाल नहीं है. ऐसा नहीं है कि हम बदला भंजाने लगेंगे और किसी के भी पीछे हाथ धोकर पड़ जाएंगे. कानून हैं, उनका पालन किया जाना चाहिए.

लेकिन यह तभी हो सकेगा, अगर आप सत्ता में लौटें.

हम निश्चित तौर पर सत्ता में आ रहे हैं.

कांग्रेस अकेली या गठबंधन के साथ?

मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं, भविष्य नहीं बांच सकता. लेकिन मोदी चुनाव नहीं जीत रहे, भाजपा चुनाव नहीं जीत रही है. कांग्रेस की अगुआई वाला यूपीए सत्ता में आ रहा है.

भाजपा मतदाताओं से कह रही है उन्हें बहुमत दें. वह मजबूत बनाम मजबूर सरकार का तर्क दे रही है. उनका दावा है कि विपक्ष की गठबंधन की सरकार कमजोर होगी.

इसे समझने में आप मेरी मदद करें. क्या यह एक मजबूत सरकार है जो हमें 45 साल की सबसे ऊंची बेरोजगारी दर के दौर में लेकर आई है? क्या यह एक मजबूत सरकार है, जिसके कार्यकाल में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं? क्या यह एक मजबूत सरकार है जिसे खुद पर भरोसा नहीं है और जो संस्थानों को कुचलने में लगी हुई है? मजबूत सरकार वह होती है जो कहती है कि हां हम आपको नौकरी देने जा रहे हैं. मजबूत सरकार वह है जो देश के लोगों के साथ जुड़ती है. मजबूत सरकार वह है, जो कहती है, ‘सुप्रीम कोर्ट, हम आपको मानते हैं, हम आप पर भरोसा करते हैं, आप जैसा उचित समझें करें. हममें इतनी हिम्मत है कि आपको स्वतंत्र बने रहने देंगे.’ तो, क्या भाजपा सरकार मजबूत है? नहीं, यह एक बेहद कमजोर सरकार है.

सहयोगियों की तलाश में भाजपा कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा तेज निकली.

मैं आप लोगों से बहुत प्यार करता हूं! आपके पास कांग्रेस के लिए अलग नियम हैं, भाजपा के लिए अलग. तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, हमने कई प्रमुख राज्यों में गठबंधन किया है. कुछ राज्यों में गठबंधन सिरे नहीं चढ़ पाया और यह भी ठीक ही हुआ.

सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में गठबंधन क्यों नहीं हुआ?

हम उत्तर प्रदेश में गठबंधन करना चाहते थे, लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को लगा कि उन्हें हमारी जरूरत नहीं है. मैंने उनकी इच्छा का सम्मान किया और कहा कि ठीक है, अकेले लड़ो लेकिन हम भी अपनी जगह हासिल करने जा रहे हैं. मैंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य से साफ कहा है कि हमारा सबसे बड़ा एजेंडा है: यूपी में भाजपा को हराओ.

 पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से बात क्यों नहीं बनी?

ममता बनर्जी भाजपा सरकार का समर्थन करने वाली हैं या धर्मनिरपेक्ष सरकार का? क्या मायावतीजी और मुलायमजी भाजपा का समर्थन करेंगे या धर्मनिरपेक्ष सरकार का? जिस भी तरीके से आप देखें, देश में हर जगह भाजपा को धर्मनिरपेक्ष दलों से हार का सामना करना पड़ रहा है.

दिल्ली में क्या हुआ?

हमने आम आदमी पार्टी के साथ चर्चा की. उनके साथ सीट साझेदारी की एक सहमत बनी थी कि चार पर वह लड़ेंगे, हमारे लिए तीन छोड़ेंगे. और जब मैंने और मेरी पार्टी इस पर सहमत हो गई तो केजरीवाल ने कहा कि वे गठबंधन की बात में अब हरियाणा और पंजाब को भी जोड़ना चाहते हैं.

उनका कहना है कि आप पीछे हटे.

