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ममता का मीम शेयर करने पर जेल भेजना ज्यादती

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नकली तस्वीर वाला मीम सोशल मीडिया पर शेयर करने के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि व्यंग्य या राजनीतिक तंज वाले मीम शेयर करना इतना बड़ा गुनाह है जिसके लिए जेल भेजा जाए. बहरहाल, इस केस में गिरफ्तार भारतीय जनता युवा मोर्चा की स्थानीय नेता प्रियंका शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है और कोर्ट ने उससे माफी मांगने को भी कहा है

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मंजीत ठाकुर/ मनीष दीक्षित नई दिल्ली, 14 May 2019
ममता का मीम शेयर करने पर जेल भेजना ज्यादती फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नकली तस्वीर वाला मीम सोशल मीडिया पर शेयर करने के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि व्यंग्य या राजनीतिक तंज वाले मीम शेयर करना इतना बड़ा गुनाह है जिसके लिए जेल भेजा जाए. बहरहाल, इस केस में गिरफ्तार भारतीय जनता युवा मोर्चा की स्थानीय नेता प्रियंका शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है और कोर्ट ने उससे माफी मांगने को भी कहा है. 

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि ये मामला इतना संगीन नहीं है. ये पुलिस की ज्यादती है. उपाध्याय कहते हैं, पुलिस किस तरह सरकार और नेताओं के दबाव में काम करती है, ये मामला इसका जीता जागता सुबूत है. दरअसल, पुलिस की कोई जिम्मेदारी कानूनन तय नहीं की गई है. वो मनमाने ढंग से धाराएं लगाती है. इस मामले में आगे होगा ये कि चार्जशीट दाखिल होगी, गवाहों के बयान होंगे और आरोपी बरी हो जाएगी. लेकिन उसे जेल जाने के रूप में जो जलालत झेलनी पड़ी है उसकी भरपाई नहीं हो सकेगी. मीम शेयर करना और चुटीले मीम शेयर करना सोशल मीडिया में आम बात है. उपाध्याय कहते हैं, दरअसल हमारे यहां के कानून अंग्रेजों के जमाने वाले हैं जो सरकार के पक्ष में झुके हुए हैं. अमेरिका या यूरोपीय देशों में पुलिस फर्जी मामले बनाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष प्रियंका के वकील ने दलील दी कि उसकी गिरफ्तारी से ही पहले पोस्ट डिलीट कर दी गई थी. और वो अकेली नहीं थी जिसने ये मीम शेयर किया था. उसे जेल भेजना संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, वह एक चुनाव लड़ रही पार्टी की नेता है. अगर वो एक आम शख्स होती तो कोई बात नहीं थी. इस पर वकील ने कहा, भाजपा नेताओं के भी कार्टून और कैरीकेचर सोशल मीडिया पर चल रहे हैं. क़ल को कोई दूसरा मामला ऐसा हो सकता है और फिर उसे भी जमानत के लिए माफी मांगनी होगी. मीम अब भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

 इसके अलावा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े इस मामले के अन्य पहलुओं पर विचार के लिए अदालत अभी विचार करेगी. इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस हुआ है. इस दौरान एक बार वकील ने आईटी एक्ट की विवादित धारा66ए का भी मुद्दा उठाया लेकिन उस पर बहस नहीं हो सकी. 2015 में सुप्रीम कोर्ट आईटी एक्ट की इस धारा को रद्द कर दिया था.  

इससे पहले पश्चिम बंगाल की एक निचली अदालत ने प्रियंका को 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया था. उन पर मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की धारा में केस दर्ज किया गया था. जमानत का मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट इसलिए आया क्योंकि पश्चिम बंगाल में वकीलों की हड़ताल चल रह है.

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