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राजनीति सत्ता तक पहुंचने के लिए है

गोवा में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों के भाजपा में शामिल होने के साथ पार्टी को अब गोवा विधानसभा में कुल 40 में से 29 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. किरण डी. तारे को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधायकों के इस दलबदल को उचित ठहराते हुए कहा कि सुशासन सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण बहुमत जरूरी था. कुछ अंश:

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aajtak.in
किरण डी. तारे नई दिल्ली, 24 July 2019
राजनीति सत्ता तक पहुंचने के लिए है मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत

आप विधायकों के इस तरह दलबदल कराने को कैसे उचित ठहराएंगे?

वे बिना किसी शर्त के अपने निर्वाचन क्षेत्रों के बेहतर विकास के लिए हमारे साथ आए हैं. और जैसा कि उन्होंने दो-तिहाई (पार्टी के विधायकों की संख्या) की बाधा पार कर ली है इसलिए उन्हें शामिल करने के लिए हमें चुनाव में जाने की आवश्यकता नहीं है. इससे हमें बेहतर सरकार देने में मदद मिलेगी.

क्या भाजपा की अगुआई वाली गठबंधन सरकार के लिए खतरा था?

इससे पहले हमारे पास पूर्ण बहुमत नहीं था. ऐसे में हमेशा किसी न किसी तरह का खतरा बना ही रहता है.

आपके एक मंत्री माइकल लोबो ने कहा कि भाजपा के कुछ सहयोगी अहंकारी हो गए थे. क्या यह कांग्रेसियों को शामिल करने का एक कारण था?

इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा.

क्या गठबंधन सरकार होने के कारण सरकार के काम पर प्रभाव पड़ रहा था?

कभी-कभी आप गठबंधन की सरकार होने के कारण अपने एजेंडे के साथ आगे नहीं बढ़ सकते हैं. गठबंधन के सामने बहुत-सी बाधाएं आती हैं जिसे लगातार पार करना होता है.

आप सरकार में एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो मूल रूप से भाजपाई हैं. अन्य सभी किसी न किसी समय कांग्रेस में रहे हैं. आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं?

यह देखने का सही नजरिया नहीं है. नीलेश कैबरल, माइकल लोबो और अलीना सलदान्हा जैसे लोग भाजपा के टिकट पर चुने गए थे. मैं हमेशा संगठन का आदमी रहा हूं. हर किसी को वह अवसर नहीं मिलता.

अभी दो महीने पहले पणजी विधानसभा उपचुनाव के दौरान आप बाबूश मोनसेरेत (तब कांग्रेस के उम्मीदवार) पर बहुत हमलावर थे. अब वे भाजपा में आ गए हैं. आप इसे कैसे सही ठहराएंगे?

वह राजनीति थी. वे तब हमारे विरोधी थे. अब जनता ने उन्हें चुना है. अंतत:, राजनीति जनता के फैसले पर आधारित होती है.

बाबूश ने हाल ही में आपके राजनैतिक आदर्श, दिवंगत सीएम मनोहर पर्रीकर को गोवा का सबसे नकारात्मक नेता बताया था. क्या आपको लगता है कि वफादार भाजपा कार्यकर्ता उन्हें स्वीकार करेंगे?

पार्टी कार्यकर्ता के रूप में तो यह बहुत कठिन है. लेकिन अंतत: हम राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए हैं. यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. भाजपा कार्यकर्ता इसे समझेंगे. सत्ता की राजनीति में समझौता आवश्यक है.

चर्चा है कि 'आयातित' विधायक एक प्रेशर ग्रुप बनाएंगे और सरकार को अपनी धुन पर नाचने के लिए मजबूर करेंगे...

अगर उन्हें हमारी विचारधारा, हमारे संकल्प पर यकीन नहीं होता तो वे भाजपा में नहीं आते. उनकी एक अलग पहचान हो सकती है, लेकिन भाजपा में मिल जाने के बाद वे हमारी विचारधारा के साथ पूरी तरह ढलेंगे.

पूर्ण बहुमत की सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर आपकी क्या प्राथमिकताएं हैं?

सुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है. हम पणजी के पट्ट में एक प्रशासनिक भवन का निर्माण करने जा रहे हैं जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होगा.  

आपके डिप्टी चंद्रकांत कावलेकर को मटका (सट्टेबाजी) किंग कहा जाता है...

लोगों पर कई आरोप लगाए जाते हैं. सारे सच नहीं होते. उनके खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं वे राजनीति से प्रेरित हैं.

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