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कला पर भारी न पड़ें कलाकार

हिप-हॉप के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए मैं साइबर कैफे में अड्डा जमा लेता. जल्दी ही मुझे एहसास हुआ कि 50 सेंट तो इसकी सबसे कूल में शुमार भी नहीं है! टुपाक, बिगी, नैस, एमिनेम...मैंने उन सभी के गाने जाने-समझे. इसमें सब कुछ खूबसूरत नहीं था.

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‌चिंकी सिन्हानई दिल्ली, 20 June 2019
कला पर भारी न पड़ें कलाकार आमिर शेख

आप दर्द के बगैर भला कैसे लिखेंगे? मैं दर्द को कभी जाने नहीं दूंगा.'' यह कहना है 26 बरस के रैपर नैजी का अपनी प्रेरणा के बारे में. कुर्ला में पले-बढ़े नैजी उर्फ नवेद शेख 14 बरस की उम्र तक छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेल जा चुके थे. 2014 में उनका डीआइवाइ म्युजिक वीडियो आफत वायरल हो गया. इससे देश के अंडरग्राउंड रैप फलक पर अपना दावा पेश करने में उन्हें मदद मिली. राजा कुमारी और स्लोचीता सरीखे रैप कलाकारों के साथ नैजी इस साल एक म्युजिक व रियलिटी शो हसल में आ रहे हैं. यह अपने किस्म का पहला रैप शो है जो सबसे बड़े म्युजिक व टीवी चैनलों में से एक एमटीवी पर जल्दी ही दिखाया जाएगा.

यह हिंदुस्तान के रैप कलाकारों के लिए नए दरवाजे खोल देगा. म्युजिक व यह विधा साफ तौर पर अब उभरती हुई कला नहीं रही, बल्कि चौतरफा धूम मचाने वाली उपसंस्कृति बन गई है जिसने बड़े म्युजिक व लेबल और लाइफस्टाइल ब्रान्ड को अपनी तरफ ललचाया है. बड़ा लेबल सोनी म्युजिक व और बनिस्बतन नया इंडी लेबल आजादी रिकॉर्ड्स, दोनों ही आधा दर्जन से ज्यादा नए हिप-हॉप कलाकारों के साथ नए सौदों के लिए बातचीत कर रहे हैं, जबकि बीयर ब्रान्ड बीरा 91 पेश किए जाने वाले अपने हिप-हॉप गिग (लाइव म्युजिक व परफॉर्मेंस) दोगुने बढ़ाकर साल में 50 करना चाहता है.

हिप-हॉप म्युजिक व ने 1970 के दशक में पहली बार ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरने के बाद से अब लंबा सफर तय कर लिया है. पिछले साल इसने साहित्य का दर्जा भी हासिल कर लिया जब केंडरिक लमार ने अपने गीतों के लिए संगीत का पुलित्जर जीता.

हिंदुस्तान में फरवरी में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म गली बॉय ने देसी रैप के लिए किसी हद तक यही काम किया—रैपर के अंडरग्राउंड समुदाय को मंजूरी दी. यह विडंबना ही है क्योंकि यह विधा उस संगीत के उलट है जिसे आम तौर पर बॉलीवुड ने बढ़ावा दिया है. फिल्म में वे रैप म्युजिक व को 'हार्ड' (कठोर) कहते हैं और यह जितना ज्यादा हार्ड हो, उतना बेहतर. जहां फिल्म को इस बात का श्रेय जाता है कि उसने देश में पिछले कुछ वक्त से मौजूद एक उपसंस्कृति की तरफ ध्यान दिलाया, वहीं 'हकीकत' से थोड़ा पीछे रह गई और झुग्गी बस्ती में बड़े हुए एक मुस्लिम लड़के के भीतर छिपे आक्रोश की गहराई में नहीं गई.

मगर सवाल यह है कि क्या हिंदुस्तान के हिप-हॉप कलाकार उसी राह जाएंगे जिधर अमेरिका के हिप-हॉप कलाकार गए? क्या वे अपने नियम-कायदों और नैतिकता से समझौता करके उन कई लोगों की तरह 'नरम' पड़ जाएंगे जिन्होंने खुद को दौलत और चकाचौंध की खातिर 'बेच दिया'? यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में अमेरिकी स्टडीज के सीनियर लेक्चरर ऐथनी क्विन ने कहा था कि शुरुआत में हिप-हॉप के बाजारीकरण ने इन गरीब कलाकारों को रोमांच से भर दिया था. उन्होंने इसे बिक जाने के तौर पर नहीं देखा. हिंदुस्तान में फिल्म गली बॉय में ट्रु कॉलर, जेबीएल, एडिडास और सोशल ऑफलाइन कंपनियों के ब्रान्ड प्लेसमेंट ने इस विधा की बढ़ती लोकप्रियता की तस्दीक की, मगर इंडी रिकॉर्ड कंपनियां मसलन आजादी रिकॉर्ड्रस, देसीहिप-हॉप, गली गैंग एंटरटेनमेंट वगैरह रैपर से वादा कर रही हैं कि उनकी कला की शुचिता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा.

