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राजकुमार रावः हर दिल अजीज

 ''मैं असुरक्षित नहीं हूं. मैं चाहता हूं कि मेरे साथी अदाकार मुझसे बेहतर करें. वे जितना बेहतर काम करेंगे, मैं भी उतना ही बेहतर करूंगा." 

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aajtak.in
सुहानी सिंह मुबंई, 06 September 2017
राजकुमार रावः हर दिल अजीज दानेश जस्सावाला

यह भूलना तो खैर आसान है कि राजकुमार राव बरेली की बर्फी के हीरो नहीं हैं. पर उनका रुखाई से ''हल्लौ" और दब्बूपने से ''ठीक था ना" कहना दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देता है. खुद को मर्दानगी भरा मानने को मजबूर किए गए भोले-भाले प्रीतम विद्रोही के किरदार में वे इस कदर दिल जीत लेते हैं कि दर्शक चाहते हैं, आखिर में लड़की उन्हें ही मिले. बर्फी अकेली फिल्म नहीं है जिसमें राव ने इस साल शानदार काम किया है. ट्रैप्ड में उन्होंने गगनचुंबी इमारत में अकेले छोड़ दिए गए आदमी की कहानी में खासा तनाव पैदा कर दिया था. 2017 में और भी बहुत कुछ आने वाला है.

सितंबर के मध्य में वे बायोपिक ड्रामा ओमेर्टा के प्रोमोशन के लिए टोरंटो जा रहे हैं. इस फिल्म में उन्होंने ब्रिटेन में जन्मे उस दहशतगर्द का किरदार निभाया है जिसने 2002 में अल कायदा के लिए पत्रकार डेनियल पर्ल को अगवा किया था और जिसकी वजह से आखिरकार पर्ल की हत्या कर दी गई थी. लौटकर राव ब्लैक कॉमेडी न्यूटन के प्रोमोशन में जुट जाएंगे. इसमें वे नए-नवेले आदर्शवादी सरकारी अफसर का किरदार अदा कर रहे हैं, जिसे छत्तीसगढ़ के माओवादी क्षेत्र में चुनाव करवाने का जिम्मा सौंपा जाता है. एएलटी बालाजी के लिए सुभाष चंद्र बोस की जिंदगी पर आधारित वेब सीरीज के आखिरी एपिसोड तो वे पूरे कर ही रहे हैं.

ये तमाम किरदार खास तौर पर उनके लिए लिखे गए हैं, पर 33 बरस के राव तारीफ से फूल जाने वाले शख्स नहीं हैं. वे कहते हैं, ''मैं यह सोचना भी नहीं चाहता कि मेरे लिए किरदार लिखे जाने लगे हैं. अब भी मेरी जिज्ञासा ''इसके बाद क्या" की है. सब कुछ पलों में गुजर जाने वाला है. साल-दो साल बाद ऐसा न हुआ, तब?"

ऐसी तो कोई वजह नहीं. राव हर किसी के दुलारे हैं. दर्शक उनके किरदारों के हालात से खुद को जोड़ पाते हैं, चाहे वह डर (रागिनी एमएमएस) हो या असुरक्षा (बर्फी), बेचारगी (ट्रैप्ड) हो या धोखा (लव सेक्स और धोखा), छल (क्वीन) हो या फिर दृढ़ता (शाहिद). वे थोड़ा ओझल रहकर भी खुश हैं. ''मैं असुरक्षित नहीं हूं. मैं चाहता हूं कि साथी अदाकार मुझसे बेहतर करें. वे जितना बेहतर काम करेंगे, मैं भी उतना ही बेहतर करूंगा." क्वीन, बर्फी और काइ पो चे में भी यह साफ जाहिर था. सब में जितनी देर वे परदे पर रहे, अपनी मौजूदगी का एहसास करवाया. वे कहते हैं, ''अभिनेता की सोच यह नहीं हो सकती कि किसके पास ज्यादा गाने हैं या लड़की किसे मिलती है. मुझे लगा कि प्रीतम विद्रोही जबरदस्त किरदार है. इसमें अदाकारी से जान डाली जा सकती है. ऐसा रोल मैंने पहले नहीं किया था."

दिलचस्प है कि दिल्ली में थिएटर से शुरुआत करते वक्त वे हीरो ही बनना चाहते थे. पर पुणे में भारतीय फिल्म और टेलीवजन संस्थान (एफटीआइआइ) से अभिनय की पढ़ाई करते वक्त उनकी धारणा बदल गई. ''एफटीआइआइ ने मुझे अपने हुनर पर काम करने का वक्त और जगह दी. मेरे भीतर यथार्थवाद को जगाया." वे उस वर्कशॉप को याद करते हैं जिसमें फिल्मकार-अभिनेता रजत कपूर ने उनसे कहा थाः ''शांत, शांत. यहां कुछ साबित नहीं करना है. यह कोई जंग नहीं. इतना तनाव में क्यों हो? बस अभिनय करो."

एफटीआइआइ में राव का तआरुफ रॉबर्ट डुवाल, डेनियल डी लुइस और फिलिप सैमूर हॉफमैन सरीखे अभिनेताओं के काम से हुआ. उन्हीं की तरह राव स्वतंत्र अभिनय से मुख्यधारा की फिल्मों की ओर जाना चाहते हैं. वे कहते हैं, ''मुझे पक्का भरोसा है कि मैं कमर्शियल फिल्म कर सकता हूं. उनमें भी मैं इतनी ही लगन और ईमानदारी से अभिनय करूंगा." आने वाली वेब सीरीज बोस में उन्होंने सिर का अगला हिस्सा मुंडवाया है और 12 किलो वजन भी बढ़ाया है.

2017 में उनकी कई शानदार फिल्में आनी हैं, इसके बावजूद उनका ध्यान इसी पर टिका है कि उन्हें अभी और क्या हासिल करना है. ''इतने सारे किरदार हैं जो मैं करना चाहता हूं." वे कई अजीबोगरीब किरदारों का जिक्र करते हैं, मसलन वे जो जॉनी डेप ने फियर और लोदिंग इन लास वेगास में, ब्रैड पिट ने स्नैच में और हीथ लेजर ने द डार्क नाइट में निभाए थे. वे कहते हैं, ''मैं बहुत भूखा हूं. मेरे भीतर इतना कुछ है जो बाहर आने को मचल रहा है."

 

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