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चुनाव में दूरदराज के इलाकों में चुनावी चर्चा का जरिया बना शेयरचैट

2015 में लॉन्च हुआ शेयरचैट इस बार के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए बेहद मददगार साबित हुआ. विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपना प्रचार-प्रसार इसके माध्यम से कर रही है. गुगल प्ले स्टोर के आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस ऐप को 10 करोड़ से भी ज्यादा यूजर डाउनलोड कर चुके हैं.

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संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 10 May 2019
चुनाव में दूरदराज के इलाकों में चुनावी चर्चा का जरिया बना शेयरचैट शेयरचैट

2019 लोकसभा चुनाव ने पाचंवे चरण तक के चुनाव का सफर तय कर लिया है. पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बारभी सियासी दलों के लिए सोशल मीडिया लोगों तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका है. बावजूद इसके कि इस बार सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की नजर टेढ़ी रही है फिर भी पार्टियोंने सोशल मीडिया के जरिए प्रचार का अलग-अलग जरिया खोज ही लिया.

2015 में लॉन्च हुआ शेयरचैटइस बार के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए बेहद मददगार साबित हुआ. विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपना प्रचार-प्रसार इसके माध्यम से कर रही है. गुगल प्ले स्टोर के आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस ऐप को दस करोड़ से भी ज्यादा यूजर डाउनलोड कर चुके हैं. और 4.5 करोड़ लोग इसके ऐक्टिव यूजर है.

शेयरचैट के फीचर इंस्टाग्राम के बेहद करीब हैं. लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग है. अभी तक जितने भी चैट ऐप हैं उनमें हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं का ही इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन 4 भाषाओं से शुरू होने वालेइस चैट ऐप में अब तक 14 भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है. भाषाओं की आजादी मिलने की वजह से शहरों से निकलकर ग्रामीण इलाकों में पहुंचने की वजह से इसकी लोकप्रियता और सबस्क्राइबर तेजी से बढ़े हैं. राजनीतिक पार्टियों ने शेयरचैट के भाषा की आजादी को भांप लिया और शेयरचैट पर भी चुनावी माहौल बना दिया .

क्या है शेयरचैट कीविशेषताएं

-शेयरचैट पर 2018 में करिब2.0 करोड़ एक्टिव यूजर थे और जबकि 2019 तक इसकी संख्या 4.5 करोड़ हो गई. शेयर चैटएक ऐसा ऐप है जिसमें अलग से बहुत सारे सेक्शन बनाए गए है.

-कंटेंट को लेकर इसमें बहुतसारे दिशा निर्देश भी दिए गए हैं. जैसे ही कोई आपत्तिजनक कंटेट शेयर होता है कम्यूनिटी गाइडलाइन्स की वजह से इसे फौरन हटा दिया जाता है.

अगर तीन बार से ज्यादा कोई यूजर आपत्तिजनक सामग्रा शेयर करता है तो इसके प्रोफाइल को ब्लॉक कर दिया जाता है.

यहां भक्ति, खबरें, साहित्यऔर फैशल जैसे तमाम ऐसे सेक्शन हैं जिसे लोग देख सकते हैं. असके अलावा वीडियो केलिए भी एक अलग सेक्शन है. यहां सोशल मीडिया के हैशटैग के हिसाब से कैटिगरी बदलतीरहती है. जब जिस समय जो इवेंट होता है उसके हिसाब से एक कैटेगरी बन जाती है. यहां लोगो के व्यूज से लेकर लाइक, कमेंट शेयर सब दिखता है.

नेता भी शामिल है शेयरचैटकी रेस में

मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार पिछले साल से ही शेयरचैट से राजनीतिक पार्टियां और नेता जुड़ चुके थे. मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार 400 से अधिक पॉलिटिकल हैंडल शेयरचैट से जुड़े हैं. और अपनी-अपनी पार्टीके हित में पोस्ट डालते हैं. इनका एकमात्र लक्ष्य है कि किसी भी तरह वोट बैंक का बढ़ना. चूंकि इसके ज्यादातर यूजर 18-35 साल के बीच की उम्र के ग्रामीण लोग हैं. इसलिए युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सियासी दल इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं.

 राजनीति के लिए अलग सेक्शन

चुनावी जोश को देखते हुए शेयरचैट में चुनाव के लिए एक अलग से सेक्शन बना दिया गया है. वैसे शेयरचैट के कंटेंट को सोशल मीडिया के टैग के हिसाब से भी बदलते हैं. जैसे लोकसभा चुनाव 2019,एक बार फिर मोदी सरकार, महागठबंधन, कांग्रेस की रैली, राहुल गांधी की रैली तमाम ऐसे उदाहरण जो शेयरचैट के कैटेगिरी हैं. राजनेता की तारीफ से लेकर तंज तक, रैली और रोड शो की तस्वीरों से लेकर नेताओं के भाषण तक के वीडियोज जमकर शेयर और लाइक्स किएजा रहे हैं.

कुल मिलाकर 2019 के लोकसभा चुनाव में शेयरचैट सियासी दलों की बात को दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाने का एक लोकप्रिय माध्यम बनकर उभरा है.

(दीक्षा प्रियदर्शी आइटीएमआइ की छात्र हैं और इंडिया टुडे में प्रशिक्षु हैं)

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