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4 डी एनालिसिस से होगी करियर की कुंडली तैयार

हर करियर और कोर्स सबके लिए नहीं होता. मगर दुविधा ये है कि आखिर कैसे अपने वाले करियर और पढ़ाई को चुनें? इस दुविधा से हर कोई गुजरता है.
4 डी एनालिसिस से होगी करियर की कुंडली तैयार ब्रेनोस्कोपी
संध्या द्विवेदी 28 August 2018

स्कूलों और दफ्तरों में उबासी लेते चेहरे अक्सर दिख जाते हैं. पढ़ाई और काम के बोझ के मारे इनलोगों के चेहरे में असंतुष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. वहीं कुछ लोग उसी पढ़ाई और काम को करके खुश रहते हैं, क्यों? वजह सीधी है. पहले किस्म के लोगों के लिए उसी काम का रुचिकर होना और दूसरे के लिए उसकी पसंद का ना होना. बस यहीं पर करियर काउंसलर की भूमिका अहम हो जाती है. मनोवैज्ञानिक तरीके से काउंसलिंग करने का चलन नया नहीं है. मगर जब यही करियर काउंसलिंग 4 डी (डाइमेंशनल) ब्रेन एनालिसिस के जरिए की जाती है तो आपके करियर की पक्की कुंडली तैयार हो जाती है. 

क्या होती है 4 डी ब्रेन मैपिंग ?

ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेसन के चेयरमैन और डॉ. आलोक कुमार मिश्रा ने अपनी टीम के साथ मिलकर करियर काउंसलिंग की 4 डी ब्रेन मैपिंग टेक्नोलोजी को तैयार किया है. माइंड बॉडी मेडिसिन एंड ब्रेन मैपिंग एक्सपर्ट डॉ.मिश्रा कहते हैं, ब्रेन मैपिंग केलिए व्यक्तित्व के चार आयामों का गहनता के साथ विश्लेषण होता है.

सबसे पहलेजेनेटिक क्षमता का आकलन होता है. दूसरे नंबर पर न्यूरोलॉजिकल, तीसरे नंबर पर साइकोलॉजिकल और चौथे नंबर परबायोलॉजिकल विश्लेषण होता है. फिर इन सारे आयामों के विश्लेषण के बाद सामने आएनतीजों को एक साथ रखकर बनाई जाती है आपके दिमाग की कुंडली या कहें तैयार किया जाताहै ब्रेन कार्ड.

जेनेटिक क्षमता का आकलन- वैज्ञानिक रूप से कोई दो राय नहीं कि हमारे व्यक्तित्व और क्षमताओं का एकबड़ा हिस्सा आनुवांशिक होता है. यानी पीढ़ी दर पीढ़ी बहुत कुछ हमें अपने पूर्वजोंसे मिला है. यह विरासत हमारे डीएनए में सुरक्षित रहती है.

बस इसी डीएनए की जांच करसबसे पहले जेनेटिक मैपिंग की जाती है. डीएनए के भीतर मौजूद जेनेटिक कोड को डिकोडकर यह पता लगाया जाता है कि आखिर आपके पूर्वजों ने आपको क्या क्षमता दी है.

क्या कहती हैं दिमाग की तरंग?

डॉ. आलोक मिश्रा कहते हैं कि हमारे दिमाग के भीतर कई तरह की तरंगे होती हैं. हर व्यक्ति में इनकीसंख्या और बहने की गति अलग-अलग होती है. जैसे ध्यान की अवस्था में एक खास तरह कीतरंग तेज होगी तो तार्किक काम करते वक्त दूसरे तरह की तरंग बहेगी. हमारे सोचने समझने, समस्याओं को सुलझाने औरनिर्णय लेने की क्षमता भी एक खास तरह की तरंग की गति के जरिए पता लगाई जा सकती है.ये तरंगे हर दिमाग में बहती हैं. लेकिन कौन सी तरंग किस व्यक्ति में सबसे ज्यादा प्रभावी है, इसका पता लगानेके लिए एक खास तरह के उपकरण इलेक्ट्रो इनसेफेलोग्राम (ईईजी) का इस्तेमाल होता है.इस पूरी प्रक्रिया के जरिए न्यूरोलोजिकल मैपिंग होती है.

बायोलोजिकल आयाम-तीसरे विश्लेषण में दिमाग के प्रभावी हिस्से के बारे में जानकारी इकट्ठी की जाती है.जैसे दिमाग दो हिस्सों में बंटा होता है, लेफ्ट और राइट हेमीस्फीयर. अगर राइट हेमीस्फीयर सक्रिय हुआ तो आप में कला सेजुड़े क्षेत्र की क्षमताएं हैं और लेफ्ट तो तार्किक क्षेत्र जैसे गणित, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में जाने की क्षमताएंहैं.

साइकोलोजिकल आयाम-अंत में साइकोलोजिकल आयाम को जानने के लिए कुछ प्रश्नावलियां दी जाती हैं.जिनके जवाबों का विश्लेषण कर बताया जाता है कि व्यक्तित्व कैसा है, आसपास का वातावरण कैसा है, आपके दोस्त कैसे हैं. कुल मिलाकर आपकेव्यक्त्वि और बाहरी वातावरण का आकलन कर पता लगाया जाता है कि आप इंट्रोवर्ट यानीखुद में रहने वाले हैं या फिर एक्ट्रोवर्ट यानी खुलकर संवाद करने वाले हैं.

इस बारे मेंगुजरात के जिप्स साइकेट्रिक हॉस्पिटल और डिएडिक्शन सेंटर एवं कोलंबिया एशियाहॉस्पिटल में सीनियर साइकोलॉजिस्ट प्रतिभा यादव कहती हैं, '' मनोवैज्ञानिक टेस्ट के जरिए ज्यादातर सेंटर्समें काउंसलिंग की जा रही है. लेकिन 4 डी एनालिसिस का उपयोग कर करियर का कच्चा नहीं बल्कि पक्का नक्शा बनाया जासकता है. क्योंकि हर व्यक्ति की क्षमताएं उसके आनुवांशिक, व्यावहारिक, बायोलोजिकल औरमनोवैज्ञानिक कैरेक्टर का मिश्रण होती हैं."

 डॉ. आलोक कहतेहैं, जिंदगी का रिपोर्ट कार्डखराब न हो इसके लिए अपने ब्रेन का रिपोर्ट कार्ड जरूर बनवा लें.

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