यह सरासर गलत है.

और वे आपको झूठा बता रहे हैं.

जब मैं कुछ कहता हूं तो मैं अपने वचन पर अडिग रहता हूं. आप मेरा पुराना ट्रैक रिकॉर्ड देखें और खुद इस पर फैसला करें.

अगर यूपीए और उसके सहयोगी मिलकर सरकार बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में क्या आप किसी गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री की बात पर राजी होंगे?

मेरा ध्यान भाजपा को हराने और संस्थानों को बचाने पर है. चुनाव के खत्म होने तक देखते हैं, क्या होता है. परिणाम आ जाएं फिर हमारी चर्चा होगी.

शरद पवार ने कहा है कि जो मुख्यमंत्री रहा हो, केवल वही प्रधानमंत्री बन सकता है. क्या यह अनिवार्य शर्त हो सकती है?

यह उनकी राय है. सबकी राय होती है. जहां तक मेरा सवाल है, मेरे सामने अभी एक ही लक्ष्य दिखता है, चुनावों में मोदी और भाजपा को हराकर देश की संस्थाओं की रक्षा करना. मुझे और कुछ नहीं दिख रहा है. अर्जुन की तरह मैं केवल मछली की आंख देख रहा हूं और मैं उस लक्ष्य पर प्रहार करने वाला हूं.

कहा जा रहा है कि आपके पास दो विकल्प थे भाजपा को हराना और अपनी पार्टी को फिर से खड़ा करना. आपने दूसरा विकल्प चुना और आप 2024 को लक्ष्य कर रहे हैं, न कि 2019 को...

हरगिज नहीं! ऐसा कुछ भी नहीं है. हम यह चुनाव जीतने जा रहे हैं. हम चुनाव जोरदार तरीके से जीतने जा रहे हैं. आप लोग इसकी रिपोर्ट नहीं करते हैं, आप लोग इससे उत्साहित नहीं हैं, आपके ऊपर दबाव है. अंदर ही अंदर इस सरकार के खिलाफ एक बड़ी लहर चल रही है. नरेंद्र मोदी और भाजपा का पतन होने जा रहा है.

आपने जिस न्याय योजना का हाल ही में जिक्र किया था, उसके लिए फंड कहां से आएगा?

न्याय योजना में दो चीजें हैं. यह गरीब लोगों को गरीबी की बेड़ियों से बाहर निकालने में मदद करेगी लेकिन, उतनी ही महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था में फिर से जान फूंकेगी. नोटबंदी और खराब जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था की जो सांस रुक गई हैं, उसे फिर से धड़कने में मदद मिलेगी. हमारे सिस्टम में उत्कृष्ट अर्थशास्त्री हैं और उन्होंने कई महीनों तक इस पर काम किया है. यह पैसा मध्यम वर्ग से नहीं लिया जाने वाला है. यह मैं गारंटी देता हूं. इसके लिए एक रुपया भी आप पर कर लगाकर नहीं जुटाया जाएगा. हमने गणना की है, पैसे का इंतजाम राजस्व के वर्तमान स्रोतों से ही किया जा सकता है. सरकारी योजनाओं में अपव्यय को कम करके और सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर मुद्रीकरण से. इसमें से कुछ पैसा अनिल अंबानी जैसे क्रोनी कैपटलिस्टों से आने वाला है.

यह कैसे होगा? यह भी मोदी की उसी बात की तरह तो नहीं है कि विदेशों में छुपा काला धन जब्त कर भारत लाएंगे और हर खाते में 15 लाख रु. डाले जाएंगे?

बिलकुल नहीं! मैं मोदी से विपरीत अपने वादे निभाता हूं. हमने न्याय का एक वित्तीय मॉडल बनाया है और इसका पूरा परीक्षण किया है. मेरी टीम का मानना है कि अर्थव्यवस्था को कोई नुक्सान पहुंचाए बिना इसे लागू किया जा सकता है.

