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लोकसभा चुनाव 2019 - पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग पर क्या बोली दिल्ली?

आम आदमी पार्टी की पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग पर दिल्ली वालों ने दी बेबाक राय.

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जवाहर लाल नेहरू 10 May 2019
लोकसभा चुनाव 2019 - पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग पर क्या बोली दिल्ली? दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

दिल्ली में ‘पूर्ण राज्य के दर्जे’ की मांग को लेकर राज्य का सियासी पारा बढ़ा हुआ है. इस मांग को लेकर दिल्ली के तीनों सियासी दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने घोषणा-पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का वादा किया है. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को आधार बनाकर ही आम आदमी पार्टी 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ रही है. जब हमने इस मुद्दे पर दिल्लीवालों की राय जानने की कोशिश की इस पर मिला-जुला रुझान सुनने को मिला.

पेशे से वकील प्रभाष गिरि कहते हैं, राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते यहां की कुछ व्यवस्थाएं और सुरक्षा से जुड़े पहलू केंद्र सरकार की जिम्मेदारी हैं और संविधान का अनुच्छेद 239 एए उसे इन मसलों पर नियंत्रण का कानूनी अधिकार देता है. यहां एक तरफ तो एक चुनी हुई विधानसभा और सरकार है, वहीं दूसरी तरफ संविधान का अनुच्छेद 239एए इस सरकार के अधिकारों में कटौती करता है. इस स्थिति को देखते हुए दिल्ली को पूर्ण का राज्य का दर्जा देने की मांग जायज नहीं लगता.

वहीं बुराड़ी के गांव नत्थूपुरा के इन्द्र मोहन सिंह कहते है केजरीवाल का दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग एकदम जायज है. कारण साफ है कि जब तक दिल्ली सरकार को पुलिस और जमीन अधिग्रहन जैसै अधिकार नहीं मिलते तब तक दिल्ली के विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों में बाधा पैदा होती रहेगी.

वहीं नजफगढ़ के ढ़ासा गांव के राम अवतार शर्मा कहते हैं कि दिल्ली सरकार के आधीन पुलिस करना व्यवहारिक रुप से सही नहीं है. इसका कारण है कि दिल्ली में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेशी दूतावास और विदेशी नेताओं के दौरे होते हैं. उनकी सुरक्षा किसी राज्य सरकार को कैसे सौंपी जा सकती है.

वहीं नजफगढ़ के कैर गांव के चौधरी खजान सिंह कहते हैं कि दिल्ली में आप और केंद्र में भाजपा की सरकार आने के पहले तक यहां राज्य और केंद्र की सरकारें आपस में बातचीत और समझौते से सभी मुद्दों का हल निकालती रही हैं. लेकिन बीते तीन-चार सालों में यह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब यहां उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच हमेशा टकराव की स्थिति बनी रहती है. दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) ‘आप’ सरकार के कामकाज में बेवजह बाधा डालने का काम करते है. जैसै फाइलें रोक कर रखना.

कौन-कौन से मुद्दें पर हैं टकराव

दिल्ली पुलिस पर अधिकार

आप सरकार हमेशा से दिल्ली पुलिस को अपने अधिकार क्षेत्र में लाने की मांग करती है. जाहिर है कि हाई अलर्ट पर रहने वाली देश की राजधानी होने और वीवीआइपी का गढ़ होने के नाते दिल्ली पुलिस केंद्र के आधीन है.

डीडीए पर कब्जा पाना

आप की सबसे बड़ी मंशा डीडीए पर अधिकार पाने की भी है. इसमें जमीन का मुद्दा सबसे बड़ा है, क्योंकि दिल्ली सरकार के कई बड़े फैसले जमीन की कमी की वजह से पूरे नहीं हो पाते.

साफतौर पर यह पूरी कवायद राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश है, देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी मसले का क्या हल निकलता हैं.

जवाहर लाल नेररु इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट के छात्र हैं और इंडिया टुडे में प्रशिक्षु हैं

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