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सारे सितारे जमीन पर

सिनेमाघर बंद, शूटिंग ठप और रिलीज टलने के साथ भारतीय फिल्म उद्योग बड़े धक्के से उबरने की कसमसाहट में. नुक्सान की थोड़ी-बहुत भरपाई के लिए निर्माताओं की नजर अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर.

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aajtak.in
सुहानी सिंहनई दिल्ली, 08 May 2020
सारे सितारे जमीन पर कोरोना संकट में ऑनलानइ प्लेटफार्म पर निर्माताओं की नजर

हवा में प्रदूषण कम हो गया है. आसमान साफ है. रात में तारे साफ नजर आने लगे हैं. हालांकि जिन तारों को हम रुपहले पर्दे पर देखने के आदी रहे हैं, वे लॉकडाउन में हैं. कोरोना वायरस की महामारी ने किसी को नहीं बख्शा. फिक्की-ईवाइ की ताजातरीन मीडिया और मनोरंजन रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 191 अरब रुपए का भारतीय फिल्म उद्योग खामोश है. सिनेमाघर बंद हैं, शूटिंग रद्द हो चुकी हैं और तमाम फिल्मों की रिलीज बेमियादी वक्त तक टाल दी गई है.

सिनेमाघरों को 15 मार्च को ही ताले डालने के लिए कह दिया गया था. तब से भारतीय फिल्म उद्योग बॉक्स ऑफिस पर कम से कम 600 करोड़ रुपए का नुक्सान झेल चुका है. भारी बजट और बड़ी धूमधाम से बनी, तैयार पड़ी कई फिल्में दर्शकों की बाट जोह रही हैं. भारी अनिश्चितता के बीच आने वाले कुछ महीने उद्योग के लिए नई किस्म की चुनौतियों से भरे होंगे.

वहीं, हॉलीवुड में डिज्नी ने बड़े बजट की अपनी फिल्मों की रिलीज के लिए नई तारीखों का ऐलान कर दिया है. इनमें कुछ फिल्में 2020 की आखिरी तिमाही में और कुछ 2021 में परदे पर आएंगी. पर भारत में 2020 में रिलीज होने वाली फिल्मों के कैलेंडर का कोई अता-पता नहीं. हिंदी फिल्मों की बात करें तो सूर्यवंशी (27 मार्च को रिलीज होनी थी), '83 (10 अप्रैल), गुलाबो सिताबो (17 अप्रैल), कुली नं 1 (1 मई) और झुंड (8 मई) के निर्माता नई तारीखों के तबलगार फिल्म निर्माताओं में सबसे आगे होंगे.

टी-सीरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार कहते हैं, ''अक्तूबर या नवंबर से पहले फिल्म रिलीज करना किसी के लिए भी न तो व्यावहारिक होगा और न ही फायदेमंद, बशर्ते कोई जुलाई या अगस्त में रिलीज का जोखिम उठाए, जब सिनेमाघर खुलने की संभावना है.''

सिनेमाघरों के फिर खुलने का फैसला पूरी तरह सरकार पर टिका है. पीवीआर सिनेमाज के चेयरमैन अजय बिजली कहते हैं, ''हम उन पहले लोगों में थे जिन्हें बंद करने को कहा गया और इस पर कोई सवाल ही नहीं कि खोलने के लिए हमें सबसे आखिर में इजाजत दी जाएगी.'' बिजली को यह भी अच्छी तरह पता है कि लॉकडाउन जब भी हटाया जाएगा, उनके मल्टीप्लेक्स के साम्राज्य को पहले जितना कारोबार बहाल करने में अच्छा-खासा वक्त लगेगा. पीवीआर सीटों और कतारों के बीच दूरी बढ़ाने और बॉक्स ऑफिस की खिड़कियों को स्वचालित बनाने सरीखे उपायों के जरिए ''सिनेमाघरों में जगह की नए सिरे से परिकल्पना'' का जतन कर रहा है.

अलबत्ता जिस सिनेमाघर की महज 50 फीसद सीटें भरी हों, वह भूषण कुमार सरीखे निर्माताओं के लिए चोखा धंधा नहीं है क्योंकि इससे उनकी कमाई में भारी चपत लगेगी. उनकी कम से कम 11 फिल्मों का 2020 में रिलीज होना तय था और वे जानते हैं कि महज लागत निकालने के लिए ही उन्हें बड़े बजट की कम से कम कुछ फिल्मों को 2021 के लिए टालना पड़ेगा. मध्यम बजट की अपनी कुछ फिल्मों की वे डिजिटल और सैटेलाइट रिलीज पर विचार कर रहे हैं. वे कहते हैं, ''स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी कुछ डायरेक्ट-टु-डिजिटल फिल्में हासिल करने के लिए बेताब हैं क्योंकि उन्हें भी एक्सक्लूसिव कंटेंट चाहिए. इस तरह हम अपने कारोबार को सहारा दे सकते हैं.''

मुश्किल में शूटिंग

शो बिजनेस के लिए अगले कुछ महीने मुश्किल होंगे. बजट में कटौती होगी, खासकर जब निर्माता फिल्मकारों से पहले ही विदेशों में शूटिंग से तौबा करने और कहानियों को घरेलू तानेबाने में ढालने की गुजारिश कर रहे हैं. भारत और विदेश, दोनों जगह सिनेमाघरों से उगाही जाने वाली रकम में गिरावट के चलते अक्षय कुमार, सलमान खान, आमिर खान और अजय देवगन सरीखे ए-लिस्ट अभिनेताओं के मुनाफों में अच्छी-खासी कमी आएगी.

