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ऋषि कपूर: कड़ी साधना और परिश्रम से ही कोई 'ऋषि' बनता है

ऋषि कपूर का नाम आते ही मन में एक ऐसे कलाकार की तस्वीर उभरती है जिन्होंने अभिनय के हुनर को अपनी रगों में बसा लिया था.

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aajtak.in
आशुतोष अस्थानानई दिल्ली, 30 April 2020
ऋषि कपूर: कड़ी साधना और परिश्रम से ही कोई 'ऋषि' बनता है ऋषि कपूर

कड़ी साधना और परिश्रम से ही कोई 'ऋषि' बनता है. ऋषि कपूर का नाम आते ही मन में एक ऐसे कलाकार की तस्वीर उभरती है जिन्होंने अभिनय के हुनर को अपनी रगों में बसा लिया था. फिल्म जगत के एक बड़े और मशहूर परिवार से आने के बावजूद ऋषि कपूर ने अपनी मेहनत से ही फिल्मों में लोहा मनवाया और इंडस्ट्री के महाना कलाकारों में शुमार हो गए.

अब लग रहा है कि ये वर्ष इतना निष्ठुर कैसे हो सकता है!

ऊपरवाले, माना कि तू सबसे बड़ा निर्देशक और कहानीकार है मगर ये कौन सी कहानी गढ़ रहा है तू जिसके लिए तुझे इतने बड़े कलाकारों को अपने पास बुलाना पड़ रहा है! कल इरफान खान की खबर से लोगों की आंखें अभी सूखी भी नहीं होंगी कि ऋषि कपूर के निधन की खबर ने सबको हैरान कर दिया.

ऋषि कपूर मेरे दौर के अभिनेता नहीं थे मगर मुझे बेहद पसंद थे.

"हर इश्क़ का एक वक्त होता है...वो हमारा वक़्त नहीं था पर इसका ये मतलब नहीं कि वो इश्क़ नहीं था!"

इश्क़ तो मैंने बहुत किया...फिर चाहे वो रवि वर्मा से हो, अकबर से हो, शेखर गुप्ता से हो, संतोष दुग्गल से हो, रउफ लाला से हो या मुराद अली मुहम्मद से!

इतने सारे किरदार मगर कलाकार सिर्फ एक...अमीर से लेकर गरीब तक, ऋषि कपूर ने हर तरह के चेहरे को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया और उस किरदार को अपने में इस तरह समा लिया जैसे उनकी असली ज़िंदगी ही उस किरदार के इर्द-गिर्द घूमती हो!

"बिकते तो सभी हैं, कुछ पैसों से तो कुछ जज़्बात से"

मैं भी बिक गया था, उनके अभिनय से! एक पल के लिए आंखें बंद करिए और सोचिए कि दीवाना या बोल राधा बोल का वो मासूम अभिनेता रउफ लाला जैसे निर्दयी विलेन का किरदार निभा सकता है! या बॉबी का वो चॉकलेट बॉय हीरो मुल्क फ़िल्म में एक ऐसे मुद्दे पर अभिनय कर सकता है जिसपर समाज में कोई खुलकर बात नहीं करना चाहता!

"प्रेम तो वो रोग है जो आसानी से लगता नहीं, और जब लग जाता है ना, फिर कभी मिटता नहीं."

ऋषि कपूर के लिए भी प्रेम ऐसा ही है...उनके जाने के बाद भी ये प्रेम नहीं मिटेगा.

काश कि मेरे जैसा फैन इस ज़िन्दगी में उनसे कभी मिल सकता...और ये विश्वास मान सकता कि ऋषि जैसा अभिनेता वास्तव में इस दुनिया में मौजूद था!

"जाने से पहले एक आखिरी बार मिलना क्यों ज़रूरी होता है?"

इस सवाल का जवाब तो वीर सिंह को भी नहीं पता था मगर मुझे ये पता है कि वो बड़ा कलाकार जहां भी जाएगा, हर किसी को ज़िन्दगी जीने के तरीके सिखाता रहेगा...पर मैं ये उम्मीद करता हूँ 'कर्ज़' हक़ीक़त बन जाये और ऋषि फिर से हमारी दुनिया में लौट आएं.

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