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जन्मदिन: डॉ.मनमोहन जिन्होंने अर्थव्यवस्था को संकट से उबारा और मध्यवर्ग को मोहा

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उदारवादी अर्थव्यवस्था का जनक माना जाता है. उनके जन्मदिन पर जानिए उनके जीवन से जुड़े कुछ अनकहे पहलू.

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aajtak.in नई दिल्ली, 26 September 2019
जन्मदिन: डॉ.मनमोहन जिन्होंने अर्थव्यवस्था को संकट से उबारा और मध्यवर्ग को मोहा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (फोटो: indiacontent.in)

  • पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन 87 साल के हुए
  • देश में आर्थिक सुधारों को लागू करने का श्रेय
  • भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री रहे मनमोहन

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का आज 87 साल के हो गए हैं. आज ही दिन 26  सितंबर 1932  में  पाकिस्तान में 'गाह' नामक गांव में उनका जन्म हुआ था. गाह अब पाकिस्तान के पंजाब सूबे में स्थित है. वह भारत के 13वें प्रधानमंत्री बने और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले पहले सिख हैं. आइए जानते हैं उनकी बारे में.

यूपीए को 2004 के चुनाव के बाद बहुमत मिला तो मनमोहन सिंह को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की इच्छा से प्रधानमंत्री चुना गया था.

बंटवारे से ऐसे बदला था मनमोहन सिंह का जीवन

जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो उनका परिवार भारत आ गया. मनमोहन सिंह एक कुशल राजनेता के साथ-साथ एक विद्वान, अर्थशास्त्री और विचारक भी हैं. उनकी पत्नी का नाम गुरशरण कौर है और वह तीन बेटियों के पिता है. मनमोहन सिंह लोकसभा चुनाव 2009 में यूपीए को मिली जीत के बाद प्रधानमंत्री बने. वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के ऐसे प्रधानमंत्री बन जो सफलतापूर्वक पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने.

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फोटो indiacontent.in

21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक मनमोहन सिंह ने नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में वित्त मंत्री के रूप में भी कार्य किया. मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत की. आपको बता दें, मनमोहन सिंह के बाद भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार दूसरी प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला है.

यहां से की पढ़ाई

मनमोहन सिंह ने चंडीगढ़ से बीए (ऑनर्स) की डिग्री ली. फिर इसी यूनिवर्सिटी से इकॉनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) एमए की डिग्री ली. इसके बाद वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए. यहां से उन्होंने पीएचडी की डिग्री ली. 1955 और 1957 में कैंब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 'राइट्स पुरस्कार' से उन्हें सम्मानित किया गया था. फिर मनमोहन सिंह ने 'नफील्ड कॉलेज (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी) से डी फिल पास किया.

बाद में मनमोहन सिंह पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे. उन्होंने दो साल तक 'दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स' में पढ़ाया. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में मानद प्राध्यापक भी बने. इस समय तक डॉक्टर मनमोहन सिंह एक अर्थशास्त्री के रूप में काफ़ी प्रसिद्ध हो चुके थे. उनकी  प्रतिभा को इंदिरा गांधी ने सम्मानित किया और इन्हें 'रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया' का गवर्नर बनाया गया.

क्या सच में एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

मनमोहन सिंह 72 साल के थे जब उन्हें प्रधानमंत्री का पद सौंपा गया. तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष का विरोध देखते हुए स्वयं प्रधानमंत्री बनने से इनकार करके मनमोहन सिंह को भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में अनुमोदित किया था. डॉ. मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री का कार्यकाल 22  मई, 2004 से शुरू हुआ था. वह 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के पद पर रहे. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बहुमत मिला. जिसके बाद नरेद्र मोदी प्रधानमंत्री के पद के लिए चुने गए.

आपको बता दें, अपने राजनीतिक जीवन में मनमोहन सिंह वर्ष 1991 से भारत के संसद के ऊपरी सदन (राज्‍यसभा) के सदस्‍य रहे हैं, जहां वह वर्ष 1998 और 2004 के दौरान विपक्ष के नेता थे. मनमोहन सिंह को 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्री काल में वित्त मंत्री के रूप में किए गए आर्थिक सुधारों का श्रेय भी दिया जाता है.

1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को भारतीय योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया. इस पद पर उन्होंने निरन्तर 5 सालों तक कार्य किया, जबकि 1990 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार बनाए गए. इसी दशक में उदारवादी नीतियों को लागू करने की वजह से वह दौरान वह मध्यवर्ग के चहेते बन गए. इस सुधारों की वजह से भारतीय बाजार खुला और यहां का मध्यवर्ग समृद्ध हुआ.

कई पुरस्कारों से हुए सम्मानित

- 1987 में मनमोहन सिंह को 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया

- 1995 में इंडियन साइंस कांग्रेस का 'जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार'

- 1993 और 1994 का 'एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर'

- 1994 का यूरो मनी 'अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ़ द ईयर'

- 1956 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी  का 'ऐडम स्मिथ पुरस्कार'

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