गली रैप का उभार

मुंबई में 2000 के दशक की शुरुआत में रैपर और हिप-हॉप क्रु पूरे शहर में जहां-तहां उभरने लगे थे. उस वक्त इनसिग्निया रैप कॉम्बैट सरीखे ऑनलाइन रैप समुदाय या रैपर, बीटबॉक्सर और ब्रेकडांसर के अनौपचारिक जमावड़े हुआ करते थे जिन्हें 'सिफर' कहा जाता था. हिप-हॉप का कुछ आकर्षण इस वजह से था कि इसमें बहुत कम संसाधनों की जरूरत पड़ती थी—हेडसेट माइक्रोफोन का एक सस्ता-सा जोड़ा, इंटरनेट से चुराई गई ताल और आवाजें, ऑरकुट और रेवर्बनेशन सरीखे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और बेशक मुंहजबानी फैलाई गई सूचनाएं.

डिवाइन (असली नाम विवियन फर्नांडीस) का हिप-हॉप से परिचय तब हुआ जब उन्होंने एक दोस्त को अमेरिकन रैपर 50 सेंट के छापे वाली टी-शर्ट पहने देखा. डिवाइन ने पूछा कि यह कौन है तो दोस्त ने उन्हें एक सीडी थमा दी. वे बताते हैं, ''इन दा क्लब तब रिलीज ही हुई थी और 50 सेंट की चारों तरफ धूम थी. मुझे लगा कि मैंने यह सबसे कूल चीज सुनी थी. मैंने और गहराई से जानना शुरू किया. हिप-हॉप के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए मैं साइबर कैफे में अड्डा जमा लेता.

जल्दी ही मुझे एहसास हुआ कि 50 सेंट तो इसकी सबसे कूल में शुमार भी नहीं है! टुपाक, बिगी, नैस, एमिनेम...मैंने उन सभी के गाने जाने-समझे. इसमें सब कुछ खूबसूरत नहीं था, बहुत कुछ मेरी जिंदगी की तरह.'' वे कहते हैं, उनके वीडियो देखते हुए ''मैं उन्हीं की तरह बात करने लगा, उन्हीं की तरह कपड़े पहनने लगा. मैं हमेशा बिग पन, बिग एल, रकिम और केआरएस-वन सरीखे कलाकारों की बहुत इज्जत करता था...मैं उनकी तुकबंदियों से जुड़ा महसूस करता था.'' 17 बरस की उम्र में वे शहर के पहले रैप क्रु मुंबईज फाइनेस्ट के संस्थापक अभिषेक धूसिया (एस) और अमी पाटकर (एपी) से मिले, जिसने उनके आगे रैप की दुनिया खोल दी.

बीबीसी न्यूज को 2017 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''मैं बात कर रहा हूं मैं कैसे बड़ा हुआ, कैसे इस जंगल में अकेला छोड़ दिया गया, सांप और चूहों से भरे इस जंगल में... हमारे पास कार, बंदूक नहीं हैं, इसलिए हम उनके बारे में बात नहीं करते.'' डिवाइन को कम उम्र में ही उनके पिता ने छोड़ दिया था, बाद में उनकी मां काम के लिए पश्चिम एशिया चली गईं और तब उन्हें उनकी दादी ने मुंबई के जेबी नगर में पाला-पोसा. उनके दोस्त गाहे-बगाहे गैरकानूनी काम कर लेते थे.

डिवाइन कहते हैं कि हिप-हॉप आम आदमी के लिए कहानी बयान करने का ही एक रूप है. वे कहते हैं, ''लोग मानकर चलते हैं कि यह शराब या लड़कियों या हिंसा के बारे में है. मैंने इनमें से कुछ भी नहीं गाया. मैंने अपने पास-पड़ोस, अपने दोस्तों और अपनी जिंदगी के बारे में गाने लिखे. मैं हिंदी में रैप करता हूं क्योंकि यह मुझे लोगों के ज्यादा बड़े हिस्से तक पहुंचने में मदद करता है, यह मेरी कहानी को और मुझे सुनने के तजुर्बे को ज्यादा प्रामाणिक बनाता है.'' डिवाइन आज कइयों को मराठी, गुजराती और तमिल के साथ दूसरी क्षेत्रीय जबानों में रैप करने के लिए प्रेरित करते हैं.

आए कहां से हो?