रोजगार सबसे महत्वपूर्ण है. लगता है, कांग्रेस की शुरुआती योजना बहुत सारी सरकारी नौकरियां देने की है.

एक तो हमें अपनी अर्थव्यवस्था के इंजन को फिर से चालू करना होगा ताकि मांग बढ़े और इससे बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर बनाने में मदद मिलेगी. इस तरह हम पहले उस स्तर पर पहुंचेंगे, जहां हमारी अर्थव्यवस्था मोदी के हाथों नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स थोपे जाने से पहले खड़ी थी. न्याय हमारे आर्थिक इंजन को फिर से शुरू करने में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गरीबों के हाथों में नकदी डालकर अर्थव्यवस्था को फिर से संगठित करेगी. वे इसे खर्च करेंगे, जिससे मांग पैदा होगी और हमारी अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकड़ने में मदद मिलेगी.

अब इस बारे में बात करते हैं कि हम उस स्थिति तक पहुंचने के बाद कैसे आगे बढ़ेंगे. भारत दुनिया की कौशल राजधानी है. हर एक जिले में कौशल है, लेकिन हम उनका सम्मान नहीं करते. हम उन कौशलों को अर्थव्यवस्था से जोड़ने के बारे में नहीं सोचते हैं. मूल सिद्धांत विशिष्ट कौशल वाले क्षेत्रों की पहचान करना और उन्हें भारतीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ना है. लोग आइटी को एक बड़ी सफलता की कहानी बताते हैं. वास्तव में क्या हुआ था कि भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का कौशल बेंगलूरू और यहां तक कि सिलिकॉन वैली जैसे शहरों से जुड़ा था और उन्हें अपने कौशल के माध्यम से खुद को साबित करने के लिए एक अवसर दिया गया था. मिर्जापुर या श्रीपेरुंबुदूर जैसे कौशल के हजारों और हजारों केंद्र हैं, जिनमें तरक्की करने और लाखों नौकरियां पैदा करने की क्षमता है.

एक और बात, हम केवल जीडीपी वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं. जीडीपी वृद्धि को रोजगार सृजन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. फिलहाल देश में नए रोजगार पैदा किए बिना जीडीपी वृद्धि वाले विकास की जरूरत नहीं.

इसमें निजी क्षेत्र कहां खड़े होंगे? इस योजना में उनकी भूमिका क्या होगी?

नई नौकरियों के सृजन में निजी क्षेत्र अहम हिस्सेदार है. देश में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के भरपूर विकास की जगह है. हम शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में भारी निवेश करने जा रहे हैं. इससे लाखों नई सरकारी नौकरियां पैदा होंगी. शहरीकृत भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और अधिक मजबूत सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमें निजी उद्यमों को बंद कर देना चाहिए लेकिन विश्वस्तरीय सार्वजनिक, आइआइटी जैसे संस्थानों के लिए जगह है, ताकि निजी खिलाड़ी कह सकें, ‘ओह, ए ग्रेड संस्थान होने के लिए ऐसा बनना पड़ता है’ और वे उस स्तर के संस्थान बनने की आकांक्षाएं पालें.

निजी उद्यमों के निर्माण में मदद करने के लिए, हमने अपने घोषणा पत्र में एक अनूठा विचार रखा है. आज युवा स्टार्ट-अप उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब भी वे किसी व्यवसाय को खोलने की कोशिश करते हैं, तो सबसे पहले उन्हें अनुमति के लिए 15-16 सरकारी विभागों में जाना पड़ता है, जिसका मतलब है कि आमतौर पर उन्हें रिश्वत देनी ही पड़ती है. इसलिए, हमने फैसला किया है कि नया व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकारी अनुमति से तीन साल की छूट दी जाएगी. तीन साल बाद, जब आपके पास 20-30 लोग काम कर रहे होंगे, तब आप आएं और कहें कि अब, मुझे अनुमति चाहिए. हम आपको अनुमति देंगे. हम अपने किसानों, नौजवानों, उद्यमियों की बाधाएं कम करके उन्हें अपनी पूरी क्षमता से विकास का मौका देना चाहते हैं. हमारा मानना है कि इससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे.

