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'गुत्थी' से मशहूर हुए सुनील ग्रोवर अब कहां खेलेंगे अपनी नई पारी?

गुत्थी के किरदार से सुनील ग्रोवर ने ग्रामीण लड़कियों को केंद्र में ला दिया. वह जब गुत्थी बने तो कंगना रनोट से लेकर दीपिका पादुकोण तक सबको याद दिलाना पड़ा कि यह दरअसल पुरुष ही है. यह इस किरदार के प्रति दर्शकों का क्रेज ही है कि आज वे जहां भी जाते हैं तो वहीं उनसे गुत्थी के अंदाज में इंट्रोड्यूस कराने की मांग की जाती है.

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aajtak.in
नरेंद्र सैनीनई दिल्ली, 04 December 2013
'गुत्थी' से मशहूर हुए सुनील ग्रोवर अब कहां खेलेंगे अपनी नई पारी?

एक छोटा बच्चा अकसर गुम जाया करता था. वह कभी किसी से कहता कि मुझे अपने मम्मी-पापा से मिला दो तो कभी किसी से गुहार लगाता. लोगों को तरस आता और वे उसकी मदद को दौड़ पड़ते. सबको लगता कि यह बच्चा वाकई वक्त का मारा है.

लेकिन वह तो बहुरूपिया था, बिल्कुल उसी तरह जैसे वह जब गुत्थी बना तो कंगना रनोट से लेकर दीपिका पादुकोण तक सबको याद दिलाना पड़ा कि यह दरअसल पुरुष ही है. इस पर हंसते हुए गुत्थी यानी सुनील ग्रोवर कहते हैं, ''मुझे बचपन से ही बहुत कुछ बनना था: डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, पायलट...और ऐसा सिर्फ ऐक्टिंग के जरिए ही संभव  था.”

एक गुम हुए बच्चे की ऐक्टिंग करने वाले सुनील आज टीवी और कॉमेडी की दुनिया का जाना-पहचाना नाम हैं. तभी तो उनके लोकप्रिय कॉमेडी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल से जाने की बात लीक होते ही, सुर्खियों में छा गई. उनके चहेतों को लगा कि अब क्या? सुनील कहते हैं, ''मैं अब यह शो नहीं कर रहा हूं.

शायद इस शो में मेरा इतना ही समय था. कपिल और मैं बेस्ट फ्रेंड हैं, और रहेंगे. देखें, यह जर्नी कहां तक जाती है.” वे मानते हंफ कि राहें भले अलग हुई हैं लेकिन कोई दरार नहीं है. उधर कॉमेडियन कपिल शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही कहा, ''वे मेरे भाई जैसे हैं बल्कि मैं खुद उनकी परफॉर्मेंस का स्टेज पर भरपूर मजा लिया करता था.” वाकई लोग दोनों की स्टेज पर कॉमेडी के कायल हो चुके थे.

छत्तीस वर्षीय सुनील पंजाब-राजस्थान बॉर्डर से सटे हरियाणा के मंडी डबवाली के रहने वाले हैं और उनके पिता बैंक में काम करते थे. उनकी एक बड़ी बहन और छोटा भाई  है. उन्हें बचपन से ऐक्टिंग का शौक था. वे अपने टीचर और रिश्तेदारों की खूब नकल उतारते थे. सुनील को इस शौक में पापा का पूरा सपोर्ट हासिल था.

कई बार तो ऐसा हुआ कि जब सुनील स्कूल में कोई प्रोग्राम कर रहे होते तो वहां उन्हीं के पापा जज होते थे. हालांकि उनके पिता रेडियो अनाउंसर बनना चाहते थे लेकिन सुनील के दादा की वजह से उन्हें बैंक में नौकरी करनी पड़ी. हमेशा मुस्कराने वाले सुनील इस वाकये को भी अपना रंग देने से बाज नहीं आते, ''पापा ने मेरे शौक को आगे बढ़ाकर शायद दादाजी से बदला लिया है. उन्होंने आठवीं क्लास में जब मेरी ऐक्टिंग देखी तो कहा कि तू जा, जो तुझे करना है, कर.”

उनके पापा जे.एन. ग्रोवर कहते हैं, ''उसमें इनबिल्ट टैलेंट है. हमने उसे तबला और हारमोनियम सिखाया. उसने जो भी किया, वह उसमें बेस्ट रहा.” बारहवीं करने के बाद सुनील ने मुंबई से ग्रेजुएशन करने की बात कही तो उन्हें चंडीगढ़ में ही शिक्षा लेने के लिए कहा गया. बी.कॉम करने के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से इंडियन थिएटर में पीजी किया.

आठ-नौ माह तक दिल्ली के एक न्यूज चैनल में काम किया. वे बताते हैं, ''मैं ऑफिस के थिएटर को समझना चाहता था. इसलिए यहां वॉयस ओवर किया और कॉपीराइटिंग भी की.” जसपाल भट्टी ने चंडीगढ़ में उन्हें पहला ब्रेक दिया. लोगों को ऑब्जर्व करना उनका पसंदीदा शगल है.

फिर एक दिन उन्होंने अपने बचपन के ख्वाब को सच करने के लिए मुंबई जाने का फैसला लिया. वे अपनी जमा-पूंजी लेकर मुंबई आ गए ताकि कुछ दिन घूमे-फिरें और शहर के मिजाज को समझें.

