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''नॉन स्टेट ऐक्टर्स से खतरे वास्तविक और आसन्न हैं''

नौसेना ने ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता में रखा है जिनसे अहम जरूरतों को कम समय में पूरा किया जा सके

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aajtak.in
संदीप उन्नीथननई दिल्ली, 09 December 2019
''नॉन स्टेट ऐक्टर्स से खतरे वास्तविक और आसन्न हैं'' नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह

ग्यारह साल पहले, मुंबई पर हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया था. उस भयावह हमले के एक दशक बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह का कहना है कि समुद्री हमलों का खतरा अभी भी उतना ही है. कार्यकारी संपादक संदीप उन्नीथन के साथ उनकी बातचीत के प्रमुख अंश:

आपने 27 अगस्त को कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद अपने गुर्गों को पानी के भीतर से आकर हमलों के लिए प्रशिक्षित कर रहा है. आपके पास इसमें शामिल पाकिस्तानी सत्ता के अंगों की उपस्थिति के बारे में खुफिया जानकारी है?

इस आशय की खुफिया सूचना पिछले कुछ समय में अलग-अलग मौकों पर मिली है. इस तरह का प्रशिक्षण राज्यसत्ता की भागीदारी के बगैर मुमकिन नहीं.

नॉन स्टेट ऐक्टर्स की ओर से किसी भारतीय सामुद्रिक संपत्ति पर हमले की स्थिति में आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी?

ऐसी किसी भी गुस्ताखी पर हमारी प्रतिक्रिया तगड़ी और यथोचित होगी.

नॉन स्टेट ऐक्टर्स की ओर से पैदा किए जा रहे खतरे सरकारी समर्थन या उसके बिना कितने गंभीर हैं?

ये खतरे वास्तविक और आसन्न हैं. हमारे समुद्रतट और समुद्रतल पर नॉन स्टेट ऐक्टर्स की ओर से खतरों के बारे में खुफिया जानकारियां लगातार बढ़ी हैं. यह समुद्री एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है. तटीय सुरक्षा में भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक, राज्यों की समुद्री पुलिस और अन्य एजेंसियां शामिल हैं जो तटवर्ती और समुद्रतल वाले क्षेत्रों में कई स्तरों पर उपस्थिति बनाए रखती हैं. आकलन और खुफिया सूचना के आधार पर लक्ष्य करके कार्रवाई का तंत्र समय के साथ ज्यादा चाक-चौबंद हुआ है. हम समुद्र के भीतर या समुद्र से आने वाले किसी भी खतरे का कम समय में जवाब देने में सक्षम हैं.

इस साल के शुरू में पहली बार भारतीय नौसेना ने साझेदार एजेंसियों के साथ अखिल भारतीय तटरक्षा अभ्यास किया था. यह सभी हितधारकों को शामिल करने वाला भारत का शायद पहला और सबसे बड़ा समुद्री अभ्यास था.

भारतीय नौसेना का 20-मीटर से कम आकार वाली नौकाओं के लिए प्रस्तावित ट्रांसपोंडर प्रणाली का परीक्षण कामयाब हो चुका है. उम्मीद है, इसे जल्द ही चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. हम राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (एनएमडीए) परियोजना के माध्यम से व्यापक समुद्री क्षेत्र जागरूकता के मसले को आगे बढ़ा रहे हैं. विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए भागीदार एजेंसियों के साथ हम मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को कारगर बनाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं. हम समुद्रतट और समुद्रतल पर सुरक्षा में उपयोग होने वाले अपने उपकरणों को लगातार उन्नत करने और आसन्न खतरे से मुकाबले की योजना पर भी काम कर रहे हैं.

समुद्र पर गश्त करने वाले तीन बेहद जरूरी नौसैनिक पोत रिलायंस नेवल ऐंड इंजीनियरिंग में अधबने पड़े हैं. क्या इनकी मरम्मत किसी दूसरे शिपयार्ड में ले जाकर पूरी करवाने की योजना है?

ऐसी पांच पोतों की निर्माण परियोजनाओं के रूप में मेसर्स आरएनईएल का यह पहला युद्धपोत निर्माण अनुबंध है. यार्ड को पहला पोत नवंबर 2014 में देना था. हम इस मामले के शीघ्र निराकरण के लिए लगातार इस शिपयार्ड से बातचीत कर रहे हैं.

अपने बेड़े को मानव रहित हवाई वाहनों से लैस करने के आपके प्रयास कितने सफल रहे हैं? आपके मुताबिक कितने समय में यह सच हो जाएगा?

भारतीय नौसेना ऐसे मिनी रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स की खरीद के मामले में प्रगति कर रही है जो पोर्टेबल कैटापल्ट लॉन्चर और एरेस्टर वायर/नेट रिकवरी सिस्टम का उपयोग करते हुए पोतों से प्रक्षेपित और रीकवर किए जा सकेंगे. इन नेवल शिप बॉर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (एनएसयूएएस) से निगरानी, कम तीव्रता वाली समुद्री कार्रवाइयों, खोज और बचाव अभियानों तथा युद्ध क्षति आकलन अभियानों के मामले में भारतीय नौसेना की क्षमताएं बढ़ जाएंगी.

मौजूदा बजटीय संकट के बीच आपने लघु, मध्यम और दीर्घकालिक आवश्यकताओं के मद्देनजर जरूरी अधिग्रहणों को कैसे तर्कसंगत बनाया है?

नौसेना ने ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता में रखा है जिनसे अहम जरूरतों को कम समय में पूरा किया जा सके.

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