हिप-हॉप में आप कहां से आए हैं, इसी से आपका ब्रान्ड तय होता है. राजधानी के शहरी गांवों में खिड़की 17 सरीखे बीट बॉय बी'बॉयिंग (ब्रेकडांसिंग) के जरिए आदमी के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हैं और अधूरे सपनों की कहानियां बयान कर रहे हैं. दिल्ली के कुछ सबसे महंगे मॉल के सामने सड़क पार करते ही खिड़की ऐसा इलाका है जहां की दीवारों पर उकेरी गई चित्रकारी उनके अलहदा तजुर्बों को बयान करती है, उस शहर में जहां तमाम पहचानें इकट्ठा हैं. एक कमरे के घरों में बैठे नौजवान लड़के और लड़कियां अपनी कहानियों को गीतों और फिर लय-ताल में ढालते हैं. एमसी क्रीज, अक्षय टशन और एमसी हरि की तिकड़ी को सहारा मिला खिड़की के खोज स्टुडियो में, जो अंडरग्राउंड कलाकारों के साथ काम करता है.

हिंदुस्तान की खुली गैर-बराबरियां और वर्ग तथा जाति के संघर्ष उन लोगों के लिए मुकम्मल उपजाऊ जमीन का काम करती हैं जो बगैर किसी लाग-लपेट के चुटीले फिकरों में अपनी कहानियां बयान करना चाहते हैं. ये कलाकार टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया की ताकत को समझते हैं और उनके भीतर यह उम्मीद जिंदा है कि गरीबी और अभाव की कहानियों की खातिर दौलत के तमाम प्रलोभन के बावजूद हिप-हॉप विरोध की तड़पती हुई आवाज बना रहेगा.

हिंदुस्तानी हिप-हॉप का जवान होना

अमेरिका में हिप-हॉप को अनेक स्तरों पर मान्यता मिली है. इसे हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड सरीखे विश्वविद्यालयों ने मान्यता दी है और एक यूनिवर्सल हिप-हॉप म्यूजियम ब्रॉक्स में 2022 में खुलने वाला है. हमारे यहां मुंबई यूनिवर्सिटी ने इसी महीने हिप-हॉप पर समर्पित एक कोर्स—इंट्रोडक्शन टू हिप-हॉप स्टडीज—शुरू किया है जो एशिया में इस किस्म का पहला यूनिवर्सिटी स्तर का कोर्स है.

बिल्कुल जमीनी स्तर पर धारावी के हिप-हॉप ग्रुप स्लमडॉग्स ने धारावी में रह रहे बच्चों के लिए आक्रटर स्कूल ऑफ हिप-हॉप शुरू किया है. यह क्यूकि और यूनिवर्सल म्युजिक व की सीएसआर कंपनी के धारावी प्रोजेक्ट के साथ मिलकर शुरू किया गया है. यहां तक इस साल हुए लोकसभा चुनाव की दौड़ में सियासी पार्टियां भी हिप-हॉप के काफिले में सवार हो गईं, जब भाजपा और कांग्रेस के आइटी सेल ने गली बॉय के लोकप्रिय गानों की ताल का इस्तेमाल करते हुए अपने-अपने रैप सॉन्ग जारी किए.

सोनी म्युजिक व के प्रेसिडेंट और इंडियन म्युजिक व इंडस्ट्री के चेयरमैन श्रीधर सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, गैर-बॉलीवुड म्युजिक व को लोकप्रिय होकर उभरने में तकरीबन चार दशक लगे. म्युजिक व स्ट्रीमिंग ऐप सावन पहला ऐप था जो हिंदुस्तानी हिप-हॉप म्युजिक व चैनल के तौर पर लॉन्च किया गया था और जिसने अपने आर्टिस्ट ओरिजिनल्स (एओ) प्रोग्राम में नैजी का पहला सॉन्ग आजाद हूं मैं जारी किया था. संगीत महोत्सवों ने इन कलाकारों और उनके संगीत को मुख्यधारा में लाने में मदद की और महंगे ब्रान्ड को उनके साथ जुडऩे की पेशकश करने के लिए बढ़ावा दिया.

अपने बचपने में देखी गई जिंदगी से हमेशा अलहदा जिंदगी की चाह रखने वाले डिवाइन कहते हैं, ''रैप के फलक पर केवल मैं और नैजी ही नहीं बल्कि कई और रैपर, बी-बॉय, प्रोड्यूसर हैं. हिप-हॉप हर किसी से बात करता है, फिर आपका पोस्टल कोड चाहे जो हो. यही सबसे बड़ी ताकत है, खासकर मुंबई में, जहां सबसे दौलतमंद और सबसे गरीब एक ही सड़क पर चलते हैं.''

हिप-हॉप जिंदा रहेगा?

