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क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय जर्सी की कहानी

जानिए कि आखिर भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का रंग नीला ही क्यों है? न केसरिया, न हरा न सफेद, नीला ही क्यों? जानिए क्यों

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 30 May 2019
क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय जर्सी की कहानी फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

क्या आपको पता है कि भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का रंग नीला क्यों है, इसके पीछे एक कहानी है. जब वन डे क्रिकेट रंगीन जर्सी में खेलना शुरू हुआ था तब भारत को ये फैसला करना था कि उनकी जर्सी का रंग क्या होगा. पर भारत का कोई राष्ट्रीय रंग न होने के कारण भारत के झंडे के तीनो रंगो को प्राथमिकता दी गई. केसरिया रंग को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि उस समय बहुत से राजनीतिक पार्टियों के झंडे का रंग केसरिया था. हरा रंग पाकिस्तान ने ले लिया था और वो भारत के पसंद का रंग था भी नहीं. सफ़ेद रंग को पहनकर टेस्ट क्रिकेट खेला जाता था इसलिए सफ़ेद को भी नहीं चुना गया. तब जाकर भारत के झंडे के अशोक चक्र के रंग को आखिरकार भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का रंग बना दिया गया. भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी के रंग की कहानी के साथ-साथ भारतीय टीम की बदलती जर्सी के रूप का भी एक पूरा इतिहास है. चाहे जर्सी के रंग का शेड हो या डिजाईन, हर एक बदलती चीज के पीछे कोई कारण या कहानी है, जो भारतीय क्रिकेट टीम से उनकी जीत से भी जुड़ी है.

2019 के विश्व कप में टीम इंडिया एक बार फिर एक नई जर्सी के साथ वर्ल्ड कप खेलेगी. इस बार बनाई गई नई जर्सी बेहद खास है जर्सी पर तीन स्टार्स बने हैं. ये तीन स्टार टीम इंडिया के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएगी. इन तीन स्टार्स भारत के तीन विश्व कप की जीत को दर्शाता है जिसमें दो वनडे विश्व कप और एक टी20 विश्व कप है. 

भारतीय क्रिकेट टीम की वो 5 जर्सी जो है सर्वश्रेष्ठ

भारतीय क्रिकेट टीम की वो 5 जर्सी जो मेडल या किसी ट्रॉफी से कम नहीं है. जो हर क्रिकेट प्रेमी के दिलों में एक अहम स्थान रखती है. 1985- 1985 की वो लाईट ब्लू रंग की जर्सी, जिसे पहनकर कपिल देव के नेतृत्व वाली टीम ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बेंसन ऐंड हेजेज विश्व चैम्पियनशिप जीती थी. 

1992- 1992 की वो हरदिलअजीज़ जर्सी. तब पहली बार सभी टीमों को कलर जर्सी पहनकर विश्व कप खेलने का अवसर मिला था. उसके पहले तक सफ़ेद जर्सी पहनकर विश्व कप खेला जाता था. और डार्क ब्लू रंग की इस जर्सी की भी एक कहानी है क्योंकि टीम इंडिया के जर्सी का रंग और इंगलैंड के जर्सी का रंग भी ब्लू होने के कारण टीम इंडिया को डार्क ब्लू शेड दिया गया था.

2003-लाईट ब्लू शेड वाली जर्सी जिसे पहनकर सौरव गांगुली के नेतृत्व वाली टीम ने 1996 के एक लंबे अंतराल के बाद 2003 में विश्व कप के फाईनल मैच में जगह बनाई.

2007- 2007 की जर्सी को भला कौन भूल सकता है जब धौनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पहली बार में ही टी-20 विश्व कप पर कब्जा कर लिया था.

2011- 2011 की वो यादगार जर्सी जिसे पहनकर टीम इंडिया का सालों बाद दोबारा विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ. जब भारतीय खिलाड़ियों ने उस जर्सी के साथ-साथ भारत के झंडे का भी मान बढ़ाया. वो जर्सी जिसे विश्व क्रिकेट रैकिंग पर नंबर 1 का स्थान मिला. भारतीय क्रिकेट टीम की जीत वाली इस लक्की जर्सी ज्यादातर लोगो की फेवरेट जर्सी है. 

जर्सी नहीं विरासत है.

कपिल देव की टीम 1983 में विश्व कप में जीत दिलाने वाली वो सफेद जर्सी जो रंगा गया 1992 में. विरासत में मिली जर्सी में रंग आने के बाद उसे जीत के रंग में रंगने का सपना पूरा हुआ तरह 2007 और 2011 में. धौनी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि भारतीय क्रिकेट टीम जर्सी के इस विरासत को अगली पीढ़ी को सौपते हुए उन्हें बहुत गर्व हो रहा है. जर्सी से हमारी बहुत सी यादें और गौरव के पल जुड़ी हैं. 

टीम इंडिया जर्सी के 30 साल

टीम इंडिया के जर्सी ने बदलाव का एक पूरा दौर देखा है. एक सिम्पल जर्सी से स्टाईल ट्रेंड बनने तक के सफर की ये कहानी जितनी आसान लगती है उतनी ही दिलचस्प भी है. 1993 में जर्सी का रंग में पीले रंग को भी महत्व दिया गया. 1997 में बीसीसीआइ के नाम को शामिल करते हुए जर्सी के रंग में बदलाव कर ब्लू की अहमियत बढ़ा दी गई. 

उसके बाद नए दौर के साथ 2001 में सहारा टीम इंडिया का आधिकारिक प्रयोजक बना जिसके बाद सहारा को भी टीम इंडिया के जर्सी पर जगह मिली. उसके 2003 में भारत के गर्व भारत के झंडे की आकृति को भी जर्सी में शामिल किया गया. 10 साल के एक लम्बे अंतराल के बाद बड़े बदलाव के साथ 2013 स्टार टीम इंडिया का आधिकारिक प्रायोजक बना जिसके बाद जर्सी पर सहारा के जगह स्टार को जगह मिली. बदलते जर्सी वाले इस समय के साथ में भारत ने बहुत से इतिहास भी रचे. जिसमें एक टी-20 विश्व कप और आइसीसी विश्व कप भी शामिल है. देखते ही देखते भारतीय टीम ने इस नीले रंग की जर्सी को विश्व के नंबर 1 टीम की पहचान बना दी. 

इस बार इंग्लैंड की जर्सी भी खास है क्योंकि इस बार की जर्सी उनकी 1992 के जर्सी से मिलती-जुलती है. 1992 में इंग्लैंड की टीम तीसरी बार फाइनल में पहुंची थी और उसके बाद अब तक इंग्लैंड की टीम फाइनल में जगह बनाने में असफल रही हैं. 

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