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पकड़ सको तो पकड़ोः अभिषेक बच्चन

अभिषेक बच्चन, अभिनेता कबड्डी, ओलंपिक में भारत के भविष्य और रॉबर्ट रेडफोर्ड के बारे में
पकड़ सको तो पकड़ोः अभिषेक बच्चन विक्रम शर्मा
राहुल नरोन्हामुबंई, 16 October 2017

जयपुर पिंक पैंथर्स के मालिक होने के नाते आप प्रोफेशनल कबड्डी लीग के ब्रांड ऐंबेसडर की तरह हो गए हैं. वह क्या है जो आपको इस खेल की तरफ खींच लाया?

अगर आप इस खेल को देखें, तो यह आपको अपने साथ जोड़ लेता है, आपको अपने भीतर खींच लेता है. इसको नजरअंदाज कर पाना मुश्किल है.

कबड्डी को प्राचीन काल में शुरू हुआ खेल कहा जाता है. इसके बारे में आप कुछ बता सकते हैं?

आम तौर पर कबड्डी की शुरुआत महाभारत में मानी जाती है, अभिमन्यु और चक्रव्यूह में, इसी वजह से इसमें गोल-गोल मूवमेंट होते हैं. यह युद्ध का खेल है जो विकसित होकर इतना शानदार खेल बन गया है, जिसे हम आज खेलते हैं.

खेल पर बनी आपकी पसंदीदा फिल्म कौन-सी है?

ऐसी कई फिल्में मुझे अच्छी लगती हैं. वे केवल खेल के बारे में नहीं होतीं, बल्कि इनसानी जज्बे की फतह के बारे में होती हैं. रॉबर्ट रेडफोर्ड के अभिनय वाली द नेचुरल ऐसी ही एक फिल्म है.

भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?

मैं उनमें से नहीं हूं जो सरकार से ही सब कुछ करने की उम्मीद करते हैं. कबड्डी का ऐंबेसडर होने के नाते मैं इसको ओलिंपिक में देखना चाहूंगा. इसके लिए जरूरी है कि पांच महाद्वीपों के 55 देश यह खेल खेलें. इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन में 35 देश हैं. हमें 20 देश और चाहिए. हम इस दिशा में काम कर रहे हैं.

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