यहां आने के बाद सुनील ने ड्रामा से शुरुआत की और एक साल तक वॉयसओवर भी किया. इस बीच फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करते रहे और सीरियल्स में नजर आए. उन्होंने चला लल्ला हीरो बनने के साथ छोटे परदे पर दस्तक दी थी. वे टीवी के पहले सायलंट शो गटरगूं में भी नजर आ चुके हैं.

इस साल रिलीज हुई फिल्म जिला गाजियाबाद में उन्होंने विलेन फकीरा का किरदार निभाया. यही नहीं, एक एफएम चैनल पर वे अपने जोक्स से पकाने और हंसाने का काम भी करते थे. वे सुदर्शन उर्फ सुड का कैरेक्टर निभाते थे जो अपने बेसिर-पैर के चुटकुले सुनाता था.

उन्हें सुर्खियों में लाने का काम किया, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में उनके कैरेक्टर गुत्थी ने. सुनील इस किरदार की बाबत बताते हैं, ''गुत्थी का रोल मेरे लिए नया नहीं था. मैं इसे पहले भी एक-दो जगह कर चुका था. हमने इसे परमानेंट बनाने का सोचा भी नहीं था. लेकिन कैरेक्टर लोगों से कनेक्ट कर गया. डिमांड बढ़ती गई और इसे काफी माइलेज मिली.”

यह पूछने पर कि आखिर गुत्थी से वह कहां मिले और उन्होंने किस तरह उसे अपने अंदर उतार लिया, वे मुस्कराते हुए बताते हैं, ''छोटे शहरों की लड़कियां अकसर ऐसी ही होती हैं. मैं गुरु नानक कॉलेज में पढ़ता था. हमारी क्लास में 12 लड़कियां थीं और उनमें से सात लड़कियां ही कॉलेज आतीं, बाकी एग्जाम्स में दिखती थीं.

बस, उनमें कुछ ऐसी ही झलक मिली. एकदम देसी लड़कियां. हमारी किस्मत में ऐसी ही लड़कियां लिखी थीं. उन्हीं लड़कियों को देखा-सुना और उतार लिया कैरेक्टर में.”

वाकई गुत्थी की रणबीर कपूर के साथ शादी, अनिल कपूर के लिए उसका धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित बनना या फिर अपनी स्कर्ट उठाकर अपनी वैक्स की हुई टांगें दिखाना, वाकई दर्शकों की बेपनाह हंसी का वजह बनता रहा है.

यह इस किरदार के प्रति दर्शकों का क्रेज ही है कि आज वे जहां भी जाते हैं तो वहीं उनसे गुत्थी के अंदाज में इंट्रोड्यूस कराने की मांग की जाती है. वही अंदाज, फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन... सुनील इस कदर कैरेक्टर में समा जाते हैं कि सेट पर मौजूद लड़कियां भी उनके साथ सहजता से पेश आने लगतीं.

उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे वाकई लड़का है. उनके पापा से यह पूछने पर कि उनके लड़की का रोल निभाने पर आपको अजीब नहीं लगता, वे कहते हैं, ''हम उसे ऑडियंस की तरह देखते हैं और गाइड करते हैं. गुत्थी के डांस स्टेप्स, क्लैपिंग, गाने और पंजाबी अंदाज सब उनकी मम्मी की देन है. वे सुनील को इंटीरियर पंजाब के बारे में जानकारी देती हैं.”

वे मुंबई में अपने पेरेंट्स और पत्नी और तीन वर्षीय बेटे के साथ रहते हैं. उनका मानना है कि जिंदगी अब भी पहले जैसी ही है लेकिन मकबूलियत और शोहरत की अपनी कीमत होती है और वे उसे चुका रहे हैं. सुनील कहते हैं, ''सब कुछ पहले जैसा है, अंतर सिर्फ इतना आया है कि अब लोग पहचानने लगे हैं.

पहले सब्जी मार्केट जाता था, तो कह देता था भैया पैसे ठीक-ठीक लगा लो. लेकिन अब यह बात जुबान पर आती तो है पर मुंह से निकलती नहीं. पहले होटल में खाया और चलते बने, लेकिन अब खाना खाया तो सामने वाले को भी लगता है कि बंदा कुछ तो देकर जाएगा ही.”

सुनील का फलसफा है कि अच्छे काम करते रहो, बाकी चीजें उसके साथ जुड़ी हैं, अपने आप आ जाएंगी. उनके पास इन दिनों फिल्मों और टेलीविजन प्रोजेक्ट्स के कई ऑफर हैं. लेकिन वे अच्छे विकल्प का इंतजार कर रहे हैं. गुत्थी के किरदार को भी फिर से टेलीविजन स्क्रीन पर लाने की कोशिश हो रही है, लेकिन किस रूप में, यह बताने से वे अपनी गुत्थी स्टाइल मुस्कान के साथ कन्नी काट जाते हैं.

वे कहते हैं, ''मैं दर्शकों के सामने किसी भी रोल में आऊं, लेकिन इतना तय है कि मेरा मकसद उन्हें एंटरटेन ही करना रहेगा.” उनके चहेते भी इस जिंदादिल औरत को फिर से देखना चाहेंगे. 

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