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क्या जीएसटी रेट कट से आएंगे रियल एस्टेट में अच्छे दिन?

जीएसटी की दरों में की गई यह कटौती घर खरीदने वालों के लिए एक बड़ी सौगात है. इससे डेवलपर्स और खरीदार दोनों को खुशी मनाने का मौका मिला है. ऐसे में जब मांग और आपूर्ति दोनों मोर्चे पर इस सेक्टर में दबाव की स्थिति बनी हुई है. 

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर 28 March 2019
क्या जीएसटी रेट कट से आएंगे रियल एस्टेट में अच्छे दिन? फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

हाल ही में जीएसटी परिषद ने निर्माणाधीन अफोर्डेबल हाउसिंग प्रॉपर्टीज पर जीएसटी दर को 8 फ़ीसदी से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया और अन्य अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज गैर-अफोर्डेबल सेगमेंट के लिए इसे 12 फ़ीसदी से 5 फ़ीसदी कर दिया गया है. हालांकि नई दरों का मतलब है कि डेवलपर्स अब इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं ले सकते हैं. इसमें ऐसे प्रोजेक्ट शामिल हैं जिनकी बुकिंग 1 अप्रैल, 2019 से पहले हो गई हो. 1 अप्रैल, 2019 से शुरू होने वाले नए प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य रूप से नई दरें लागू होंगी. 

बीते हफ्ते वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया है. जीएसटी की दरों में की गई यह कटौती घर खरीदने वालों के लिए एक बड़ी सौगात है. इससे डेवलपर्स और खरीदार दोनों को खुशी मनाने का मौका मिला है. ऐसे में जब मांग और आपूर्ति दोनों मोर्चे पर इस सेक्टर में दबाव की स्थिति बनी हुई है. डेवलपर्स ने मकान बनकर तैयार कर दिए हैं, लेकिन बाज़ार में खरीदार नहीं हैं. यानी, मकानों की आपूर्ति तो है, लेकिन उसकी मांग में नरमी है. ऐसे में सरकार का यह कदम मकान खरीदारों के साथ-साथ डेवलपर्स लिए राहत भरा है. 

बैठक में किफायती आवास की परिभाषा में भी बदलाव हुआ. जीएसटी परिषद ने एक प्रॉपर्टी को अफोर्डेबल हाउसिंग के अंतर्गत शामिल होने के लिए इसकी कीमत अधिकतम 45 लाख तक तय की है. साथ ही मेट्रो शहरों (दिल्ली एनसीआर, मुंबई, चेन्नै, कोलकाता, बेंगलूरू, हैदराबाद) में 60 वर्ग मीटर (646 वर्ग फीट) का कारपेट एरिया और अन्य जगहों पर 90 वर्ग मीटर (969 वर्ग फीट) निर्धारित किया है. पहले यह दायरा मेट्रो शहरों  50 वर्ग मीटर था.

पहले निर्माणाधीन संपत्ति पर उच्च जीएसटी दर का मतलब था कि लोग रेडी टू मूव इन प्रॉपर्टीज को ज्यादा प्राथमिकता देते थे. हालांकि कम समय में अगर इसे देखें तो इससे बिक्री और कलेक्शन बाधित हो जाएगा, क्योंकि यह जीएसटी के शुरुआती दिनों के दौरान हुआ था जो जुलाई, 2017 में लागू किया गया था. 

रीयल एस्टेट कंपनी सिग्नेचर ग्लोबल के फाउंडर और चेयरमैन और साथ ही नेशनल काउंसिल ऑन अफोर्डेबल हाउसिंग, अस्सोचैम के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल कहते हैं, "जीएसटी की दरों में कमी के अलावा जब अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दिया गया तो यह सेक्टर के लिए एक बूस्टर साबित हुआ है.  क्योंकि अब इस श्रेणी के अंतर्गत अधिक से अधिक संपत्तियां शामिल होंगी और इस तरह बड़ी संख्या में खरीदारों को लाभ देगा.” 

कुछ अनुमान कहते हैं कि शीर्ष सात शहरों में लगभग 6 लाख निर्माणाधीन इकाइयां हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा 40-45 लाख रुपये की कीमत की श्रेणी में आता है. यह अनुमान है कि ग्राहकों को उन जगहों पर अधिक लाभ होगा जहां कीमतें लगभग 6,000 रूपए प्रति वर्गफुट हैं। (यदि निर्माण लागत 2000-2300 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच है). साथ ही कुल खरीद पर खरीदारों के भुगतान में लगभग 7 प्रतिशत की कमी होगी. 

गुलशन होम्ज़ के डायरेक्टर दीपक कपूर कहते हैं कि, "कई रीयल एस्टेट कंपनियों के पास इन्वेंट्री है जो इस श्रेणी में आती है और वे खरीदारों का ध्यान आकर्षित करेंगे.  इस कदम से निश्चित रूप से मांग में तेज़ी आएगा. अब हम उम्मीद कर रहे हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से लागू होने वाले नए जीएसटी दरों से सेक्टर में मांग बढ़ेगी. डेवलपर्स यह सुनिश्चित करने के लिए तेजी से काम करें कि वे प्रोजेक्ट की लागत और बिक्री मूल्य को तय करने बाद नई दर को लागू करने के लिए तैयार हैं. हालांकि ग्राहकों को संशोधित मूल्य निर्धारण के बारे में अवगत कराना और स्थिति को समझाना सबसे बड़ी चुनौती होगी. मार्किट की मौजूदा स्थिति देखते हुए हमें नहीं लगता कि घरों के दाम में भारी बदलाव आएगा और हम यह अपेक्षा करते हैं कि यह बदलाव पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के सेंटीमेंट्स पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा.”

