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टेनिस में सानिया के बाद अब अंकिता ने रचा इतिहास

टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना, एशियाड में कांस्य पदक जीतने और महिलाओं को प्रेरित करने के बारे में.
टेनिस में सानिया के बाद अब अंकिता ने रचा इतिहास अंकिता रैना
सौम्या दासगुप्तानई दिल्ली, 11 September 2018

टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना से एशियाड में कांस्य पदक जीतने और महिलाओं को प्रेरित करने के बारे में सौम्या दासगुप्ता ने की बातचीत

एशियाड सेमीफाइनल का तजुर्बा कैसा रहा.

मैं एक मैच जीत गई, तब मेरे मन में यही बात आती रही कि दूसरा भी जीतना है. झांग शुएइ (विश्व की 34 नंबर की खिलाड़ी) टॉप प्लेयर है, मगर मैंने भी पूरी ताकत से मुकाबला किया. मेडल जीतना सपने की तरह है.

निजी तौर पर और भारतीय महिला टेनिस के नजरिए से भी यह कामयाबी कितनी बड़ी है?

बहुत बड़ी. सानिया मिर्जा के बाद मैं दूसरी खिलाड़ी हूं जिसने टेनिस में एकल पदक जीता है. अगर मैं लड़कियों को टेनिस खेलना शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकूं तो बहुत अच्छी बात होगी.

सिंगल्स टेनिस में टॉप 200 में पहुंचने वाली आप चौथी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं—क्या अभी आपको बहुत दूर जाना है?

मुझे इसका गर्व है. इससे मुझमें और कड़ी मेहनत करने का जज्बा पैदा होता है. एक भी चीज नहीं है जो मुझे रोके. मैं 25 साल की हूं. कुछ को यह जल्दी मिल जाता है. कुछ को वक्त लगता है, माइकल पेनेटा ने 33 की उम्र में अमेरिकी ओपन जीता. अहम है वहां पहुंचना और हासिल करना.

आपके लक्ष्य क्या हैं, कितनी दूर आप जा सकती हैं?

एशियाई खेलों के पदक ने मुझे आत्मविश्वास और भरोसा दिया है कि मैं तैयार हूं. मुझे लगता है कि मैं ओलिंपिक खेलों में पक्के तौर पर पदक जीत सकती हूं. मैं और ज्यादा के लिए बेताब हूं. पहले मैं हिंदुस्तान की नंबर एक बनना चाहती थी. अब मैं ग्रैंड स्लैम जीतना चाहती हूं.

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