शूटिंग के थमने से सबसे ज्यादा नुक्सान उद्योग के दिहाड़ी कामगारों को होगा—इनमें लाइट और साउंड तकनीशियन, बढ़ई, स्पॉट बॉय, कैटरर, वैनिटी वैन और जेनरेटर मुहैया करने वाले शामिल हैं. प्रोजेक्ट अधबीच लटक गए हैं और जिन्हें मॉनसून के पहले शुरू करना था, उन्हें और आगे के लिए टाल दिया गया है. सलमान खान की राधे को उनके मुरीदों के लिए ईद का तोहफा माना जा रहा था और इसका महज एक शूटिंग का कार्यक्रम बाकी रह गया था. शाहिद कपूर की जर्सी की चंडीगढ़ में शूटिंग चल रही थी, जब कामबंदी का फरमाना आया. करण जौहर की बहुत-से सितारों से सजी 200 करोड़ रु. बजट वाली पीरियड फिल्म तख्त, अधर में लटक गई है.

फिल्म के सेट पर या आउटडोर लोकेशन पर सामाजिक दूरी रख पाना मुश्किल है, बड़े बजट की फिल्मों में तो और भी मुश्किल. ऐसे में स्टुडियो को कम से कम सदस्यों की टीम से ज्यादा से ज्यादा नतीजे हासिल करने के तरीके खोजने होंगे. एक निर्माता कहते हैं, ''फिलहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहे मुताबिक, 'जान है तो जहान है'. जिंदगी दांव पर हो तो आप कौन-से घाटों के बारे में सोच सकते हैं? देरी हर कारोबार का हिस्सा है.''

दक्षिण की कहानियां

छोटी और बड़ी 25 तेलुगु फिल्में टाल दी गई हैं, जिन पर 12,000 करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं. चिरंजीवी की आचार्य, जो मलयालम फिल्म कोराताला शिवा का रीमेक है; और पवन कल्याण की वकील साब, जो हिंदी फिल्म पिंक का रीमैक है; जैसी फिल्में इन गर्मियों में रिलीज होनी थीं. एस.एस. राजामौली की 400 करोड़ रुपए की लागत से बन रही पीरियड ऐक्शन ड्रामा आरआरआर जनवरी, 2021 में प्रदर्शित होनी थी, पर अब विजुअल इफेक्ट स्टुडियो दुनिया भर में बंद पड़े हैं, तो इसे समय से पूरा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा.

तमिल फिल्म निर्माता जी. धनंजयन कहते हैं, ''यह ग्लोबल फेनॉमिना है और हम इसके नतीजों की भविष्यवाणी नहीं कर सकते. गर्मियों की छुट्टियों का शेड्यूल हमारे हाथ से निकल चुका है.'' छोटे बजट की फिल्मों के निर्माताओं को निवेश पाने के लिए अमेजन, नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्मों से बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. विदेशी बाजार अभी तमिल और तेलुगु फिल्मों की पहुंच से बाहर हैं और हालात का अता-पता तभी चलेगा जब अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर और मलेशिया में सिनेमाघर दोबारा खुलेंगे. रजनीकांत, विजय, अजीत, प्रभास, राम चरण और महेश बाबू सरीखे सुपरस्टारों की बड़े बजट की फिल्मों की कमाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आता है.

ऑनलाइन स्ट्रीमिंग

हर हफ्ते सबसे ज्यादा कुल घंटे ऑनलाइन वीडियो कंटेंट देखने वालों में अमेरिका के बाद भारत दूसरा देश है. फिक्की-ईवाइ की रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि की तस्दीक 2019 में भारत में निर्मित मौलिक ओटीटी सामग्री में 33 फीसद के उछाल से भी होती है. ओटीटी का सशुल्क ग्राहकों का आधार, जो अभी 1 करोड़ के करीब आंका जाता है, जो तेजी से बढ़ रहा है और लॉकडाउन से इसमें और वृद्धि होना तय है. इसीलिए धर्मा प्रोडक्शंस जैसे स्टुडियो ने ओटीटी प्लेटफॉर्मों के लिए कंटेंट बनाने के लिए अलग विभाग बनाया है. सिनेमाघरों की कम होती संख्या—जो एक साल में 9,601 से घटकर 9,527 हो गई हैं और जिनमें ज्यादातर सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर हैं—थिएटरों के जरिए कारोबार की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देती है.

भूषण कुमार के लिए ज्यादा बड़ी चिंता यह है कि पांच हफ्ते लंबे लॉकडाउन के चलते दर्शक घर से देखे जाने वाले मनोरंजन के साधनों को स्थायी तौर पर अपना सकते हैं. सिनेमाघरों से होने वाली कमाई अब भी डिजिटल/ओटीटी और सैटेलाइट अधिकारों को मिलाकर होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा है. वे कहते हैं, ''भगवान न करे दर्शकों को लगने लगे कि यही बेहतर है जिसमें वे पैसा भी बचा रहे हैं, और वे केवल डिजिटल देखने का फैसला कर लें.'' फिल्म उद्योग फिलहाल चमत्कार की उम्मीद ही कर सकता है, और वह यही है कि वैज्ञानिक तेजी से कोविड-19 का टीका बना लें. तब तक सितारे भी हमारी तरह हैं, घरों में कैद.

—साथ में अमरनाथ के. मेनन, जीमॉन जैकब और नवीन कुमार

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