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‘‘किसानों के दुश्मन हैं भाजपा और चौहान’’

देश के कई मध्य प्रदेश में चल रहे अब तक के सबसे उग्र किसान आंदोलन के सूत्रधार और राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ‘कक्काजी’ कभी आरएसएस के भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे.

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aajtak.in
पीयूष बबेले नई दिल्ली, 13 June 2017
‘‘किसानों के दुश्मन हैं भाजपा और चौहान’’ शिव कुमार शर्मा कक्काजी

देश के कई मध्य प्रदेश में चल रहे अब तक के सबसे उग्र किसान आंदोलन के सूत्रधार और राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ‘कक्काजी’ कभी आरएसएस के भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे. लेकिन अब पूरी तरह सरकार के खिलाफ खड़े शर्मा ने किसान आंदोलन पर खुलकर बातचीत की. पेश हैं खास अंश:

सवाल: किसान आंदोलन तो अब पूरा देश देख रहा है, लेकिन इस आंदोलन की असल वजह क्या है?
जवाब: किसान आज से परेशान नहीं है, शिवराज सिंह चौहान की 13 साल की सत्ता में वे लगातार लूटे गए हैं. किसानों ने इस साल दाल का बंपर उत्पादन किया लेकिन उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी आधे दाम पर बिक रही है. एमएसपी पर फसल खरीदना तो सरकार की ही जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार चुप मारकर बैठी रही.

सवाल: आप 13 साल से किसानों के ठगे जाने की बात कह रहे हैं, जबकि प्रदेश को तो कृषि विकास का मॉडल माना जाता है?
जवाब: यह झूठे आंकड़ों का विकास है. भाजपा और शिवराज किसानों के दुश्मन हैं. प्रदेश में गेहूं उत्पादन में तेज विकास की कहानी झूठी है. होता यह है कि भाजपा के नेता ही राशन के लिए जारी होने वाला 2 रु. किलो का अनाज खरीद लेते हैं और अगले सत्र में इसे एमएसपी पर बेच देते हैं. अनाज की रिसाइक्लिंग ही बढ़ा हुआ उत्पादन दिखा रही है. किसानों को शून्य ब्याज पर कर्ज तो उससे बड़ा झूठ है. अगर कोई किसान 15 मार्च तक लोन वापस नहीं करता तो उससे बढ़े हुए ब्याज और पेनाल्टी के साथ कर्ज वूसला जाता है. जबकि सबको पता है कि किसान 15 मार्च तक पैसा कैसे चुकाएगा, क्योंकि उसका भुगतान ही अप्रैल के अंत और मई में शुरू होता है.

सवाल: आंदोलन के हिंसक होने की क्या वजह है?
जवाब: किसान हिंसक नहीं हुए हैं, सरकारी अमला जानबूझकर उन्हें उकसाता है, ताकि किसानों पर लाठी-गोली चलाने का बहाना मिले. किसानों को उनकी फसल का असली मूल्य दिलाने की कोशिश करने की बजाए शिवराज ने आंदोलन को कमजोर करने की तिकड़में कीं. किसानों का सरकारी तंत्र ने दमन किया. और किसानों की कोई भी बात सुनने से इनकार कर दिया. यह हिंसा नहीं एक दशक की पीड़ा से त्रस्त हो चुके किसान की हताशा की अभिव्यक्ति है. लेकिन अब किसान चुप नहीं बैठेगा. हम जल्द ही आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने की तैयारी कर रहे हैं.

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