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बलात्कार पर मौन को ललकारती चीनी फिल्म एंजल्स वियर व्हाइट

एंजल्स वियर व्हाइट बलात्कार पर मौन को ललकारती फिल्म

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aajtak.in
अनंत कृष्णन/ संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 16 April 2018
बलात्कार पर मौन को ललकारती चीनी फिल्म एंजल्स वियर व्हाइट एंजल्स वियर व्हाइट फिल्म

पिछले साल चीनी फिल्म एंजल्स वियर व्हाइट को प्रमोट करने के लिए "ब्रेक द साइलेंस'' नाम का अभियान शुरू किया गया. इस फिल्म में सच्ची घटनाओं पर आधारित एक जबरदस्त कहानी है, जिसमें एक ताकतवर चीनी पुलिस अधिकारी दो स्कूली लड़कियों के बलात्कार की घटना पर लीपापोती करता है.

इसका समय भी गजब था. मीटू हैशटैग अभियान के बमुश्किल एक हफ्ते बाद और जब ताकतवर हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वी विंस्टीन के स्कैंडल ने दुनिया भर में यौन उत्पीड़न पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया था.

चीनी निर्देशक विवियन क्यू ने भी शायद अपनी फिल्म से यही उम्मीद की थी. लेकिन विश्वविद्यालयों से लेकर फिल्म कारोबार तक, हर जगह व्याप्त यौन उत्पीड़न की घटनाओं को उजागर करने की उनकी कोशिश का स्वागत जबरदस्त चुप्पी के साथ किया गया.

चीन का अधिनायकवादी शासन किसी भी तरह के आंदोलन को लेकर इतना डरा हुआ है कि उसने महिला अधिकारों की आवाज उठाने वाली पांच युवा वकीलों को साल 2015 में जेल में डाल दिया था.

इसके अलावा वहां यौन उत्पीड़न और हमलों पर चुप्पी साध लेने की एक व्यापक संस्कृति भी है. क्यू कहती हैं, "चीन में जब कत्ल की किसी वारदात की हर कोई चर्चा करता है और न्याय की मांग करता है, लेकिन जब बलात्कार होता है तो इस पर चुप्पी रहती है, लेकिन मैं इस पर सवाल उठाना चाहती हूं.''

उन्होंने एंजल्स वियर व्हाइट में यह काम बखूबी किया है. इस फिल्म को पिछले साल गोवा में आयोजित भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (आइएफएफआइ) में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का "सिल्वर पीकॉक'' अवॉर्ड मिला.

एंजल्स वियर व्हाइट की कहानी के केंद्र में एक रिशेप्सनिस्ट लड़की है, जो रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती है और पीड़िताओं के मां-बाप इसके लिए लड़ाई लड़ते हैं. क्यू भारत नहीं आ सकीं क्योंकि फिल्म एक साथ छह फिल्म फेस्टिवल, वेनिस से लेकर जापान और ताइवान तक दिखाई जा रही थी.

लेकिन उन्हें इसका "बहुत पछतावा'' है क्योंकि उनके मुताबिक रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं की वजह से ही उन्हें कला जगत में आने की प्रेरणा मिली. उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय में जब मैंने पहली बार टैगोर की कविता पढ़ी, मुझे तभी उनसे प्यार हो गया.''

साम्यवादी क्रांति ने महिलाओं के लिए समानता का वादा किया था. लेकिन क्यू की फिल्म से लगता है कि चीन में थोड़ा खुलापन शुरू होने के तीन दशकों में महिलाओं के बारे में पुराने विचार लौट आए हैं, क्योंकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विस्तार हुआ है.

क्यू ने बताया, "हमें यह सिखाया गया कि लड़कियों और लड़कों में कोई अंतर नहीं है. आधा आकाश स्त्रियों का है और हमें ज्ञान हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए.''

उन्होंने कहा, "आज के समाज में, अब इस फोकस में थोड़ा बदलाव दिख रहा है और कुछ हद तक यह 100 साल पीछे जैसा हो गया है, जहां आपको बस इस पर ध्यान देना है कि एक अच्छे पति की तलाश करें या एक अच्छे परिवार में शादी हो जाए.'' ये ऐसे कुछ मसले हैं जिनकी वजह से यह फिल्म हम भारतीयों से भी जुड़ जाती है.

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