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उत्तराखंड सरकार का फरमान, सरकारी दफ्तरों में मीडिया पर बंदिश

उत्तराखंड सरकार का नया फरमान, सरकारी दफ्तरों में मीडिया प्रवेश पर पाबंदी. सरकार के इस कदम पर कांग्रेस हुई सरकार पर हमलावर

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अखिलेश पांडे 06 January 2018
उत्तराखंड सरकार का फरमान, सरकारी दफ्तरों में मीडिया पर बंदिश उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड सरकार की ओर से सचिवालय के महकमों में पत्रकारों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को कांग्रेस ने आपातकाल करार दिया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कहने वाली सरकार में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है. जनविरोधी फैसले लिए जा रहे हैं. ये फैसले मीडिया तक न पहुंचे, इसके लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाजाही को प्रतिबंधित कर दबाने का प्रयास किया जा रहा है. जो सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है. उन्होंने कहा कि गोपनीयता की आड़ में सरकार जनविरोधी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले फैसलों को छुपाना चाहती है.

कांग्रेस भवन में मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भी राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. पूर्व कबीना मंत्री ने प्रदेश सरकार के उस फैसले की आलोचना की जिसमें राज्य सरकार ने सचिवालय में पत्रकारों की एंट्री पर बैन लगा दिया है.

दिनेश अग्रवाल की माने तो राज्य सरकार लोकतंत्र की आवाज को दबाना चाहती है. साथ ही, अपने अनुसार खबरों का संचालन करना चाहती है जो सरासर गलत है.

दिनेश अग्रवाल ने सरकार से अपने इस फैसले को वापस लेने की मांग की. उन्होंने सीधे-सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अगर अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी. अग्रवाल ने साफ हिदायत दी कि अगर सूचनाएं लीक हो रही हैं तो सरकार अफसरो पर कार्रवाई करे, न कि पत्रकारों पर प्रतिबंध लगाया जाए.

गौरतलब है कि उत्‍तराखंड की भाजपा सरकार ने मीडिया को लेकर नया फरमान जारी किया है. नए आदेश के तहत पत्रकारों के सरकारी दफ्तरों में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है. जरूरी होने पर मीडिया सेंटर में आकर विभागीय सचिव सूचना महानिदेशक की उपस्थिति में पत्रकारों को जानकारी देंगे.

राज्‍य सरकार ने ‘गोपनीय सूचनाओं’ के लीक होने की दलील देते हुए यह फैसला लिया है.

उत्‍तराखंड के मुख्‍य सचिव उत्‍पल कुमार सिंह की ओर से 27 दिसंबर को इस बाबत आदेश जारी किया गया था. ऐसे में अब पत्रकार सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों से सीधे नहीं मिल सकेंगे. गुरुवार को आनन-फानन में सचिवालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेस में मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ने मीडिया पर किसी तरह का कोई सेंसर नहीं लगाया गया है. बल्कि, सिस्टम को व्यवस्थित करने के लिए एक प्रयास किया है. 

बकौल मुख्य सचिव, वर्तमान में अपुष्ट सूचनाएं खबरों की शक्ल ले रही हैं. इससे खबरों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं. महकमों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश से कामकाज भी प्रभावित होता है तो कैबिनेट के फैसलों की गोपनीयता भी प्रभावित हो रही है. कैबिनेट की गोपनीयता बनाए रखने को लेकर ही ये आदेश दिए गए हैं. 

उन्होंने कहा कि मीडिया तक सटीक और सही सूचना पहुंचे, इसके लिए हर शाम चार बजे सूचना महानिदेशक समेत विभागीय सचिव अपने-अपने विभागों की जानकारी साझा करेंगे.

राज्‍य के मुख्‍य सचिव की ओर से जारी तीन पृष्‍ठों के आदेश में सरकारी विभागों के सेक्‍शन/कार्यालायों में अनधिकृत व्‍यक्तियों/रिपोर्टरों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही गई है. आदेश की प्रति राज्‍य के सभी विभागों के अपर, प्रमुख और अन्‍य सचिवों को भेजी गई है. इसमें कहा गया है, ‘सरकारी कार्यालयों में निजी काम से आने वाले लोगों/पत्रकारों को किसी भी अधिकारी या कार्यालय के किसी भी सदस्‍य से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. महत्‍वपूर्ण मामलों में अधिकारी रिसेप्‍शन पर आकर संबंधित व्‍यक्ति से मुलाकात कर सकेंगे.’

आदेश में खासतौर पर कैबिनेट बैठक का एजेंडा सार्वजनिक होने का हवाला दिया गया. इसमें कहा गया है, ‘कैबिनेट से जुड़े मुद्दों/प्रस्‍तावों का बैठक से पहले ही प्रकाशन बहुत ही दुर्भाग्‍यपूर्ण और आपत्तिजनक है. इससे कैबिनेट द्वारा लिया जाने वाला फैसला प्रभावित होता है. मंत्रिमंडल ने भी इस पर खेद और आपत्ति जताई थी.’

आदेश में सूचनाएं लीक होने की स्थिति में उसकी जांच कराने के तौर-तरीकों का भी उल्‍लेख किया गया है. इसके मुताबिक, कैबिनेट से जुड़े प्रस्‍ताव के बैठक से पहले ही अखबारों या मीडिया में आने पर संबंधित विभाग के अपर या प्रमुख सचिव या फिर प्रभारी सूचनाएं लीक होने के कारणों की छानबीन करेंगे.

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