आप सार्वजनिक क्षेत्रों के विनिवेश के पक्ष में है या खिलाफ? क्या एयर इंडिया को बंद कर देना चाहिए?

आप मुझे क्षमा करेंगे लेकिन यह पूछना बड़ा बचकाना लगता है कि हम इसके खिलाफ हैं या पक्ष में हैं? हमारे पास सार्वजनिक विनिवेश की नीति है. कुछ चीजों का निजीकरण करना जरूरी है. कुछ अन्य चीजों के लिए बिलकुल नहीं. इसलिए, आप इसके पक्ष में हैं या इसके खिलाफ हैं”, जैसे सवाल नहीं होने चाहिए. यह एक राष्ट्रीय स्तर के नेता से पूछे जाने लायक प्रश्न नहीं है, ऐसे प्रश्न हाइस्कूल के बच्चों से पूछे जाते हैं. अच्छे सवालों के साथ मेरे पास आइए और मैं उनके बेहतर उत्तर दूंगा.

कृषि संकट दूर करने के लिए आपने ऋण माफी की बात की है. लेकिन मोदी आप पर आरोप लगाते हैं कि आपने जिन तीन राज्यों में हाल में ही चुनाव जीते वहां आपने इसे लागू नहीं किया. कृषि को लेकर आपका क्या नजरिया है?

सबसे पहले तो मैं बता दूं कि हमने अपना वादा निभाया है और हमारी सरकारों ने शपथ ग्रहण के 48 घंटे के भीतर कृषि ऋण माफी की आधिकारिक घोषणा की है. जाहिर है, अमल में समय लगता है. दूसरे, हम समझते हैं कि कृषि ऋण माफी कृषि संकट का समाधान नहीं है. यह आत्मविश्वास बढ़ाने वाला उपाय है और हमारा उद्देश्य किसानों को उनके तत्काल दर्द से राहत दिलाना है. तीसरे, किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता है क्योंकि कोई कोल्ड चेन, कोई भंडारण सुविधा, खेतों और खाने की मेज के बीच कोई सीधा जुड़ाव नहीं है. तो, हम खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी का उपयोग करके खेतों को जोड़ें. उन्हें भारतीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के कदम उठाएं. साथ ही, हमें संवेदनशील होना होगा ताकि किसान बुनियादी तौर पर आत्मविश्वास न खोएं.

राजकाज का आपका अपना दर्शन क्या है?

मैं निष्पक्षता पसंद करता हूं. कल मुझे लगेगा कि देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों के साथ गलत व्यवहार हो रहा है, तो मैं उनके लिए काम करूंगा. अगर मुझे लगता है कि किसानों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है, तो मैं उनके लिए काम करूंगा. मैं देश के लोगों के बीच अंतर नहीं करता. मेरा मॉडल है कि जहां मुझे दर्द दिखाई देता है, मैं वहां जाता हूं. कल, सरकारें सबसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ अन्याय करने लगें तो मैं कॉर्पोरेट घरानों की रक्षा करूंगा. मैं देश को इस/उस रूप में नहीं देखता. मैं देश को एक खूबसूरत संधि के रूप में देखता हूं. अपने सामूहिक ज्ञान और हमारी संवाद प्रक्रिया के साथ, हम बहुत शक्तिशाली चीजें कर सकते हैं, जो अन्य देश नहीं कर सकते क्योंकि हम मौलिक रूप से अहिंसा और करुणा में विश्वास करते हैं.

कोई एक चीज आप नरेंद्र मोदी से सीखना चाहें?

