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जानिए क्‍या है न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप?

नरेंद्र मोदी इन दिनों विदेश नीति और कूटनीति को साधने में दिन-रात एक किए हुए हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह एक विशेष क्लब न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को दाखिल कराना है. जानें इसके बारे में.

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aajtak.in
ऋचा मिश्रा नई दिल्‍ली, 13 June 2016
जानिए क्‍या है न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप? Nuclear Suppliers Group

नरेंद्र मोदी इन दिनों विदेश नीति और कूटनीति को साधने में दिन-रात एक किए हुए हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह एक विशेष क्लब न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को दाखिल कराना है. जानें इसके बारे में.

कौन-कौन हैं इसके सदस्‍य:
48 मुल्क़ इसके सदस्य हैं
5 परमाणु ताक़त देश हैं + 43 अन्य सदस्य

कब बना यह ग्रुप:
ये समूह साल 1974 में भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बाद बनाया गया था.

इसका काम क्या है?
परमाणु शस्‍त्र अप्रसार के लिए परमाणु सामग्री के कारोबार पर नियंत्रण रखता है.
ये सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि असैन्य इस्तेमाल के लिए खरीदा गया यूरेनियम, परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल ना हो

भारत के लिए ज़रूरी क्यों?
न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप ज्‍़यादातर अंतरराष्ट्रीय परमाणु कारोबार पर कंट्रोल करता है
इसकी सदस्यता मिलने से दूसरे देशों से टेक्‍नोलॉजी इस्तेमाल करने और परमाणु सामग्री खरीदने में आसानी होती है.

ये मामला परमाणु बिजली से जुड़ा है:
2.2 फीसदी हिस्सेदारी है मौजूदा इंस्टॉल्ड कैपेसिटी में परमाणु ऊर्जा की.
40 फीसदी हिस्सा भारत की बिजली का गैर-फॉसिल ईंधन से आएगा साल 2030 तक और इसमें परमाणु ऊर्जा अहम योगदान अदा करेगी.
5780 मेगावॉट कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी के साथ परमाणु ऊर्जा ऑपरेशन में है.
63 मेगावॉट का लक्ष्य रखा है भारत ने साल 2032 तक

ये वैश्विक बाज़ार का मामला है:
भारत को वैश्विक परमाणु इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी तक पहुंच चाहिए.
भारत परमाण ऊर्जा का निर्यातक बनने का ख्‍़वाब भी देख रहा है.
NSG सदस्य बनने से भारत को ज्‍़यादा ईंधन तक पहुंच मिलेगी और वैश्विक बाज़ार भी मिलेगा
ये भारतीय इंडस्ट्री के लिए वैश्विक बाज़ार तक पहुंचने का ज़रिया बन सकता है

ये दर्जे की बात है:
NSG के फैसले आम सहमति पर आधारित होते हैं, ना‌ कि बहुमत पर. ऐसे में सभी सदस्य देशों की बात अहमियत रखती है
भारत को भी परमाणु ईंधन और टेक्नोलॉजी की प्रक्रिया पर अपनी राय रखने का मौका मिलेगा
इसकी सदस्यता भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मेंबरशिप से जुड़े दावे को हवा देगी
भारत का रणनीतिक और सामरिक प्रतिद्वंद्वी चीन NSG का सदस्य है और उसे एशिया की सियासी-भौगोलिक स्थिति में इससे काफी फायदा मिलता है

रास्ता ‌किसने रोका है?
चीन समेत, कुछ देशों ने ये कहते हुए रोड़ा अटकाया हुआ हैः
भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और समग्र परीक्षण पाबंदी संधि (CTBT) पर दस्तख़त नहीं किए हैं
भारत को इनमें से किसी अंतरराष्ट्रीय संधि पर दस्तख़त कर परमाणु अप्रसार को लेकर प्रतिबद्धता जतानी होगी

NPT पर दस्तख़त करने में दिक्कत क्या?
इस संधि के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महज़ 5 सदस्य ही परमाणु हथियार बना और रख सकते हैं
भारत इसे और इस जैसी दूसरी संधियों को भेदभावपूर्ण मानता है
भारत ने साल 2008 में अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु करार में परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक लगाने की बात कही थी

कौन दे रहा है हमारा साथ?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच में से चार सदस्य हमारे दावे का साथ दे रहे हैं
सिर्फ चीन है, जो अड़ंगा लगा रहा है
कई दूसरे मुल्क़ों ने भी भारत की सदस्यता का समर्थन किया है

हम कामयाब होंगे या नहीं?
बस कुछ ही दिनों की बात है और फिर पता चल जाएगा
10 मईः भारत ने औपचारिक रूप से न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के लिए आवेदन किया
9 जूनः वियना में NSG की बैठक में भारत के आवेदन की समीक्षा होगी.

सौजन्‍य: NEWSFLICKS

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