बेंगलूरू के रैपर स्मोकी द गोस्ट ने हाल ही में कहा कि नैजी पैसे और दौलत के लिए अपनी कला की शुचिता से समझौता कर सकते हैं. नैजी कहते हैं, ''मौजूदा सियासी माहौल को देखते हुए मुझे खुद अपनी सुरक्षा की देखभाल करनी पड़ती है. हिंदुस्तानी मुसलमान होने के नाते मेरे लिए यह पक्का करना मुश्किल होता है कि मेरी आवाज सुनी जाए.''

स्मोकी द गोस्ट उसी सबको लफ्ज दे रहे हैं जो हर कोई सोच रहा है—क्या हिंदुस्तानी रैप और हिप-हॉप कलाकार ज्यादा बेचे जा सकने वाले संगीत की खातिर धीरे-धीरे अहम मसलों पर बोलना बंद कर देंगे? मशहूर रैपर नैस ने 2006 में ऐलानिया कहा था कि कभी विरोध का संगीत रहा हिप-हॉप मर चुका है और इसी नाम का एक एल्बम बनाया था, जिसमें इस विधा के बाजारीकरण का मातम मनाया था.

अल्पसंख्यक की आवाज

हिप-हॉप नई आवाजों को अपनी बिरादरी में जगह दे रहा है. नए जमाने की विरोध की शब्दावली में इजाफा हो रहा है और यह काम 29 बरस के ऑसम फ्रैंकी (मोहम्मद हुजैफा रजा) सरीखे कलाकार कर रहे हैं, जिन्होंने पहली बार वोट देने वाले नौजवानों को वोट देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रैप बनाया. फिर ओडिशा के सुमीत समोसा हैं जो दलित समुदाय से आए हैं और ब्राह्मणवादी हिंदुस्तानी हिप-हॉप में दलित, बहुजन और आदिवासी आवाजों को लाना चाहते हैं. 26 बरस के इस रैपर ने अपने इंटरव्यू में इस बात की आलोचना की है कि राजा कुमारी (जिन्होंने डिवाइन के साथ मिलकर काम किया है) सरीखे ऊंची जाति के रैपर झुग्गी बस्तियों की जिंदगी को अपना बनाकर पेश कर रहे हैं. उम्मीद करनी चाहिए कि उनके सरीखे कलाकार संगीत के फलक पर इसकी काट करने वाली संस्कृति लेकर आएंगे.

आमिर शेख, उर्फ शेखस्पीयर, ने बॉक्वबे लोकल की स्थापना की है जो मुंबई के बीटबॉक्सरों, ग्रैफिटी कलाकारों और रैपर का क्रू है. वे उन बहुत थोड़े-से रैपर में से हैं जो इस विधा के विरोध के जज्बे को हल्का पडऩे से बचाने के लिए कॉर्पोरेट मॉडल की मुखालफत कर रहे हैं. शेख 2007 में बिहार से मुंबई आए थे और पेशेवर तौर पर रैपिंग की शुरुआत की थी. उस वक्त वे मुश्किल से 8,000-10,000 रु. कमाते थे. उनका गाना इंकलाब हिंदुस्तान में और मौजूदी सियासी फलक पर अल्पसंख्यक समुदाय का शख्स होने के मुद्दे से मुखातिब होने की कोशिश करता है. वे कहते हैं, ''मैं जाना-बूझा सियासी रैप बनाना चाहता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि यह हमारे लिए कारगर हो.''

फिलहाल स्ïनीकर्स आ चुके हैं और गली बॉय इंस्टाग्राम पर ब्रान्ड को टैग कर रहे हैं और रंक से राजा बनने की अपनी कहानियों से हासिल शोहरत का मजा ले रहे हैं.

नैजी, 26 वर्ष, मुंबई, नवेद शेख, उर्फ नैजी, मूल गली बॉय हैं. उनका पहला गाना आफत (2014), आइपैड पर शूट किया गया था

''हिंदुस्तानी मुसलमान होने के नाते अपनी आवाज सुनवा पाना मुश्किल है''

डिवाइन, 29 वर्ष, मुंबई, विवियन फर्नांडीस, उर्फ डिवाइन, हिंदुस्तान के सबसे कामयाब रैपर में से हैं और उन्होंने गली गैंग एंटरटेनमेंट की स्थापना की है

''मैं अपने वास्ते बेहतर जिंदगी चाहता था और हिप-हॉप ने मुझे उम्मीद दी और ऐसा करने का हुनर भी.''

साउथसाइड बीबॉयज, कोचि

11 सदस्यों का क्रू जिसकी स्थापना 2014 में बीबॉय जी (अरुण सीएस) और बीबॉय मजरू (मनीश बी) ने की थी

''हमने ठान लिया है कि हम अंडरग्राउंड ही रहेंगे.''

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