एक साथ कई लोगों को विविध मैसेज कैसे दिए जाएं. एक ही समय पर आप किसी और से कुछ कहें और उसी समय किसी और से इसके एकदम विपरीत कैसे कहें! हालांकि, इसमें एक निश्चित मात्रा में छल है, जो मुझे असहज करता है और मैं उसमें सक्षम नहीं हूं. लेकिन यह ऐसा कौशल है जो उनके पास शर्तिया है. यह उनकी बड़ी ताकत है. मेरे लिए 2014 की हार सबसे अच्छी बात थी क्योंकि इसने मुझे सिखाया कि मुझे लोगों के प्रति उदार रहना है, भले ही लोग आपको गाली दे रहे हों और आप पर चिल्ला रहे हों और मार रहे हों. उसे पलटकर मत मारो, उसे गले लगाओ.

कोई आपको गाली दे रहा है, कोई बात नहीं. फिर भी उसका सम्मान करो. एक दिन मैंने नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार देखा, “केवल नरेंद्र मोदी ही नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं!” इसने मेरे दिमाग को सुन्न कर दिया. मुझे ऐसा लग रहा था, “हे भगवान, एक व्यक्ति की विश्व के प्रति ऐसी सोच कैसे हो सकती है?” जब बात किसानी की आएगी तो एक किसान मुझे चुनौती दे सकता है, आप भी मुझे कुछ चीजों में चुनौती दे सकते हैं. कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें मैं जानता हूं, लेकिन मैं सब कुछ नहीं जानता. मैं सर्वज्ञ हूं, यही सनकीपन की परिभाषा है! मैं इनसान हूं.

आपने माता-पिता से नेतृत्व के कौन से गुर सीखे?

फिर, एकांगी, साधारण सवाल. नेतृत्व परिवर्तनशील होता है. पांच साल पहले कारगर था, वह अब काम नहीं करता. नेतृत्व “सुनना” है. आपको बात पसंद नहीं आ रही है, फिर भी आप सुनें. जो आपको परेशान कर रहा है, तो उसे और ज्यादा सुनो. कोई आपका अपमान करता है तो प्रयास करिए समझने कि वह ऐसा क्यों कर रहा है. यह एक गतिशील प्रक्रिया है, यह सीखने की प्रक्रिया है.

तो, आपने माता-पिता से कौन-से मूल्य सीखे हैं?

सबके साथ प्रेम करना. और कुछ मायने नहीं रखता. सबसे प्यार करो. अपने विरोधी, प्रियजन, दुश्मन, आपसे घृणा करने वाले लोग, जानवर. इस संसार से प्यार करिए क्योंकि यह खूबसूरत शय है!

आप फिटनेस को लेकर बहुत सजग रहते हैं. जो लोग फिट रहना चाहते हैं उनके लिए आपका क्या सुझाव है?

जिद. कभी-कभी मैं अपने दोस्तों को सिखाता हूं कि कैसे दौड़ना है और वे कहते हैं मैं 5 किलोमीटर नहीं दौड़ सकता. मैं कहता हूं, पागल मत बनो, तुम फिलहाल 5 किमी नहीं दौड़ सकते, लेकिन तुम 5 किमी दौड़ सकते हो, अगर तुम लगातार दौड़ने का अभ्यास जारी रखो, तो हम तुम्हें 5 किमी से 10 किमी, फिर 20 किमी और 200 किमी तक दौड़ाएंगे! लेकिन इस विचार के साथ शुरुआत न करें कि मुझसे नहीं हो पाएगा.

आप ऐसा कर सकते हैं. यह सब जिद है. यह रोजमर्रा की जिंदगी में भी लागू होता है. सभी ने मुझे बताया कि नरेंद्र मोदी को हराया नहीं जा सकता. मैंने कहा, “हां, आप ऐसा मानते हैं?” मैंने पूछा, मुझे बताओ कि नरेंद्र मोदी की ताकत क्या है? उन्होंने कहा, उनकी ताकत (भ्रष्टाचार मुक्त) छवि है. मैंने कहा, “ठीक है, मैं उनकी इस ताकत को तार-तार करने जा रहा हूं.” और मैंने यह कर दिखाया है. जिद, मेरे दोस्त! चलते रहें और चलते रहें. और मैं भी चलता रहूंगा, जब तक कि राफेल की सचाई सामने नहीं आ जाती!

