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जयंती: सड़क से संसद तक गूंजता है दुष्यंत कुमार के लेखन का हर स्वर

दुष्यंत कुमार  ऐसे ग़ज़लकार हैं जिनकी बातें मुर्दों में भी जान भर दे. आज उनकी जयंती पर पढ़ें उनके बारे में ये खास बातें...

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aajtak.in
प्रियंका शर्मा नई दिल्ली, 01 September 2019
जयंती: सड़क से संसद तक गूंजता है दुष्यंत कुमार के लेखन का हर स्वर दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार हिंदी कवि और गजलकार थे. हिंदी कविता और गजल के क्षेत्र में जो लोकप्रियता दुष्यंत कुमार को मिली, वो दशकों बाद किसी कवि को नसीब होती है. आज उनकी 86वीं जयंती है. आज ही के रोज उनका जन्म हुआ था.  दुष्यंत एक कालजयी कवि हैं और ऐसे कवि समय काल में परिवर्तन हो जाने के बाद भी प्रासंगिक रहते हैं. वह जो भी लिखते उनका स्वर सड़क से संसद तक गूंजता है. इस कवि ने कविता, गीत, गज ल, काव्य, नाटक, कथा आदि सभी विधाओं में लेखन किया लेकिन गज़लों की अपार लोकप्रियता मिली.

आइए जानते हैं उनके बारे में

दुष्यंत कुमार का जन्म बिजनौर जनपद (उत्तर प्रदेश) के ग्राम राजपुर नवादा में 1 सितंबर 1933 को हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की है. जिसके बाद आकाशवाणी, भोपाल में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रहे. दुष्यंत बहुत, सहज और मनमौजी व्यक्ति थे.  दुष्यंत का पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था. शुरुआत में दुष्यंत कुमार परदेशी के नाम से लेखन करते थे.

'दीवार' देखकर अमिताभ के फैन हो गए थे दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार का साल 1975 में निधन हो गया था और उसी साल उन्होंने यह पत्र अमिताभ को लिखा था.  उन्होंने पत्र लिखकर उनके अभिनय की तारीफ की थी और कहा था कि वे उनके ‘फैन’ हो गए हैं.‘दीवार’ फिल्म में उन्होंने अमिताभ की तुलना तब के सुपर स्टार्स शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा से भी की थी.

हिन्दी के इस महान साहित्यकार की धरोहरें ‘दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय’ में सहेजी गई हैं. इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि साहित्य का एक युग यहां पर जीवित है. बता दें दुष्यंत कुमार का वर्ष 1975 में निधन हो गया था और उसी साल उन्होंने यह पत्र अमिताभ को लिखा था.

दुष्यंत का जन्मदिन पर कुछ शेर पढ़िए, ये शेर आपको आज के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की याद दिलाएंगे.

1. ''अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,

ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं.''

2. ''एक क़ब्रिस्तान में घर मिल रहा है

जिस में तह-ख़ानों से तह-ख़ाने लगे हैं.''

3.  ''रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया

इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो.''

4. ''आज सड़कों पर लिखे हैं सैंकड़ों नारे न देख,

घर अंधेरा देख तू आकाश के तारे न देख.''

5. ''तुम्हारे पांव के नीचे कोई ज़मीन नहीं,

कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं.''

6. ''थोड़ी आंच बची रहने दो, थोड़ा धुंआ निकलने दो,

तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफिर आएंगे.''

7. ''गूंगे निकल पड़े हैं ज़बां की तलाश में,

सरकार के ख़िलाफ़ ये साज़िश तो देखिए.''

8. ''जिस तबाही से लोग बचते थे,

वो सर-ए-आम हो रही है अब.''

9. ''कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,

एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो.''

10. ''ज़िंदगी जब अज़ाब होती है,

आशिक़ी कामयाब होती है.''

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