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नुस्खा अपनी मदद का

मंदिरा बेदी, अभिनेत्री, एंकर, मां और डिजाइनर, 2020 में आ रही किताब हैप्पी फॉर नो रीजन के साथ लेखिका

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी मुंबई, 09 August 2019
नुस्खा अपनी मदद का मिलिंद उत्तम शेल्टे

आखिर संस्मरणों की ही किताब क्यों?

संस्मरण से ज्यादा यह लाइफस्टाइल की किताब है. इसमें मौके गंवा देने, अपने को फिर से खोजने-खंगालने के अलावा फिटनेस और मेरे सबसे पसंदीदा विषय पर बात होती है और वह है: एहसान, आभार.

तो इसमें पाठकों के लिए क्या खास होगा?

जो चीजें मेरे लिए मायने रखती थीं और जिन चुनौतियों को मैंने झेला, उन पर किताब में बात की गई है. मुझे उम्मीद है कि इसमें सबके लिए कुछ न कुछ होगा पढऩे को. बेवकूफ अपनी गलतियों से सीखते हैं और चतुर लोग दूसरों की गलतियों से. यह किताब पढऩे वालों को मेरी गलतियों से सीखने दीजिए.

कोई खास मुश्किलें थीं जिनकी वजह से होलिस्टिक लाइफस्टाइल की ओर बढ़ीं?

चुनौतियां किसकी जिंदगी में नहीं होतीं? वजन को लेकर मुश्किल रही, और भी कई खराब दौर आए. एंटरटेनमेंट के पेशे में होने की वजह से असुरक्षा भी चुनौती थी. गुस्सा बहुत आता था. अच्छा इनसान बनने के लिए अच्छी-खासी मेहनत की है मैंने.

क्रिकेट एंकर वाले दिनों को याद करती हैं? फिर से उधर जाना चाहेंगी?

क्रिकेट एंकरिंग (2003-2015) में मुझे बहोत...मजा आया. सो चैनल ने जब ब्रॉडकास्ट के लिए मुझे बुलाना बंद किया तो मेरा तो जैसे कलेजा ही फट गया. पर धीरे-धीरे उस गम को पिया मैंने. अब जब मैं महिला क्रिकेट एंकर्स को देखती हूं तो खुशी होती है कि चलो, मेरा बनाया रास्ता काम आ रहा है. अब मैं फिल्मों और वेब शो में रोल कर रही हूं. एक साड़ी लेबल है और मैं एक व्यस्त कामकाजी मां हूं. अब तो क्रिकेट एंकरिंग के लिए बुलाने पर भी शायद ही जा सकूं.

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