 मां और बहन में आप पहले किस पर भरोसा करते हैं?

मैं मां और बहन से अलग-अलग चीजों के बारे में सलाह लेता हूं. लेकिन, आम तौर पर मैं काफी खुला हूं.

कोई प्राथमिकता?

मेरी मां मेरी बहन है. मेरी बहन मेरी मां है. दोनों एक ही हैं, दोनों मेरे लिए एक जैसा संबल है. वे अलग नहीं हैं.

लेकिन आपने प्रियंका को पहले राजनीति में आने से क्यों रोक दिया? और अब उन्हें क्यों उतारा?

प्रियंका के बच्चे जब छोटे थे, तब उन्होंने राजनीति से दूर रहकर अपना ध्यान उनकी परवरिश पर लगाया. अब जब उनके बच्चे बड़े हो गए हैं और यूनिवर्सिटी जा रहे हैं तो उन्हें लगा कि वे राजनीति में भूमिका निभा सकती हैं.

जब आपने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला, तो मंच पुराने कांग्रेसियों से भरा था और आपने कहा था कि आप मंच को खाली कर देंगे और युवाओं को शीर्ष पर पहुंचने का रास्ता तैयार करेंगे. फिर भी, जिस दिन प्रियंका शामिल हुईं, वह महासचिव बन गईं और उन्हें सीडब्ल्यूसी में शामिल किया गया. तो कुछ लोगों के लिए जो कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं उनके लिए एक अलग सिस्टम है जहां वे सीधे सीडब्ल्यूसी में पहुंच जाते हैं और दूसरे लोगों के लिए अलग जहां उन्हें एक तरक्की के लिए वर्षों तक नारेबाजी करनी होती है. आप इसे कैसे सही ठहराएंगे?

जब आप देखेंगे तो आपको लगेगा कि यह कहना कि मैं मंच को खाली करूंगा, प्रेरणादायक और बड़ा आसान है. लेकिन यह एक लड़ाई है, एक युद्ध है. यहां वास्तविक संघर्ष है. और मेरी बहन उस लड़ाई में एक पूंजी है. मैं अपनी बहन को अपनी बहन के रूप में नहीं देखता, मैं उसे एक ऐसी पूंजी के रूप में देखता हूं जो उस खाली जगह को भरने में सक्षम होगी. कांग्रेस में उसके जैसी कई अन्य प्रतिभाएं हैं.

आपने राजस्थान और मध्य प्रदेश में सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेताओं को सत्ता क्यों नहीं सौंपी?

बड़ी संख्या में ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने बहुत समय दिया है, पार्टी के लिए बलिदान दिया है और उनके पास बहुत ज्ञान और अनुभव है. जबरदस्त ऊर्जा और क्षमता वाले कुछ बेहद प्रतिभाशाली युवा नेता भी हैं. मैंने पहले अनुभव को तरजीह दी और कुछ समय बाद, युवा ऊर्जा को मौका दिया जाएगा.

वायनाड और अमेठी, दोनों सीटें जीतते हैं तो दोनों में से कौन सी सीट रखेंगे?

मैंने अभी इस पर कुछ सोचा नहीं है. मैं इस पर समय आने पर फैसला करूंगा.

क्या आपने दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला अमेठी में हारने की आशंका के चलते किया?

बिल्कुल नहीं. अमेठी मेरा परिवार है. हालांकि, जब मैं अपने जीवन में पहली बार तमिलनाडु गया, तो मैंने महसूस किया कि वहां के लोग पूछ रहे थे कि क्या देश में हमारा समान अधिकार है? यह भावना पूरे दक्षिण भारत में है. जिस क्षण मैंने इसे महसूस किया मैंने कहा, मुझे दक्षिण से लड़ना है. मुझे दक्षिण को यह बताना है कि नहीं, आप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना उत्तर है. यही वजह है कि मैंने केरल से लड़ने का विकल्प चुना.