आरजी ग्रुप के एमडी और क्रेडाई एनसीआर वाइस प्रेसिडेंट राजेश गोयल कहते हैं, “अधिकांश डेवलपर्स ने 1 अप्रैल, 2019 से पहले शुरू की गई परियोजनाओं के लिए कच्चा माल पहले ही खरीद लिया है और वे खरीदार को जीएसटी शुल्क के बारे में थोडा भ्रम में थे. अब डेवलपर्स राहत की सांस ले सकते हैं. अब हम बेहतर मार्केट की ओर देख रहे हैं क्योंकि नए प्रोजेक्ट के लिए दरें 5 प्रतिशत और 1 प्रतिशत होंगी. इसका मतलब होगा कि अधिक संख्या में लोग अब घर खरीदने की कोशिश करेंगे.”

दिल्ली-एनसीआर पर असर

दिल्ली एनसीआर (दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, फरीदाबाद तक) अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत आता है इसलिए यहां की बिक्री में तेजी देखी जाएगी. प्रॉपटाइगर के अनुसार रीयल एस्टेट डेवलपर्स चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में नोएडा में 30,000 से अधिक घर डिलीवर करेंगे. वित्त वर्ष 2020  में 94000 से अधिक यूनिट्स को यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा एक्सप्रेसवे क्षेत्रों में डिलीवर किए जाने की संभावना है.

इसी तरह, गुरुग्राम में डेवलपर्स मार्च के अंत में तिमाही के दौरान लगभग 24,000 हाउसिंग यूनिट डिलीवर कर सकते हैं. इनमें से 12,300 इकाइयां द्वारका एक्सप्रेसवे और सोहना मार्केट में हैं. प्रॉपटाइगर के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अंकुर धवन कहते हैं, 'हाल के दिनों में एक ट्रेंड देखा गया कि निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स बिक्री के धीमे दौर से गुजर रहे थे. नया फैसला आने के साथ जल्द ही हम रीयल एस्टेट सेक्टर में तेजी देखेंगे. यह फैसला रीयल्टी सेक्टर को एक नए दौर की ओर ले जाएंगा जहां प्रोजेक्ट्स की घोषणा के कुछ दिनों के भीतर ही इसको बेचा जा सकेगा. बेशक यह डेवलपर की विश्वसनीयता और प्रोजेक्ट्स की लोकेशन पर निर्भर करेगा।”

गैर-मेट्रो शहरों के लिए लाभ

इन शहरों में पहले से ही कीमतें प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं और जीएसटी में कमी के बाद यहां बिक्री बढ़ने वाली है. हालांकि, इन शहरों में प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे केवल जीएसटी ही एकमात्र कारण नहीं है क्योंकि कनेक्टिविटी बढ़ी है और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी अपनी भूमिका निभा रहा है. जीएसटी में कमी से इन जगहों पर बाजार को और बढ़ावा मिलेगा. जीएसटी काउंसिल के ताजा फैसले से अधिक से अधिक खरीदारों को इन शहरों में अपना घर खरीदने के लिए बल मिलेगा. खासकर दिल्ली-एनसीआर में जिनका खरीदारों का बजट पर्याप्त नहीं हैं, वे इन शहरों की ओर अधिक आकर्षित होंगे.”

टीडीआई इन्फ्राकॉर्प के एमडी कमल तनेजा कहते हैं कि, “पानीपत, भिवाड़ी और कुंडली जैसे दिल्ली के पास क्षेत्रों में पहले से ही परिवर्तन देखा जा रहा है. “हमारे पास कुंडली में TDI सिटी है जो पहले से ही दिल्ली के बहुत करीब है और दिल्ली के कई खरीदारों ने यहां घर खरीदे हैं. हाल ही में केएमपी का काम पूरा हो चुका है और हम इसका पूरा लाभ ले रहे है. अब जीएसटी परिषद का फैसला भी आ चुका है. यह निश्चित रूप से रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत है.”

फेयरवेल्थ ग्रुप के सीनियर वीपी, निपुण गाबा कहते हैं, “हम हमेशा से भिवाड़ी से जुड़े रहे हैं जो दिल्ली के साथ एनएच 8 के माध्यम से अच्छी तरह कनेक्टेड है और यहां दरें भी अफोर्डेबल हैं. जब अफोर्डेबल हाउसिंग पर जीएसटी में कमी पर काउंसिल का फैसला आया तो हम सबसे ज्यादा खुश थे क्योंकि इसका मतलब होगा हमारे सम्मानित खरीदारों के लिए अधिक बचत और हमारे लिए अधिक व्यवसाय. हमें यकीन है कि भिवाड़ी में प्रॉपर्टी अब तेज गति से बिकेगी और खरीदारों के साथ-साथ दिल्ली एनसीआर के लोग यहाँ निवेश करेंगे, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में घर नहीं बना सकते हैं.”

रियल एस्टेट सेक्टर को लगता है कि इस निर्णय से कस्टमर्स के सेंटीमेंट्स में सुधार होगा क्योंकि वे अब निर्माणाधीन संपत्तियों के प्रति अधिक झुकाव दिखाएंगे जिसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में बिक्री में सुधार होगा.

(जवाहर लाल नेहरू आइटीएमआइ के छात्र हैं और इंडिया टुडे में प्रशिक्षु हैं)

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