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फुरसत-ड्राइंग से ही मेरा अस्तित्व है

मुंबई की नलिनी मलानी 50 साल से आर्ट में योगदान दे रही हैं. निराश्रितों और बेआवाज लोगों के प्रति संवेदना जताने से लेकर मंटो और पौराणिक कथाओं तक, उनके आर्ट में सब कुछ है.

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aajtak.in
चिंकी सिन्हा मुंबई, 26 June 2019
फुरसत-ड्राइंग से ही मेरा अस्तित्व है कलाकार नलिनी मलानी की कृति उबू रॉय (2018)

मुंबई की नलिनी मलानी 50 साल से आर्ट में योगदान दे रही हैं. निराश्रितों और बेआवाज लोगों के प्रति संवेदना जताने से लेकर मंटो और पौराणिक कथाओं तक, उनके आर्ट में सब कुछ है. हाल ही में 70,000 यूरो (54.5 लाख रु.) के जोन मिरो पुरस्कार से सम्मानित इस पथ-प्रदर्शक कलाकार ने आर्ट में अपने काम को लेकर बातचीत की:

यह पुरस्कार आपके लिए क्या मायने रखता है?

पुरस्कार एक आर्टिस्ट फाउंडेशन की ओर से मिला है जिसे कलाकार जोन मिरो ने स्वयं अपने जीवनकाल में शुरू किया था. मीरो की कला 1970 के दशक से ही बहुत महत्वपूर्ण रही है जब मैं पेरिस में एक छात्रा थी.

मौजूदा 58वें वेनिस बाएनाले में लगी अपनी प्रदर्शनी रोथको इन लैंपेड्यूसा के बारे में हमें कुछ बताइए.

यह उन प्रवासियों के बारे में है जिन्होंने अपने मेजबान देश में अच्छा प्रदर्शन किया है. मार्क रोथको उसकी मिसाल हैं.

आप अपने काम में कहानियों को 'फिर से' कैसे गूंथती हैं?

मैं ऐसी कहानियां चुनती हूं जिसे लोग पहले से जानते हों. यह संवाद के लिए हमारा लिंक बनाने का काम कर देता है. मेरे लिए, कला तीन-पक्षीय है—कलाकार, कला और दर्शक. तीनों एक साथ मिलकर कला कार्य को 'जाग्रत' कर देते हैं.

आपके चुने विभिन्न माध्यम—प्रदर्शन, ड्राइंग, वीडियो—आपके काम में एक साथ कैसे आए?

ड्रॉइंग से ही मेरा अस्तित्व है. ड्रॉइंग और पेंटिंग मेरे कीबोर्ड हैं जिनके सहारे मैं धुनें बनाती हूं. संवाद में मेरी यह जरूरत है और उसी के आधार पर अपनी कला के लिए सामग्री को तय करती हूं.

अभी आप किस पर काम कर रही हैं?

मैं एक नए वीडियो प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूं. मेरे चरित्र दुनिया के हालात को लेकर चिंतित हैं.

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