नरेंद्र मोदी ने अक्षय कुमार को बताया कि उन्हें आम पसंद हैं, इसलिए हम जानना चाहते हैं कि राहुल गांधी को कौन-सा स्वाद या फल पसंद है?

मैं विपश्यना करता हूं. मन फल के स्वाद का निर्णय करता है. आप जिस भी फल को चाहें उसे पसंद या नापसंद कर सकते हैं. आप आम को पसंद करना चुन सकते हैं, आप इसे नफरत करना चुन सकते हैं. आप गरीब लोगों को पसंद करना चुन सकते हैं, आप उनसे नफरत करना चुन सकते हैं. आप अपने दिमाग में हर चीज का निर्माण करते हैं. मन ही सब कुछ तय करता है. मैं किसी से घृणा करना शुरू कर सकता हूं, लेकिन थोड़ी बातचीत के बाद, मैं उसकी नजरों से चीजों को देखना शुरू करूंगा, और फिर मुझे लगेगा कि वास्तव में तो यह व्यक्ति मुझे पसंद है; वह तो बहुत अच्छा इनसान है.’ लेकिन आपके प्रश्न का उत्तर देना हो तो मैं कहूंगा: मुझे आम पसंद है, मुझे केले पसंद हैं, मुझे गाजर कभी पसंद नहीं थी, लेकिन अब मैं पसंद करता हूं. मुझे कभी अस्परैगस पसंद नहीं था, लेकिन मैं अब करता हूं.

क्या आप प्रधानमंत्री बनना चाहेंगे?

इसका फैसला करने वाला मैं कौन होता हूं?

यानी, माना जाए कि आप प्रधानमंत्री बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं?

मैं फिर कहूंगा कि इसका फैसला करने वाला मैं कौन हूं? लगभग 90 करोड़ लोग वोट डाल रहे हैं, यह उन्हें तय करना है. वे जो भी चुनते हैं, मैं उससे खुश हूं. सच कहूं तो 23 मई को देश जो फैसला सुनाएगा, वही सही फैसला होगा, चाहे वह फैसला कुछ भी आए. यही सही फैसला है और मैं इसका सम्मान करूंगा. यही भारतीय होने का तात्पर्य है.

इसलिए नहीं, जैसा कि मोदी कहते हैं, आप नामदार हैं, वंशवादी हैं?

यह एकपक्षीय है. मेरे परिवार के सदस्य राजनीति में हैं, लेकिन उनका अनुभव मेरा अनुभव नहीं है. मेरा अनुभव जबरदस्त संघर्ष और हिंसा का रहा है. मैंने अपने पिता और दादी की मौत देखी है, मैंने चुनाव जीते और हारे हैं. आप मेरे पूरे अनुभव को एक शब्द में कैसे समेट सकते हैं? मैं जो हूं मुझे उससे समझें, उससे परखें. मेरी बात ध्यान से सुनें और जो मैं हूं उसके आधार पर मेरा मूल्यांकन करें.

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इस बात का जवाब मिलना चाहिए कि दुनिया का सबसे बड़ा डिफेंस काॅन्ट्रैक्ट किसी ऐसे शख्स को कैसे दे दिया गया जिसने कभी एक एयरक्राफ्ट भी नहीं बनाया

क्या यह मजबूत सरकार है जो हमें 45 साल की सबसे ऊंची बेरोजगारी दर के दौर में ले आई है? किसान आत्महत्या कर रहे हैं और संस्थाएं कुचली जा रही हैं

न्याय से अर्थव्यवस्था में जान आ जाएगी. और एक रुपया भी आपके टैक्स से नहीं लिया जाएगा. रकम मौजूदा राजस्व संसाधनों और सरकारी परिसंपत्तियों से ही जुटाया जाएगा

हम जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कुचलना चाहते हैं लेकिन अलग दृष्टि से लोगों से जुड़ना भी चाहते हैं, ताकि वे गरीबी से निकलने के हमारे नजरिए को अपनाएं

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